कुतूहल अध्याय 9 आइए, और अधिक सीखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पृथक्करण विधि के रूप में हस्त चयन का क्या प्रयोजन है? (क) निस्यंदन (ख) छँटाई (ग) वाष्पन (घ) निस्तारण
उत्तर

उत्तर: (ख) छँटाई

क्यों: हस्त चयन का अर्थ है मिश्रण में से उँगलियों द्वारा टुकड़े चुनना, वह भी आकार, रंग और आकृति के आधार पर। छँटाई का अर्थ भी यही है — देखकर वस्तुओं को अलग-अलग करना। चावल से कंकड़ या राजमा से छोले निकालना हाथ से की गई छँटाई ही है।

अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:

  • (क) निस्यंदन छिद्रों वाले निस्यंदक से द्रव में से अघुलनशील ठोस अलग करता है — इसमें हाथ का काम नहीं।
  • (ग) वाष्पन द्रव को वाष्प बनाकर घुला ठोस प्राप्त करता है।
  • (घ) निस्तारण ठोस के बैठ जाने के बाद द्रव को उड़ेल देना है।
याद रखें: हस्त चयन तभी सुविधाजनक है जब अनुपयोगी अवयव कम मात्रा में हो और उसके टुकड़े उठाने योग्य बड़े हों।
प्र2.
निम्नलिखित में से किन पदार्थों का पृथक्करण मथना विधि से किया जाता है? (क) तेल का पानी से (ख) रेत का पानी से (ग) मक्खन का दही से (घ) ऑक्सीजन का वायु से
उत्तर

उत्तर: (ग) मक्खन का दही से

क्यों: मथने से द्रव इतनी तेज़ी से हिलता है कि वसा के सूक्ष्म कण जुड़कर बड़े लोंदे बना लेते हैं। वसा जलीय भाग से हल्की (कम घनत्व वाली) होने के कारण ऊपर तैर आती है और उतार ली जाती है — दूध या दही से मलाई और मक्खन इसी प्रकार अलग होते हैं।

अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:

  • (क) तेल का पानी से — दोनों स्वयं अलग परतें बना लेते हैं; यहाँ निस्तारण होता है, मथना नहीं।
  • (ख) रेत का पानी से — रेत अघुलनशील ठोस है; अवसादन-निस्तारण या निस्यंदन प्रयोग होता है।
  • (घ) ऑक्सीजन का वायु से — वायु गैसों का मिश्रण है; गैस को मथकर अलग नहीं किया जा सकता।
प्र3.
निस्यंदन के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कारक प्राय: अनिवार्य होता है? (क) उपकरण का आकार (ख) वायु की उपस्थिति (ग) छिद्रों का आकार (घ) मिश्रण का तापमान
उत्तर

उत्तर: (ग) छिद्रों का आकार

कण छिद्र से बड़ाअवशेष के रूप में रुक जाता है
कण छिद्र से छोटा → द्रव के साथ निकलकर निस्यंद में चला जाता है
क्यों: निस्यंदक बस छिद्रों से भरी एक रुकावट है। वह कुछ पृथक कर पाएगा या नहीं, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर है कि उसके छिद्रों का आकार कणों के आकार की तुलना में कैसा है। इसीलिए चाय की चालनी मटमैला जल स्वच्छ नहीं कर पाती पर फिल्टर-पत्र कर देता है — अध्याय यह चालनी, कपड़े और फिल्टर-पत्र के उदाहरण से दिखाता है।

अन्य विकल्प क्यों गलत हैं: उपकरण का आकार केवल यह तय करता है कि एक बार में कितना छाना जा सकता है; वायु की यहाँ कोई भूमिका नहीं; और गरम द्रव थोड़ा तेज़ बहता अवश्य है, पर तापमान यह तय नहीं करता कि कण रुकेंगे या नहीं।

