कुतूहल अध्याय 8 क्रियाकलाप 8.4

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पूर्वानुमान लगाएँ कि डिजिटल तराजू पर रखे ठंडे जल के द्रव्यमान पर क्या प्रभाव पड़ा होगा। क्या यह बढ़ेगा, घटेगा या समान रहेगा?
उत्तर

पूर्वानुमान: पाठ्यांक बढ़ेगा।

सोचिए कि तीनों में से प्रत्येक उत्तर का क्या अर्थ होगा:

यदि पाठ्यांक……तो इसका अर्थ होगा
घटता हैजल गिलास से रिसकर टपक रहा है, या वाष्प बनकर निकल रहा है
समान रहता हैबाहर का जल भीतर से ही आया — न कुछ मिला, न कुछ गया
बढ़ता हैजल बाहर से जुड़ा है — वायु से

चूँकि गिलास स्टील की प्लेट से ढका है, भीतर से कोई वाष्प बाहर नहीं जा सकती; और संघनन निरंतर वायु का जल ठंडी बाहरी दीवार पर जमा करता रहता है, अत: पलड़े पर कुल द्रव्यमान बढ़ता जाता है — पहले धीरे और फिर लगातार, जब तक गिलास ठंडा रहता है।

पहले पूर्वानुमान लिखना क्यों आवश्यक है: पाठ्यांक बदलने से पहले अपनी अपेक्षा लिख देना ही इस क्रियाकलाप को वास्तविक जाँच बनाता है। यदि द्रव्यमान घटता तो रिसाव वाला विचार बचा रह जाता। वह घटा नहीं — अत: संघनन पर आधारित पूर्वानुमान सही निकला।
प्र2.
प्रत्येक पाँच मिनट पर तराजू के पाठ्यांक का अवलोकन कर उसे 30 मिनट तक तालिका 8.2 में अंकित करें। क्या आपके निष्कर्ष आपके पूर्वानुमानों से मेल खाते हैं? अपने प्रेक्षणों की व्याख्या करें।
उत्तर

हाँ, निष्कर्ष पूर्वानुमान से मेल खाते हैं — द्रव्यमान बढ़ता है। प्रतिदर्श पाठ्यांक इस प्रकार हो सकते हैं (आपके मान गिलास के आकार और दिन की आर्द्रता के अनुसार भिन्न होंगे):

समय (मिनट में)पूरे सेट का द्रव्यमानआरंभ से वृद्धि
0254.0 g
5254.3 g0.3 g
10254.7 g0.7 g
15255.0 g1.0 g
20255.4 g1.4 g
25255.7 g1.7 g
30256.0 g2.0 g

प्रेक्षणों की व्याख्या:

  • गिलास और प्लेट ठंडे हैं। वायु की जलवाष्प इस ठंडी सतह से मिलकर बाहर की ओर बूँदों में संघनित हो जाती है।
  • वह जल पहले वायु में था और अब तराजू के पलड़े पर है — इसलिए पाठ्यांक बढ़ता है।
  • वृद्धि लगभग एक-सी रहती है — हर पाँच मिनट में लगभग 0.3 से 0.4 g — क्योंकि सतह ठंडी रहने तक संघनन चलता रहता है।
  • बर्फ पिघल जाने और गिलास के कमरे के ताप तक आ जाने पर वृद्धि धीमी होकर रुक जाती है।
मान इतने छोटे क्यों हैं: केवल बूँदों की पतली परत बनती है, अत: परिवर्तन एक ग्राम के अंश जितना होता है — इसीलिए डिजिटल तराजू का उपयोग किया जाता है। साधारण तुला कुछ भी न दिखाती और आप गलती से यह समझ लेते कि कुछ हुआ ही नहीं।
सुझाव: दो पाठ्यांकों के बीच गिलास उठाइए नहीं और उस पर साँस मत छोड़िए। दोनों से मापन बिगड़ जाएगा। बिना कुछ छुए केवल डिस्प्ले पढ़िए।
प्र3.
डिजिटल तराजू पर ली गई रीडिंग अब बढ़ गई है। क्या हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि जल का रिसाव गिलास की सतह से नहीं हो रहा है? क्या हम यह भी निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि गिलास की बाह्य सतह पर एकत्रित जल केवल संघनन के कारण है?
उत्तर

