कुतूहल अध्याय 8 क्रियाकलाप 8.5

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
एक पात्र में बर्फ का एक टुकड़ा डालें और इसे दूसरे आकार के पात्र में स्थानांतरित करें। आप बर्फ के टुकड़े के आकार में क्या परिवर्तन देखते हैं?
उत्तर

कोई परिवर्तन नहीं। बर्फ का टुकड़ा अपना ही आकार बनाए रखता है — आप उसे किसी भी पात्र में रखिए, वह घनाकार ही रहता है।

  • गोल कटोरी में रखिए — वह घन ही रहता है।
  • लंबे गिलास में डालिए — वह घन ही रहता है।
  • चपटी प्लेट पर रखिए — वह घन ही रहता है।

केवल इतना होता है कि वह धीरे-धीरे छोटा होता जाता है और उसके कोने गोल हो जाते हैं, पर वह पिघलना है, पात्र का प्रभाव नहीं।

ठोस अपना आकार क्यों बनाए रखता है: बर्फ में कण एक निश्चित, नियमित व्यवस्था में कसकर बँधे रहते हैं। वे कंपन कर सकते हैं पर अपने स्थान से हट नहीं सकते, इसलिए पूरा टुकड़ा अपना रूप नहीं बदल सकता। यही ठोस अवस्था का मूल गुण है।
स्वयं जाँचें: यही प्रयोग एक कंचे, चॉक के टुकड़े और रबड़ के साथ कीजिए। इनमें से कोई भी पात्र का आकार नहीं लेता — सभी ठोस ऐसा ही व्यवहार करते हैं।
प्र2.
जल को एक पात्र से भिन्न आकार के दूसरे पात्र में डालें। अवलोकन करें कि बर्फ की तुलना में जल का व्यवहार कैसा है। क्या आपने ध्यान दिया कि जल एक पात्र से दूसरे पात्र में कैसे प्रवाहित हो जाता है? इसके आकार का क्या होता है?
उत्तर

जल का व्यवहार बर्फ से ठीक उलटा है।

  • वह एक पात्र से दूसरे में सहजता और निरंतरता से प्रवाहित होता है — उसे उँडेला जा सकता है और उँडेलते समय वह धार का आकार ले लेता है।
  • वह नए पात्र का आकार पूरी तरह ले लेता है। गोल कटोरे में गोल, चौकोर डिब्बे में चौकोर, लंबे गिलास में लंबा स्तंभ।
  • हर पात्र में उसकी ऊपरी सतह समतल रहती है।
  • उसकी मात्रा नहीं बदलती। कटोरे से गिलास में डाला गया 200 mL जल गिलास में भी 200 mL ही रहता है। आकार बदला; आयतन स्थिर रहा।
द्रव ऐसा क्यों करता है: जल में कण अब भी पास-पास हैं — इसीलिए आयतन नहीं बदलता — पर वे निश्चित स्थानों पर बँधे नहीं होते। वे एक-दूसरे पर फिसल सकते हैं। अत: जल स्वयं को किसी भी पात्र में समायोजित कर लेता है और बह भी सकता है।
सुझाव: ध्यान से याद रखिए — द्रव का आयतन निश्चित होता है पर आकार निश्चित नहीं। ठोस के दोनों निश्चित होते हैं। यह जोड़ी ठीक से याद रहने पर अवस्थाओं के अधिकांश प्रश्न हल हो जाते हैं।
प्र3.
एक साफ सतह पर जल डालें और देखें कि यह कैसे फैलता है। अपने अवलोकनों को तालिका 8.3 में अंकित करें।
उत्तर

अवलोकन: जल ढेर बनकर नहीं रहता। वह सतह पर फैलकर पतली, चपटी परत बना लेता है और तब तक फैलता रहता है जब तक कोई किनारा या नाली उसे न रोके।

यह भी ध्यान दीजिए कि मात्रा नहीं बदलती — वही जल पतली परत में अधिक क्षेत्र घेर लेता है। जल आयतन स्थिर रखते हुए फैलता है।

तालिका 8.3 इस प्रकार भरी जाएगी:

गुणबर्फ (ठोस अवस्था)जल (द्रव अवस्था)जलवाष्प (गैसीय अवस्था)
आकारनिश्चित — हर पात्र में अपना ही आकारनिश्चित नहीं — पात्र का आकार ले लेता हैकोई आकार नहीं — पूरे पात्र को भर देती है
बहने की क्षमतानहीं बहतीसहजता से बहता हैहर दिशा में स्वतंत्र रूप से बहती है
प्रसारण (फैलने) की क्षमतानहीं फैलतीसतह पर फैलता है, आयतन वही रहता हैसमस्त उपलब्ध स्थान में फैल जाती है
बर्फ क्यों नहीं फैलती पर जल फैलता है: फैलने के लिए कणों का एक-दूसरे के पास से खिसकना आवश्यक है। बर्फ में वे ऐसा नहीं कर सकते; जल में कर सकते हैं।
प्र4.
जब जल अपने जलवाष्पीय रूप में परिवर्तित हो जाता है तो यह जलवाष्प कैसे प्रसारित होती है? इसकी तुलना जल के प्रसारण व्यवहार से करें।
उत्तर

जलवाष्प अपने लिए उपलब्ध समस्त स्थान में फैल जाती है — हर दिशा में, ऊपर की ओर भी — जब तक वह पूरे कमरे या पूरे पात्र में समान रूप से मिल न जाए।

तुलना का बिंदुजल (द्रव)जलवाष्प (गैस)
फैलने की दिशाकेवल सतह पर बगल की ओर; यह चढ़ नहीं सकताहर दिशा में, ऊपर की ओर भी
कितनी दूर फैलता हैकिनारे तक; पात्र में नीचे ही रहता हैजब तक पूरा पात्र या कमरा न भर जाए
आयतनस्थिर — 200 mL, 200 mL ही रहता हैनिश्चित नहीं — जितना स्थान मिले, उतना घेर लेती है
ऊपरी सतहसमतल सतह होती हैकोई सतह नहीं होती
क्या दिखाई देती है?हाँनहीं — अदृश्य
गैस इतनी पूर्णता से क्यों फैलती है: जलवाष्प में कण बहुत दूर-दूर होते हैं और सब दिशाओं में बहुत तेज गति करते हैं। उन्हें बाँधकर रखने वाला लगभग कुछ नहीं होता, अत: वे तब तक चलते रहते हैं जब तक सर्वत्र समान रूप से न फैल जाएँ। इसीलिए गैस का न आकार निश्चित होता है और न आयतन।
दैनिक प्रमाण: गीला फर्श केवल वहीं गीला रहता है जहाँ जल है, पर तवे पर सिंकती रोटी की गंध एक मिनट में पूरे घर तक पहुँच जाती है। गैसें फैलती हैं; द्रव नहीं।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