प्र4.
कारण सहित बताएँ कि निम्नलिखित कथनों में सत्य और असत्य कौन-कौन से हैं? असत्य कथनों को सही करके लिखें। (क) नमक के विलयन को सूर्य के प्रकाश में अथवा धूप में रखकर नमक को इससे पृथक किया जा सकता है। (ख) जब एक अवयव कम मात्रा में हो तभी हस्त चयन का उपयोग होता है। (ग) मुरमुरे और चावल के दानों के मिश्रण को थ्रेशिंग द्वारा पृथक कर सकते हैं। (घ) सरसों के तेल और नींबू पानी के मिश्रण को निस्तारण द्वारा पृथक कर सकते हैं। (ङ) छानने की विधि का उपयोग चावल के आटे और पानी को पृथक करने में होता है।
उत्तर
कथनसत्य / असत्यकारण
(क) नमक के विलयन को धूप में रखकर नमक पृथक किया जा सकता है।सत्यसूर्य की ऊष्मा से जल वाष्पित हो जाता है और नमक शेष रह जाता है। नमक के खेतों में समुद्री जल से नमक इसी प्रकार बनता है।
(ख) जब एक अवयव कम मात्रा में हो तभी हस्त चयन का उपयोग होता है।सत्यमात्रा अधिक होने पर एक-एक टुकड़ा चुनने में बहुत समय लगेगा — भूसी के बारे में वल्ली को यही चिंता होती है।
(ग) मुरमुरे और चावल के दानों का मिश्रण थ्रेशिंग से पृथक हो सकता है।असत्यथ्रेशिंग केवल पूलों से दाने छुड़ाती है। मुरमुरे और चावल तो पहले से ही अलग-अलग दाने हैं।
(घ) सरसों के तेल और नींबू पानी का मिश्रण निस्तारण से पृथक हो सकता है।सत्यतेल जल में नहीं मिलता और हल्का होता है, इसलिए ऊपर स्पष्ट परत बना लेता है जिसे उड़ेला जा सकता है।
(ङ) छानने की विधि से चावल का आटा और पानी पृथक होते हैं।असत्यछानना केवल ठोस–ठोस मिश्रण पर काम करता है। यहाँ एक अवयव द्रव है।

असत्य कथनों का सही रूप:

  • (ग) मुरमुरे और चावल के दानों के मिश्रण को ओसाई (हल्के मुरमुरे उड़ जाते हैं) अथवा छानने से पृथक कर सकते हैं, क्योंकि दोनों में भार और आकार का अंतर है।
  • (ङ) चावल के आटे और पानी को पृथक करने में निस्यंदन की विधि का उपयोग होता है, क्योंकि चावल का आटा पानी में अघुलनशील है और निस्यंदक पर रुक जाता है।
सुझाव: विधि चुनने से पहले दो प्रश्न पूछिए — क्या दोनों अवयव ठोस हैं? और क्या इनमें से कोई घुल जाता है? इनके उत्तर अधिकांश गलत विधियाँ तुरंत हटा देते हैं।
प्र5.
स्तंभ I में दिए गए प्रत्येक मिश्रण का स्तंभ II में दी गई उपयुक्त पृथक्करण विधि से मिलान करें। स्तंभ I: (क) बेसन और काले चने का मिश्रण (ख) चॉक पाउडर और पानी का मिश्रण (ग) भुट्टे और आलू का मिश्रण (घ) लोहे के चूरे और बुरादे का मिश्रण (ङ) तेल और पानी का मिश्रण। स्तंभ II: (i) हस्त चयन (ii) चुंबकीय पृथक्करण (iii) निस्तारण (iv) छानना (v) निस्यंदन
उत्तर
स्तंभ Iस्तंभ IIकिस गुण का उपयोग
(क) बेसन और काले चने का मिश्रण(iv) छाननाबेसन के कण बहुत बारीक, चना बड़ा — कणों के आकार में अंतर
(ख) चॉक पाउडर और पानी का मिश्रण(v) निस्यंदनचॉक पानी में अघुलनशील है और निस्यंदक के छिद्रों से बड़ा है
(ग) भुट्टे और आलू का मिश्रण(i) हस्त चयनदोनों बड़े हैं और आकार, रंग, आकृति से आसानी से पहचाने जाते हैं
(घ) लोहे के चूरे और बुरादे का मिश्रण(ii) चुंबकीय पृथक्करणलोहा चुंबक से आकर्षित होता है, बुरादा नहीं — चुंबकीय गुण में भिन्नता
(ङ) तेल और पानी का मिश्रण(iii) निस्तारणदोनों मिलते नहीं; तेल हल्का है और अलग परत बनाकर तैरता है
(क) → (iv)  ·  (ख) → (v)  ·  (ग) → (i)  ·  (घ) → (ii)  ·  (ङ) → (iii)
चॉक पाउडर के लिए निस्तारण क्यों नहीं, निस्यंदन ही क्यों: छोड़ देने पर चॉक बैठ तो जाता है, इसलिए अधिकांश पानी निस्तारित किया जा सकता है। पर बहुत बारीक चॉक निलंबित रहकर पानी को धुँधला रखता है। निस्यंदन उसे पूरी तरह हटा देता है — निस्तारण कभी नहीं।
प्र6.
किस परिस्थिति में आप ठोस और द्रव के मिश्रण को पृथक करने में निस्यंदन के स्थान पर निस्तारण विधि का उपयोग करेंगे?
उत्तर