पहले प्रश्न पर — निश्चित रूप से नहीं। दूसरे प्रश्न पर — नहीं। पुस्तक स्वयं कहती है, नहीं, हम क्रियाकलाप 8.4 से ऐसा निष्कर्ष नहीं निकाल सकते।

यहाँ एक प्रयोग पर्याप्त क्यों नहीं है:

  • तराजू पूरे सेट का सामूहिक द्रव्यमान दिखाता है — गिलास, जल, बर्फ, प्लेट और बाहर की बूँदें, सब मिलाकर। यदि काँच से थोड़ा जल रिस भी जाता, तो वह भी उसी पलड़े पर रहता और कुल द्रव्यमान उससे नहीं बदलता।
  • अत: द्रव्यमान की वृद्धि यह सिद्ध करती है कि वायु से जल जुड़ा है, पर यह सिद्ध नहीं कर सकती कि साथ-साथ रिसाव नहीं हो रहा। दोनों एक साथ भी हो सकते हैं।
प्रयोग क्या सिद्ध करता है: यह निश्चित रूप से सिद्ध करता है कि तंत्र के बाहर से जल जुड़ा है — अर्थात् संघनन अवश्य हो रहा है। यह एक ठोस परिणाम है। खुला यह रहता है कि रिसाव भी हो रहा है या नहीं। एक अच्छा वैज्ञानिक इतना ही बताता है, इससे अधिक नहीं।
सुझाव: यह बहुत उपयोगी आदत है — हर प्रयोग के बाद पूछिए, "मेरा परिणाम किस बात को असंभव सिद्ध करता है और किस बात को खुला छोड़ता है?" आँकड़ों से अधिक दावा करना विज्ञान की सबसे आम भूल है।
प्र4.
आप यह दिखाने के लिए और क्या कर सकते हैं कि काँच के गिलास से जल नहीं रिस रहा है? उत्तर खोजने के लिए आप क्रियाकलाप 8.4 में क्या बदलाव करेंगे? आप क्या अवलोकन करते हैं और इससे क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर

पुस्तक में दिया गया संशोधन: क्रियाकलाप 8.4 को दोहराइए, पर इस बार काँच के गिलास पर जल के स्तर को एक स्थाई मार्कर या पारदर्शी टेप से चिह्नित कीजिए। फिर तराजू नहीं, उस चिह्न को देखिए।

आप क्या अवलोकन करते हैं:

  • भीतर जल का स्तर नीचे नहीं जाता — वह ठीक चिह्न पर बना रहता है (बल्कि बर्फ पिघलने से थोड़ा बढ़ ही जाता है)।
  • इस बीच गिलास की बाहरी सतह पर अधिक से अधिक जल एकत्रित होता जाता है।

निष्कर्ष: काँच से जल नहीं रिस रहा। बाहर का अतिरिक्त जल वायु से आ रहा है और संघनन के कारण वहाँ एकत्रित हो रहा है।

मार्कर से निपटारा कैसे होता है: पिछला प्रयोग सब कुछ एक साथ तौलता था और इसलिए "वायु से मिला" तथा "भीतर से गया" को अलग नहीं कर पाता था। चिह्न केवल भीतर के जल को देखता है। यदि रिसाव होता तो स्तर अवश्य गिरता। वह गिरता नहीं — अत: रिसाव समाप्त।
दो और जाँचें जोड़ सकते हैं: (1) चौड़े गिलास के स्थान पर लंबी, संकरी बोतल लीजिए, ताकि बहुत थोड़ा जल घटने पर भी स्तर में बड़ा अंतर दिखे; (2) पास में सामान्य ताप के जल वाला वैसा ही गिलास रखिए — वह बाहर से पूरी तरह सूखा रहता है, जिससे सिद्ध होता है कि बूँदें ठंडी सतह के कारण बनती हैं, काँच के कारण नहीं।
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