प्र1.
आवी के विचार थिरव से अलग हैं। आप क्या सोचते हैं? वे ऐसा क्यों सोचते हैं?
उत्तर
आवी सही है। बर्फ और जल भिन्न-भिन्न पदार्थ नहीं हैं — ये एक ही पदार्थ की दो अवस्थाएँ हैं।
थिरव का तर्क था कि बर्फ ठोस लगती है और हाथ में पकड़ी जा सकती है जबकि जल नहीं। यह अंतर सत्य है, परंतु यह अवस्था का अंतर है, पदार्थ का नहीं।
| थिरव ने क्या देखा | वास्तव में यह क्या दर्शाता है |
|---|---|
| बर्फ कठोर है और अपना आकार बनाए रखती है | ठोस अवस्था में कण निश्चित स्थानों पर बँधे रहते हैं |
| जल को हाथ में नहीं पकड़ा जा सकता | द्रव अवस्था में कण एक-दूसरे पर फिसल सकते हैं, इसलिए जल बह जाता है |
| क्या पदार्थ एक ही है? | हाँ — कुछ जोड़ा या हटाया नहीं गया, केवल ऊष्मा का अंतर है |
हम यह निश्चित रूप से क्यों कह सकते हैं: यह परिवर्तन दोनों दिशाओं में होता है। जल को फ्रीजर में रखिए, बर्फ बन जाती है; बर्फ को बाहर निकालिए, वही जल वापस मिल जाता है। यदि बर्फ कोई और पदार्थ होती तो पिघलने पर वही जल वापस न मिलता। शिकंजी में पड़ी बर्फ भी पिघलकर उसी में मिल जाती है।
स्वयं जाँचें: एक बंद बोतल में 100 g जल लेकर तौलिए। उसे जमाकर पुन: तौलिए। पाठ्यांक वही रहता है — वह बर्फ वही जल है।