कुतूहल अध्याय 8 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आवी और थिरव ने भी कई संभावित कारणों पर चर्चा की। आप इन संभावित कारणों के विषय में क्या सोचते हैं जिनका उल्लेख चित्र 8.4 में किया गया है?
उत्तर

चित्र 8.4 इस बात का सुंदर उदाहरण है कि वैज्ञानिक तर्क वास्तव में कैसे चलता है — हर कथन का उत्तर जाँच से दिया जाता है, ऊँची आवाज से नहीं।

चरणक्या कहा गयाक्या यह अच्छा कदम है?
1"मुझे लगता है कि काँच के गिलास से कुछ जल रिस गया होगा।"उचित आरंभिक अनुमान — इसकी जाँच की जा सकती है।
2"नहीं, यह रिस नहीं सकता। काँच के गिलास में जल का स्तर कम नहीं हुआ है।"अच्छा — यह अनुमान के विरुद्ध साक्ष्य प्रस्तुत करता है।
3"यह कम हुआ होगा परंतु इतना भी नहीं हुआ होगा कि देखा जा सके।"ईमानदार और महत्वपूर्ण — यह विचार की नहीं, मापन की कमजोरी की ओर संकेत करता है।
4"एक लंबी और संकीर्ण बोतल में जल के स्तर में हुआ मामूली परिवर्तन भी सहजता से दिख जाता है।"उत्कृष्ट — यह विधि को सुधारता है ताकि छोटा परिवर्तन भी दिख सके।
5"सामान्य तापमान पर हम किसी और गिलास में जल लेकर पता लगा सकते हैं कि कहीं जल का रिसाव तो नहीं हो रहा है।"सर्वोत्तम — यह एक नियंत्रण है। यदि काँच रिसता, तो गरम जल वाला गिलास भी रिसता।
मेरा विचार: प्रत्येक चरण तर्कसंगत है और कोई भी व्यक्तिगत आक्षेप नहीं है। बच्चे मतदान से उत्तर तय नहीं करते; वे बार-बार पूछते हैं कि "हम पता कैसे लगाएँ?" इसीलिए यह श्रृंखला एक सुनियोजित प्रयोग पर समाप्त होती है। चरण 5 सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि सामान्य ताप वाला गिलास बाहर से सूखा ही रहता है — इससे सिद्ध होता है कि काँच रिसता नहीं और असली कारण ठंडक है।
सुझाव: ध्यान दीजिए कि "गलत" विचार भी उपयोगी रहा। रिसाव को हटा देने से ही संघनन एकमात्र शेष व्याख्या बचा।
प्र2.
सोचें कि ऐसी जल की बूँदें आपने और कहाँ देखी हैं? आपने पौधों पर ओस की बूँदें देखी होंगी। हमें सुबह के समय ओस की बूँदें अधिक क्यों दिखाई देती हैं?
उत्तर

ऐसी बूँदें और कहाँ दिखती हैं:

  • रेफ्रिजरेटर से निकाली गई ठंडे जल की बोतल पर।
  • गरमी में ठंडे पेय की बोतल या लस्सी के स्टील के गिलास की बाहरी सतह पर।
  • जाड़े की सुबह खिड़की के शीशों और कार के शीशे की भीतरी सतह पर।
  • गरम पानी से नहाने के बाद स्नानघर के दर्पण और टाइलों पर।
  • ठंड से भीतर आते ही चश्मे पर, या मास्क लगाकर साँस छोड़ने पर।
  • पकते हुए बर्तन के ढक्कन की भीतरी सतह पर।
  • गरम चाय के कप के ऊपर रखे ठंडे स्टील के चम्मच पर धुंध के रूप में।

सुबह ओस अधिक क्यों दिखती है:

  1. रात भर पत्तियाँ, घास और अन्य वस्तुएँ खुले आकाश की ओर ऊष्मा खोती रहती हैं और आस-पास की वायु से भी ठंडी हो जाती हैं।
  2. उनके पास की वायु में जलवाष्प विद्यमान रहती है।
  3. जब यह आर्द्र वायु ठंडी पत्ती को छूती है तो वाष्प संघनित होकर छोटी बूँदें बना देती है — यही ओस है।
  4. सबसे ठंडा समय सूर्योदय से ठीक पहले होता है, इसलिए ओस तभी सर्वाधिक होती है। सूर्य चढ़ने पर सब कुछ गरम हो जाता है, बूँदें वाष्पित हो जाती हैं और दोपहर तक घास सूखी मिलती है।
यह गिलास वाली कहानी ही क्यों है: दोनों स्थितियों में आर्द्र वायु अपने से ठंडी सतह से मिलती है। गिलास को बर्फ ठंडा करती है; पत्ती रात भर ऊष्मा खोकर ठंडी होती है। वाष्प के पास गैस बने रहने का कोई उपाय नहीं बचता, अत: वह द्रव बन जाती है।
क्या आप जानते हैं? ओस स्वच्छ, शांत और ठंडी रातों में सबसे अधिक बनती है। बादल वाली रात में बादल ऊष्मा को वापस भेज देते हैं, पत्तियाँ पर्याप्त ठंडी नहीं हो पातीं और सुबह ओस कम मिलती है।
प्र3.
जब हम आधे भरे बर्तन में जल उबालकर उसे स्टील की प्लेट से ढक देते हैं तो जल की कुछ बूँदें प्लेट की भीतरी सतह पर जमा हो जाती हैं। ये जल की बूँदें कहाँ से आती हैं? इस बारे में आप क्या सोचते हैं?
उत्तर

