प्र1.
वायु में जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता भी कहा जाता है। आपके क्षेत्र के दैनिक आर्द्रता आँकड़ों को समाचार-पत्रों और अन्य स्रोतों में बताया जाता है। एक वर्ष के आँकड़े संकलित करें और यदि कोई पैटर्न है तो उसका अध्ययन करें।
उत्तर
यह कैसे करें:
- एक कॉपी में तीन स्तंभ बनाइए — दिनांक, अधिकतम आर्द्रता (%), न्यूनतम आर्द्रता (%)। कई समाचार-पत्र दोनों छापते हैं; कुछ केवल एक मान देते हैं।
- प्रतिदिन एक ही समय पर, एक ही स्रोत से मान अंकित कीजिए — समाचार-पत्र का मौसम स्तंभ, भारत मौसम विज्ञान विभाग की वेबसाइट, या विद्यालय का मौसम केंद्र।
- हर महीने के अंत में मासिक औसत निकालिए और उसे आलेख पर बिंदु के रूप में अंकित कीजिए: नीचे महीने, ऊपर आर्द्रता। बिंदुओं को मिलाइए।
- उसी पत्रक पर अपने क्षेत्र के मानसून के महीने चिह्नित कीजिए।
भारत के अधिकांश भागों में जो पैटर्न मिलेगा:
| ऋतु | सामान्य आर्द्रता | क्या दिखाई देता है |
|---|---|---|
| तीव्र ग्रीष्म (अप्रैल–मई, आंतरिक भाग) | कम, प्राय: 20–40 % | कपड़े बहुत जल्दी सूखते हैं; मटका जल खूब ठंडा रखता है |
| मानसून (जून–सितंबर) | अधिक, प्राय: 80–95 % | कपड़ों में सीलन आती है और वे पूरा दिन लेते हैं |
| शीत (दिसंबर–जनवरी) | मध्यम; भोर में अधिक, दोपहर तक कम | सुबह घनी ओस और कोहरा |
दैनिक मान इतना क्यों बदलता है: आर्द्रता प्राय: सूर्योदय से ठीक पहले सर्वाधिक और दोपहर में सबसे कम होती है। वायु में वाष्प की मात्रा लगभग वही रहती है, पर गरम दोपहर की वायु कहीं अधिक वाष्प रोक सकती है, अत: वह भरने से और दूर रहती है — और वाष्पीकरण तेज हो जाता है।
सुझाव: चेन्नई, मुंबई और कोच्चि जैसे तटीय नगर वर्ष भर आर्द्र रहते हैं, जबकि जयपुर, नागपुर और दिल्ली में शुष्क ग्रीष्म और आर्द्र मानसून के बीच बड़ा अंतर रहता है। अपना आलेख किसी दूसरे नगर के मित्र के आलेख से मिलाइए।