प्र1.
एक काँच के गिलास में ठंडा जल लेकर उसमें बर्फ के कुछ टुकड़े डालें, इसे पाँच मिनट तक बिना हिलाए-डुलाए रखें और अवलोकन करें। अपने अवलोकनों और मन में उठने वाले प्रश्नों को तालिका 8.1 में अंकित करें।
उत्तर
तालिका 8.1 इस प्रकार भरी जा सकती है। आप अपने अवलोकन इसी ढंग से लिखिए — एक स्तंभ में जो दिखे, दूसरे में जो प्रश्न उठे।
| मेरे अवलोकन | मेरे प्रश्न |
|---|---|
| गिलास की बाहरी सतह पर चारों ओर जल की छोटी-छोटी बूँदें दिखाई देती हैं। | जल तो मैंने केवल गिलास के भीतर डाला था, तो ये बूँदें कहाँ से आईं? |
| छोटी बूँदें धीरे-धीरे मिलकर बड़ी बूँदें बन जाती हैं और नीचे की ओर बहने लगती हैं। | छोटी बूँदें आपस में क्यों मिल जाती हैं? |
| बाहरी सतह छूने पर ठंडी और गीली लगती है। | क्या गिलास से रिसाव हो रहा है? या ठंडक ही जल उत्पन्न कर रही है? |
| गिलास के नीचे मेज पर जल का घेरा बन जाता है। | क्या भीतर का जल-स्तर उतना नीचे चला जाएगा? |
| बर्फ के टुकड़े छोटे होते जाते हैं और अंतत: पिघल जाते हैं। | क्या बर्फ के पिघलने का बाहर की बूँदों से कोई संबंध है? |
| धातु के पात्र से भी यही होता है, पर सामान्य ताप के जल वाले गिलास से नहीं। | तो क्या बूँदें बनने के लिए ठंडी सतह आवश्यक है? |
पुस्तक प्रश्न भी लिखवाती क्यों है: विज्ञान में एक अच्छा प्रश्न उतना ही मूल्यवान है जितना एक अच्छा अवलोकन। ऊपर की अंतिम पंक्ति वही प्रश्न है जो अंतत: रहस्य सुलझा देता है — वह ठंडे और सामान्य ताप वाले गिलास की तुलना करके सीधे असली कारण की ओर संकेत करता है।