कुतूहल अध्याय 3 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आपने कभी कदन्न से बने खाद्य पदार्थ खाए हैं?
उत्तर

हाँ — मिलेट भारतीय रसोई में उससे कहीं अधिक आते हैं जितना हम ध्यान देते हैं। ज्वार, बाजरा, रागी और सांवा भारत की देशज फसलें हैं और सदियों से भारतीय आहार का अभिन्न अंग रहे हैं।

मिलेटइससे बनने वाले व्यंजनकहाँ अधिक प्रचलित
बाजरागुड़-घी के साथ बाजरे की रोटी, बाजरे की खिचड़ी, राबराजस्थान, हरियाणा, गुजरात
ज्वारज्वार की भाकरी, हुरडा, ज्वार का उपमामहाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना
रागीरागी मुड्डे, रागी की रोटी, रागी माल्ट, मंडुए की रोटीकर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तराखंड
सांवासांवा की खीर और खिचड़ी, व्रत में प्रयुक्तउत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड
मिलेट फिर लोकप्रिय क्यों हो रहे हैं: ये अत्यधिक पौष्टिक अनाज हैं — विटामिन, आयरन और कैल्सियम जैसे खनिजों तथा आहारीय रेशों के अच्छे स्रोत। इसी कारण इन्हें पोषक अनाज भी कहा जाता है। ये अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में सहजता से उग जाते हैं और चावल की तुलना में बहुत कम जल माँगते हैं।
क्या आप जानते हैं? भारत के प्रस्ताव पर वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष के रूप में मनाया गया — उन्हीं अनाजों का सम्मान जिन्हें भारतीय किसान हजारों वर्षों से उगाते आए हैं।
प्र2.
खेत से भोजन हमारी थाली तक कैसे पहुँचता है? इस प्रक्रिया के क्या चरण हैं? इस प्रक्रिया में कौन-कौन से लोग सम्मिलित होते हैं?
उत्तर

रोटी की कहानी का अनुसरण कीजिए, ठीक वैसे ही जैसे चित्र 3.10 में दिखाया गया है।

1. किसान द्वारा गेहूँ उगाना 2. मड़ाई और ओसाई 3. अनाज का भंडारण 4. पीसना और पैक करना 5. दुकान तक परिवहन 6. हमारी थाली में भोजन प्रत्येक तीर में समय, धन और ईंधन लगता है — और रोटी के खाद्य मील बढ़ते हैं।
रोटी की कहानी — खेत से थाली तक, जैसा आपकी पुस्तक के चित्र 3.10 में दिखाया गया है।

इसमें सम्मिलित लोग:

  • किसान और खेत मजदूर — जुताई, बुवाई, सिंचाई, कटाई।
  • मड़ाई और ओसाई करने वाले श्रमिक तथा मशीन चलाने वाले।
  • गोदाम या भंडार गृह के कर्मचारी
  • आटा चक्की के कर्मचारी, जो पीसते और पैक करते हैं।
  • ट्रक चालक, लदाई करने वाले और रेल कर्मचारी, जो परिवहन करते हैं।
  • दुकानदार और अंत में घर में भोजन बनाने वाले, जो आटा गूँधकर रोटी बनाते हैं।
यह जानना क्यों आवश्यक है: जब हम गिन सकें कि वह गेहूँ कितने हाथों से होकर आया, तब थाली में आधी रोटी छोड़ देना निर्दोष नहीं लगता।
प्र3.
क्या आप जानते हैं कि अनाज के अंकुरित होने के बाद उसका आटा बनने तक कितना समय और कितनी मेहनत लगती है?
उत्तर

इसमें महीनों लगते हैं, दिन नहीं। समय सीमा स्वयं पता कीजिए; उत्तर भारत के गेहूँ के लिए यह लगभग इस प्रकार है।

