कुतूहल अध्याय 8 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
ठोस, द्रव और गैसीय अवस्था में जल के गुणों में क्या-क्या अंतर हैं?
उत्तर

तीनों अवस्थाएँ आकार, बहाव, प्रसारण और आयतन में भिन्न हैं — और ये सभी अंतर इस बात से निकलते हैं कि सूक्ष्म कण किस प्रकार व्यवस्थित हैं।

बर्फ — ठोस अवस्था जल — द्रव अवस्था जलवाष्प — गैसीय अवस्था आकार: निश्चित, अपना बहना: नहीं फैलना: नहीं आकार: पात्र जैसा बहना: हाँ फैलना: हाँ, आयतन स्थिर आकार: कोई नहीं बहना: हाँ पूरा स्थान भर देती है
एक ही पदार्थ की तीन अवस्थाएँ। बर्फ में कण निश्चित, नियमित व्यवस्था में रहते हैं और केवल अपने स्थान पर कंपन करते हैं। जल में वे पास-पास तो हैं पर एक-दूसरे पर फिसल सकते हैं। जलवाष्प में वे बहुत दूर-दूर होते हैं और स्वतंत्र रूप से गति करते हुए समस्त उपलब्ध स्थान भर देते हैं।

अध्याय के शब्दों में अंतर:

  • बर्फ (ठोस): किसी भी पात्र में रखी जाए, अपना आकार बनाए रखती है। न बहती है, न फैलती है।
  • जल (द्रव): बहता है और अपना आकार बदलता है। इसका कोई निश्चित आकार नहीं होता, यह पात्र का आकार ले लेता है, पर इसका आयतन स्थिर रहता है। यह आयतन स्थिर रखते हुए फैलता भी है।
  • जलवाष्प (गैस): समस्त उपलब्ध स्थान में फैल जाने का गुण दिखाती है। गैस निश्चित आकार धारण नहीं करती। जलवाष्प सामान्य ताप पर भी विद्यमान रहती है, यद्यपि यह अदृश्य है, और हमारे आस-पास की वायु में उपस्थित रहती है।
कण-चित्र सब कुछ क्यों समझा देता है: जब कण बँधे हों तो आकार निश्चित होता है (ठोस); जब कण एक-दूसरे को छूते हों — चाहे बँधे हों या फिसलते हों — तो आयतन निश्चित होता है (ठोस और द्रव); जब कण दूर-दूर और स्वतंत्र हों तो दोनों में से कुछ भी निश्चित नहीं होता (गैस)।
प्र2.
अपने आस-पास देखें और ठोस पदार्थों के कुछ उदाहरण खोजें। द्रव पदार्थों के अन्य उदाहरण क्या हैं जिनके विषय में आप सोच सकते हैं? पाँच अन्य उदाहरणों के बारे में सोचें। गैसों के अन्य उदाहरण क्या हैं जिनके बारे में आप सोच सकते हैं?
उत्तर

पुस्तक आरंभ करा देती है — ठोस: पत्थर, लकड़ी, बर्तन; द्रव: दूध, तेल; गैस: ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड। आस-पास से कुछ और उदाहरण:

ठोसद्रवगैस
पत्थर, ईंट, लकड़ीदूधऑक्सीजन
काँच, स्टील, ताँबे का तारसरसों या नारियल का तेलकार्बन डाइऑक्साइड
चॉक, पेंसिल, पुस्तकशहदनाइट्रोजन
बर्फ, चीनी, नमकमिट्टी का तेल और पेट्रोलजलवाष्प
प्लास्टिक का स्केल, रबड़, कपड़ासिरका, नींबू का रस, चायएलपीजी (रसोई गैस)
मोमबत्ती का मोम, शीतकाल में घीस्याही, सैनिटाइजर, छाछगुब्बारे की हीलियम; स्वयं वायु

पुस्तक के अनुसार पाँच अन्य द्रव: शहद, मिट्टी का तेल, नींबू का रस, स्याही और छाछ।

एक ध्यान रखने योग्य बात: एक ही पदार्थ एक से अधिक अवस्थाओं में मिल सकता है। अध्याय में मोम, तेल और घी का उल्लेख इसीलिए है — घी और नारियल का तेल गरमी में द्रव और जाड़े में ठोस होते हैं, और मोम मोमबत्ती में ठोस पर लौ के पास द्रव होता है। अवस्था ताप पर निर्भर करती है, पदार्थ के नाम पर नहीं।
सुझाव: गैस लिखते समय याद रखिए कि अधिकांश गैसें अदृश्य होती हैं। "धुआँ" या "भाप" को गैस मत लिखिए — धुएँ में ठोस कण होते हैं और भाप में द्रव बूँदें।
प्र3.
क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि आप रसोईघर में प्रवेश किए बिना भी खाना पकने की गंध को अनुभव कर सकते हैं? यह गंध हम तक कैसे पहुँचती है?
उत्तर

हाँ। गंध हम तक इसलिए पहुँचती है क्योंकि वह वायु के माध्यम से, गैस के रूप में यात्रा करती है।

  1. भोजन को गरम करने पर उसमें उपस्थित गंध देने वाले पदार्थों के अत्यंत सूक्ष्म कण सतह से निकलकर गैस बन जाते हैं — ठीक वैसे ही जैसे जल जलवाष्प बनता है।
  2. ये गैस-कण बहुत तेजी से और सब दिशाओं में गति करते हैं।
  3. चूँकि गैस समस्त उपलब्ध स्थान में फैल जाती है, ये कण रसोई से निकलकर गलियारे और हर कमरे तक पहुँच जाते हैं।
  4. वे हमारी नाक तक पहुँचते हैं और भोजन देखने से बहुत पहले ही हमें तड़के की गंध मिल जाती है।
यह उदाहरण यहीं क्यों रखा गया है: यह गैस के उसी गुण का सीधा प्रमाण है जो अभी पढ़ा गया। पुस्तक के शब्दों में — स्वादिष्ट खाना पकने की सुगंध वायु के माध्यम से फैलती है और हमारी नाक तक पहुँचती है, भले ही हम रसोईघर में न हों। ठोस और द्रव ऐसा नहीं कर सकते; मेज पर रखी गरम दाल वहीं रहती है, पर उसकी गंध सबको मिल जाती है।
स्वयं जाँचें: कमरे के एक कोने में इत्र की शीशी खोलिए या कुछ करी पत्ते मसलिए और दूसरे कोने में चुपचाप खड़े रहिए। आधे मिनट में गंध पहुँच जाती है — और गरम दिन में यह और जल्दी पहुँचती है, क्योंकि अधिक ताप पर कण अधिक तेज गति करते हैं।
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