हाँ — मोमबत्ती, जो मोम से बनती है, पुस्तक द्वारा दिया गया उदाहरण है। दैनिक जीवन के अनेक पदार्थ ऐसा ही व्यवहार करते हैं।
मोमबत्ती के मोम को द्रव में बदलना: मोमबत्ती जलाइए, या मोम का एक टुकड़ा चम्मच में लेकर आँच पर रखिए। मोम ऊष्मा लेकर पिघल जाता है और बत्ती के चारों ओर पारदर्शी द्रव मोम का छोटा-सा तालाब बन जाता है।
द्रव मोम को पुन: ठोस बनाना: उसे ठंडा कीजिए। लौ बुझाइए और पिघला मोम एक मिनट में जम जाता है; ठंडे चम्मच में डालने पर और भी जल्दी। पुस्तक के शब्दों में — हमें द्रव मोम को ठोस में बदलने के लिए उसे ठंडा करना होगा।
अन्य द्रव जिन्हें आपने ठोस में बदलते देखा होगा:
- नारियल का तेल — शीतकाल में सफेद और ठोस हो जाता है, गरमी में फिर साफ द्रव। पुस्तक इसी के विषय में पूछती है।
- घी और मक्खन — जाड़े में जमे हुए, मई में बहते हुए।
- ठंडी रसोई में वनस्पति घी।
- पिघला गुड़ या चीनी की चाशनी, जो जमकर चिक्की या लॉलीपॉप बन जाती है।
- पिघली चॉकलेट, जो फ्रिज में फिर जम जाती है।
- घंटा ढालने वाले द्वारा साँचे में डाली पिघली धातु, जो जमकर ठोस घंटा बन जाती है।
- और निस्संदेह जल स्वयं, जो जमकर बर्फ बनता है।
सामान्य नियम: ठोस के द्रव अवस्था में परिवर्तित होने के प्रक्रम को पिघलना कहते हैं; द्रव के ठोस अवस्था में परिवर्तित होने के प्रक्रम को हिमीकरण कहते हैं। प्रत्येक पदार्थ का अपना गलनांक होता है — नारियल का तेल लगभग 24 °C पर जम जाता है, इसलिए एक ठंडी रात ही पर्याप्त है, जबकि जल को 0 °C और लोहे को 1500 °C से भी अधिक चाहिए।