ये बूँदें उबलते जल से उठती जलवाष्प से बनती हैं। ये छींटे नहीं हैं, और बाहर से कोई जल नहीं आया है।

100 °C पर उबलता जल → जलवाष्प ऊपर उठती है
वाष्प ठंडी स्टील की प्लेट से मिलती है
वाष्प ऊष्मा खोती है → द्रव बनती है → प्लेट की भीतरी सतह पर बूँदें

इसके प्रमाण:

  • बूँदें प्लेट की भीतरी (निचली) सतह पर होती हैं — उसी ओर जो वाष्प की ओर है, ऊपर की ओर नहीं।
  • ढकने से पहले प्लेट को पूरी तरह पोंछ देने पर भी ये बनती हैं।
  • ठंडी प्लेट पर बूँदें अधिक और तेजी से बनती हैं; आँच पर गरम की गई प्लेट पर लगभग नहीं बनतीं।
  • बर्तन का जल धीरे-धीरे कम होता जाता है — वही खोया हुआ जल आप प्लेट पर एकत्र कर रहे हैं।
प्लेट का ठंडा होना क्यों आवश्यक है: संघनन के लिए वाष्प का ऊष्मा खोना आवश्यक है। सामान्य ताप की प्लेट 100 °C से बहुत नीचे होती है, अत: उसे छूते ही वाष्प ठंडी होकर पुन: जल बन जाती है। यदि प्लेट भाप जितनी ही गरम होती तो बूँदें बनतीं ही नहीं।
दैनिक उपयोग: इडली का पात्र, भापा व्यंजन और राइस कुकर इसी सिद्धांत पर काम करते हैं — और आसवन (डिस्टिलेशन) से खारे या मैले जल से स्वच्छ जल भी इसी प्रकार प्राप्त किया जाता है।
प्र4.
जब वायु में विद्यमान जलवाष्प ठंडी सतह के संपर्क में आती है तो जल की बूँदें बनती हैं। क्या क्रियाकलाप 8.3 में काँच के गिलास की बाहरी सतह पर दिखाई देने वाला जल भी संघनन के कारण हो सकता है?
उत्तर

हाँ। वह ठीक यही है। इस प्रक्रम को संघनन कहते हैं — जलवाष्प के द्रव अवस्था में परिवर्तन की प्रक्रिया संघनन कहलाती है।

गिलास इसके लिए आदर्श स्थिति क्यों है:

  1. बर्फ भीतर के जल को लगभग 0 °C पर रखती है, अत: गिलास की दीवार बहुत ठंडी हो जाती है।
  2. कमरे की वायु में सदैव जलवाष्प रहती है — यही उसकी आर्द्रता है।
  3. ठंडे काँच को छूने वाली वायु ठंडी हो जाती है। ठंडी वायु उतनी वाष्प नहीं रोक पाती जितनी गरम वायु।
  4. अतिरिक्त वाष्प काँच पर छोटी-छोटी बूँदों की परत के रूप में संघनित हो जाती है, जो मिलकर बड़ी बूँदें बनाकर नीचे बहती हैं।
अध्याय इसे असंदिग्ध रूप से कैसे सिद्ध करता है: दो जाँचें की जाती हैं। (क) क्रियाकलाप 8.4 में पूरे सेट को डिजिटल तराजू पर तौला जाता है और पाठ्यांक बढ़ जाता है — अर्थात् जल वायु से जुड़ा है, भीतर से गया नहीं। (ख) भीतर के जल का स्तर स्थाई मार्कर से चिह्नित किया जाता है और वह नीचे नहीं जाता, अत: कुछ भी रिसा नहीं। दोनों मिलकर प्रश्न का निपटारा कर देते हैं।
क्या आप जानते हैं? संघनन वाष्पीकरण का उलटा है। वाष्पीकरण को ऊष्मा चाहिए; संघनन ऊष्मा देता है। इसीलिए प्रेशर कुकर की भाप उसी 100 °C के उबलते जल से कहीं अधिक बुरी तरह जला सकती है।
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