चरणलगभग समयकितना श्रम
जुताई और बुवाई (नवंबर)2–3 सप्ताहखेत तैयार करना, खाद, बीज
अंकुरण और वृद्धिलगभग 4 महीने4–6 सिंचाई, निराई, कीट-पक्षी और छुट्टा पशुओं से रक्षा
कटाई (मार्च–अप्रैल)1–2 सप्ताहफसल काटना, बाँधना और ढोना
मड़ाई और ओसाईकुछ दिनअनाज को डंठल और भूसी से अलग करना
भंडारण और परिवहनकुछ दिन से कुछ महीनेबोरों में भरना, लादना, अनाज को सूखा और कीटों से सुरक्षित रखना
पीसना और पैक करनाकुछ घंटेआटा पिसाई और पैकिंग
बीज से रसोई के आटे तक: लगभग 5 से 6 महीने का श्रम, कई सिंचाइयों का जल और अनेक लोगों की मेहनत।
सीख: हमें उतना ही भोजन थाली में लेना चाहिए जितना हम खा सकें। यही एक आदत भोजन की बर्बादी घटाती है — और हमारे किसानों तथा समुदाय के अन्य सदस्यों के महीनों के समय और श्रम का सम्मान करती है।
प्र4.
स्थानीय भोजन खाने से किस प्रकार खाद्य मील को कम किया जा सकता है?
उत्तर

क्योंकि खाद्य मील का अर्थ ही है आहार द्वारा तय की गई दूरी — गेहूँ या किसी अन्य खाद्य पदार्थ के थैले द्वारा उत्पादक से उपभोक्ता तक तय की गई कुल दूरी। यदि उत्पादक पास ही हो, तो यह दूरी बहुत कम रहती है।

हिमाचल का सेब चेन्नई तक ≈ 2,700 किमी की यात्रा → अधिक खाद्य मील
20 किमी दूर के खेत का केला → बहुत कम खाद्य मील

स्थानीय आहार खाने से क्या होता है—

  • लागत घटती है — कम ईंधन, कम ट्रक, कम पैकिंग, इसलिए आहार सस्ता।
  • प्रदूषण घटता है — परिवहन में कम डीज़ल जलता है।
  • स्थानीय किसानों को सहायता मिलती है — धन परिवहन में जाने के बजाय पास के किसान के पास रहता है।
  • भोजन ताजा और स्वास्थ्यप्रद रहता है — उसी सुबह तोड़ी गई सब्जी के विटामिन तीन दिन की यात्रा में नष्ट नहीं होते।
  • शीत भंडारण और परिरक्षकों की आवश्यकता कम पड़ती है।
यह कीजिए: अपनी रसोई की पाँच वस्तुएँ देखिए और पता लगाइए कि प्रत्येक कहाँ से आई — पास की सब्जी मंडी से, दूसरे राज्य से या दूसरे देश से। मोटे तौर पर जोड़िए। यही आपके परिवार के उस दिन के खाद्य मील हैं।
प्र5.
भोजन को खेत से थाली तक पहुँचाने में सम्मिलित विभिन्न प्रक्रियाओं की समय सीमा (टाइमलाइन) का पता लगाने का प्रयास करें (चित्र 3.10)।
उत्तर

समय सीमा स्वयं बनाइए — किसी किसान, दुकानदार और आटा चक्की वाले से पूछकर। गेहूँ का एक बना-बनाया उदाहरण नीचे है, जिसे आप चावल, आलू या दूध के लिए बदल सकते हैं।

प्रक्रियाकबलगने वाला समय
बुवाईनवंबर1–2 सप्ताह
अंकुरण से पकने तकनवंबर से मार्चलगभग 120–140 दिन
कटाईमार्च के मध्य से अप्रैल1–2 सप्ताह
मड़ाई और ओसाईकटाई के तुरंत बाद2–5 दिन
गोदाम में भंडारणअप्रैल के बादकुछ सप्ताह से कई महीने
पीसना और पैक करनाआवश्यकता के अनुसारकुछ घंटे
खुदरा दुकान तक परिवहनउसी सप्ताह1–3 दिन
दुकान से हमारी थाली तकजिस दिन खरीदाकुछ घंटे
समय सीमा क्या दिखाती है: लगभग सारा समय खेत में लगता है और लगभग सारी दूरी खेत के बाद तय होती है। बर्बादी घटाने से पहला भाग बचता है और खाद्य मील घटाने से दूसरा। स्वस्थ खाएँ, मिल-बाँटकर खाएँ, खाने का सम्मान करें और स्थानीय उत्पादकों का समर्थन करें।
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