कुतूहल अध्याय 8 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आप जल की अवस्था कैसे परिवर्तित कर सकते हैं? आप बर्फ को तुरंत उसकी द्रव अवस्था अर्थात् जल में कैसे परिवर्तित कर सकते हैं?
उत्तर

जल की अवस्था ऊष्मा देकर या ऊष्मा हटाकर बदली जाती है — और कुछ नहीं चाहिए।

बर्फ  + ऊष्मा  → जल  + ऊष्मा  → जलवाष्प
जलवाष्प  − ऊष्मा  → जल  − ऊष्मा  → बर्फ

बर्फ को तुरंत जल में बदलने के लिए ऊष्मा तेजी से दीजिए। व्यावहारिक उपाय:

  • बर्फ को फ्रीजर से निकालकर गरम कमरे में या धूप में रखिए।
  • उसे हथेली में पकड़िए, या उस पर गुनगुना जल डालिए।
  • उसे प्लास्टिक के स्थान पर धातु (स्टील) के पात्र में रखिए — धातु ऊष्मा तेजी से पहुँचाती है।
  • बर्फ को छोटे टुकड़ों में तोड़िए या कुचल दीजिए। छोटे टुकड़ों की सतह गरम वायु के संपर्क में कहीं अधिक होती है, अत: वे बड़े टुकड़े से बहुत जल्दी पिघलते हैं।
  • बर्फ को जल में हिलाइए — बहता जल बर्फ की सतह तक निरंतर नई ऊष्मा लाता रहता है।
ऊष्मा ही निर्णायक क्यों है: बर्फ 0 °C पर पिघलती है। उसे पिघलाने के लिए पहले उस ताप तक लाना होगा और फिर पिघलने के दौरान लगातार ऊष्मा देनी होगी। ऊपर के सभी उपाय वास्तव में बर्फ तक ऊष्मा तेजी से पहुँचाने के ही तरीके हैं।
क्या आप जानते हैं? बर्फ के पिघलने के दौरान ऊष्मा जाती रहने पर भी उसका ताप 0 °C पर ही टिका रहता है। सारी ऊष्मा कणों को उनके निश्चित स्थानों से मुक्त करने में लग जाती है। बर्फ का अंतिम कण पिघलने के बाद ही जल गरम होना आरंभ करता है।
प्र2.
यदि हमें जल को बर्फ में परिवर्तित करना है तो क्या करना होगा?
उत्तर

हमें जल से ऊष्मा हटानी होगी — अर्थात् उसे 0 °C तक ठंडा करना होगा और ठंडा करते रहना होगा।

पुस्तक के शब्दों में: जल को ठंडे वातावरण जैसे कि हिमीकरण यंत्र (फ्रीजर) में रखकर ऐसा किया जा सकता है। जल जम जाता है और बर्फ में परिवर्तित हो जाता है। बर्फ बाहर निकालने पर पिघल जाती है और जल में परिवर्तित हो जाती है।

परिवर्तनप्रक्रम का नामक्या करना होगाताप
ठोस → द्रवपिघलनाऊष्मा देनाबर्फ 0 °C पर पिघलती है
द्रव → ठोसहिमीकरणऊष्मा हटानाजल 0 °C पर जमता है
द्रव → गैसवाष्पीकरण (और उबलना)ऊष्मा देनावाष्पीकरण हर ताप पर; उबलना 100 °C पर
गैस → द्रवसंघननऊष्मा हटानाजब भी वाष्प ठंडी सतह से मिले
फ्रीजर कैसे काम करता है: फ्रीजर "ठंडक बनाता" नहीं है। वह भीतर के स्थान से ऊष्मा खींचकर बाहर फेंकता है — इसीलिए रेफ्रिजरेटर का पिछला भाग गरम लगता है। भीतर का जल ऊष्मा खोता है, उसके कण धीमे पड़कर निश्चित स्थानों पर बँध जाते हैं, और वह बर्फ बन जाता है।
और भी जानें! वायुमंडलीय जल जनित्र (Atmospheric Water Generator) मशीनें इसका उलटा विचार प्रयोग करती हैं। वे आर्द्र वायु को ठंडा करके उसकी जलवाष्प को संघनित करती हैं और उस जल को पीने योग्य बनाती हैं। यह वही प्रक्रम है जो बर्फ के ठंडे जल वाले गिलास के बाहर बूँदें बनाता है — बस बड़े पैमाने पर।
प्र3.
क्या आप जल के अतिरिक्त अन्य उदाहरण सोच सकते हैं जो ठोस से द्रव में परिवर्तित हो जाते हैं? हम मोमबत्ती के मोम को द्रव अवस्था में कैसे बदल सकते हैं? हम द्रव मोम को ठोस में कैसे बदल सकते हैं? आपने अन्य कौन-से द्रव पदार्थ देखे हैं जो ठोस में परिवर्तित हो जाते हैं?
उत्तर

हाँ — मोमबत्ती, जो मोम से बनती है, पुस्तक द्वारा दिया गया उदाहरण है। दैनिक जीवन के अनेक पदार्थ ऐसा ही व्यवहार करते हैं।

मोमबत्ती के मोम को द्रव में बदलना: मोमबत्ती जलाइए, या मोम का एक टुकड़ा चम्मच में लेकर आँच पर रखिए। मोम ऊष्मा लेकर पिघल जाता है और बत्ती के चारों ओर पारदर्शी द्रव मोम का छोटा-सा तालाब बन जाता है।

द्रव मोम को पुन: ठोस बनाना: उसे ठंडा कीजिए। लौ बुझाइए और पिघला मोम एक मिनट में जम जाता है; ठंडे चम्मच में डालने पर और भी जल्दी। पुस्तक के शब्दों में — हमें द्रव मोम को ठोस में बदलने के लिए उसे ठंडा करना होगा।

अन्य द्रव जिन्हें आपने ठोस में बदलते देखा होगा:

  • नारियल का तेल — शीतकाल में सफेद और ठोस हो जाता है, गरमी में फिर साफ द्रव। पुस्तक इसी के विषय में पूछती है।
  • घी और मक्खन — जाड़े में जमे हुए, मई में बहते हुए।
  • ठंडी रसोई में वनस्पति घी
  • पिघला गुड़ या चीनी की चाशनी, जो जमकर चिक्की या लॉलीपॉप बन जाती है।
  • पिघली चॉकलेट, जो फ्रिज में फिर जम जाती है।
  • घंटा ढालने वाले द्वारा साँचे में डाली पिघली धातु, जो जमकर ठोस घंटा बन जाती है।
  • और निस्संदेह जल स्वयं, जो जमकर बर्फ बनता है।
सामान्य नियम: ठोस के द्रव अवस्था में परिवर्तित होने के प्रक्रम को पिघलना कहते हैं; द्रव के ठोस अवस्था में परिवर्तित होने के प्रक्रम को हिमीकरण कहते हैं। प्रत्येक पदार्थ का अपना गलनांक होता है — नारियल का तेल लगभग 24 °C पर जम जाता है, इसलिए एक ठंडी रात ही पर्याप्त है, जबकि जल को 0 °C और लोहे को 1500 °C से भी अधिक चाहिए।
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