निस्तारण तब चुना जाता है जब ठोस स्वयं तली में बैठ जाता हो और पूर्ण पृथक्करण आवश्यक न हो।

  • जब ठोस भारी और अघुलनशील हो और तुरंत बैठ जाए — तालाब के जल की मिट्टी, बर्तन में चाय की पत्तियाँ, बाल्टी में रेत।
  • जब द्रव की मात्रा बहुत अधिक हो — पूरा ड्रम मटमैला जल फिल्टर-पत्र से छानने में घंटों लगेंगे; बैठाकर उड़ेलने में मिनट।
  • जब कोई निस्यंदक उपलब्ध न हो — दादा जी के पास चालनी नहीं है, इसलिए वे पत्तियाँ बैठने देते हैं और चाय धीरे से उड़ेलते हैं।
  • जब निस्यंदक जाम हो जाने का डर हो — बहुत गाढ़ी मिट्टी फिल्टर-पत्र को तुरंत बंद कर देगी, इसलिए पहले मिट्टी बैठाकर निस्तारण किया जाता है और उसके बाद ही निस्यंदन।
  • जब दोनों अवयव ऐसे द्रव हों जो आपस में न मिलते हों — तेल और जल, या दूध पर तैरती मलाई। निस्यंदक दो द्रवों को पृथक कर ही नहीं सकता।
  • जब केवल धोना हो — चावल या दाल धोते समय मैल और भूसी तैर या बैठ जाती है और पानी उड़ेल दिया जाता है।
एक स्पष्ट सीमा: निस्तारण तेज़ है और निःशुल्क, पर कभी पूर्ण नहीं होता। बारीक कण द्रव में रह ही जाते हैं। जब द्रव सचमुच स्वच्छ चाहिए — पीने का जल, प्रयोगशाला का रसायन — तब निस्यंदन करना ही होगा।
व्यवहार में: दोनों साथ-साथ उपयोग होते हैं — अवसादन → निस्तारण → निस्यंदन। प्रश्न 10 में लीला यही करती है, और जल-शोधन संयंत्र भी विशाल पैमाने पर यही करता है।
प्र7.
नासिका में बालों की उपस्थिति को आप किस पृथक्करण प्रक्रिया से जोड़कर देखते हैं?
उत्तर

हाँ — नासिका के बाल ठीक निस्यंदक की तरह काम करते हैं, इसलिए यह प्रक्रिया निस्यंदन है।

साँस से भीतर जाती वायु = स्वच्छ वायु + धूल, परागकण, धुएँ के कण, नन्हे कीट
नाक के बाल बारीक अंतराल वाले निस्यंदक का काम करते हैं
→ बड़े कण बालों पर फँस जाते हैं (अवशेष)
→ स्वच्छ वायु फेफड़ों तक पहुँचती है (निस्यंद)
शरीर को इसकी आवश्यकता क्यों है: फेफड़े अत्यंत कोमल होते हैं। वहाँ पहुँचने वाली धूल उन्हें क्षति पहुँचाती। नाक के बाल, चिपचिपी श्लेष्मा की सहायता से, अधिकांश धूल प्रवेश-द्वार पर ही रोक लेते हैं। नाक आती हुई वायु को गरम और नम भी कर देती है।
नाक के बाल उखाड़िए मत। वे आपके लिए काम कर रहे हैं। इसीलिए मुँह से नहीं, नाक से साँस लेने को कहा जाता है — मुँह में ऐसा कोई निस्यंदक नहीं है, इसलिए मुँह खोलकर दौड़ने पर धूल गले तक जल्दी पहुँच जाती है।
प्र8.
कोविड-19 (कोरोना वायरस महामारी) के समय, हम सभी ने मास्क पहने थे। सामान्यतया वे किस सामग्री से बने होते हैं? आपके मुँह और नथुनों (नाक) को ढँकने में मास्क की क्या भूमिका है?
उत्तर

वे किस सामग्री से बने होते हैं:

मास्क का प्रकारसामग्री
घर का बना कपड़े का मास्ककसकर बुने सूती या मलमल के कपड़े की दो-तीन परतें
सर्जिकल (तीन-परत) मास्कबिना बुने पॉलीप्रोपिलीन कपड़े की तीन परतें
N95 रेस्पिरेटरअत्यंत बारीक कृत्रिम रेशों की कई परतें

मास्क की भूमिका — यह दोनों दिशाओं में निस्यंदक का काम करता है:

  • बाहर जाते समय: संक्रमित व्यक्ति के खाँसने, छींकने, बोलने या साँस छोड़ने पर विषाणु युक्त सूक्ष्म बूँदें निकलती हैं। मास्क इन बूँदों को रोक लेता है ताकि वे दूसरों तक न पहुँचें।
  • भीतर आते समय: मास्क बाहर की वायु में मौजूद बूँदों, धूल और रोगाणुओं को पहनने वाले की नाक और मुँह तक पहुँचने से रोकता है।
  • यह हमें बिना धुले हाथों से नाक-मुँह छूने से भी रोकता है।
अधिक परतें बेहतर क्यों हैं: एक परत के रंध्र दूसरी परत के रंध्रों के ठीक ऊपर नहीं होते, इसलिए जो बूँद पहली परत से निकल जाए वह दूसरी या तीसरी में रुक जाती है — ठीक उसी कारण से जिससे कपड़े की कई परतें मटमैला जल एक परत से बेहतर छानती हैं (पृष्ठ 164 पर मल्ली यही सीखता है)।
क्या आप जानते हैं? मास्क हमारा बनाया हुआ नासिका-रोम है। दोनों निस्यंदक हैं: दोनों इस तथ्य का उपयोग करते हैं कि हानिकारक कण सामग्री के अंतरालों से बड़े होते हैं।
प्र9.
आपको आलू, नमक और लकड़ी के बुरादे का मिश्रण दिया गया है। इस मिश्रण के प्रत्येक अवयव को पृथक करने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार कीजिए।
उत्तर

तीनों अवयव तीन बातों में भिन्न हैं — आकार, तैरना और घुलना। हर चरण में एक गुण का उपयोग कीजिए।

चरणक्या करेंविधिक्या मिलेगा
1आलू हाथ से चुन लीजिए — वे बाकी सब से बहुत बड़े हैं।हस्त चयनआलू पृथक
2बचे नमक + बुरादे में पर्याप्त जल डालकर हिलाइए। नमक घुल जाता है; बुरादा ऊपर तैरने लगता है।जल में घोलनानमक का विलयन, ऊपर तैरता बुरादा
3तैरता बुरादा ऊपर से उतार लीजिए, अथवा मिश्रण को फिल्टर-पत्र से छान लीजिए।निस्तारण / निस्यंदनबुरादा पृथक (धूप में सुखा लीजिए)
4स्वच्छ नमक-विलयन को गरम कीजिए या धूप में रखिए जब तक सारा जल न उड़ जाए।वाष्पीकरणनमक सफेद ठोस के रूप में शेष
आलू + नमक + बुरादा
—[हस्त चयन]→ आलू + (नमक + बुरादा)
—[जल डालकर छानना]→ बुरादा + नमक का विलयन
—[वाष्पीकरण]→ नमक
यही क्रम क्यों: सबसे बड़े और सरल अवयव को हमेशा पहले हटाइए, और जल उसके बाद ही डालिए। यदि आरंभ में ही जल डाल देते तो आलू गीले हो जाते और बुरादा उन पर चिपक जाता। नमक अंत में इसलिए निकाला जाता है क्योंकि वाष्पीकरण के लिए स्वच्छ विलयन चाहिए।
याद रखें: दो से अधिक अवयवों वाले मिश्रण के लिए प्राय: कई विधियों का संयोजन आवश्यक होता है — अध्याय के अंत में पुस्तक यही संकेत देती है।
प्र10.
अग्रलिखित ‘बुद्धिमान लीला’ शीर्षक कहानी पढ़ें। इसमें यत्र-तत्र आए दो वैकल्पिक शब्दों में से सबसे उचित विकल्प पर सही (✓) का निशान लगाएँ। अपनी पसंद से अनुच्छेद का कोई अन्य उपयुक्त शीर्षक दें। — लीला अपने पिता के साथ खेत में काम कर रही थी। तब उसे ध्यान आया कि वे पीने का पानी घर पर ही भूल आए हैं। इससे पहले कि उसके पिता को प्यास/भूख लगे, वह पास के तालाब से पानी/अनाज लेने गई। डिब्बे में पानी लेने के बाद उसने ध्यान दिया कि पानी मटमैला है और पीने के लिए योग्य/अयोग्य है। पानी शुद्ध करने के लिए, उसने पानी को कुछ समय के लिए रख दिया और उसके बाद मटमैले पानी को कागज/मलमल के कपड़े से निस्यंदित किया/मथा। तब लीला ने पानी को दस मिनट तक ढके बर्तन में ठंडा किया/उबाला। ठंडे/उबले पानी को उसने दोबारा से निस्यंदित किया/मथा और उसने पानी पीने योग्य/अयोग्य बनाया।
उत्तर

पूरा किया गया अनुच्छेद (सही विकल्प मोटे अक्षरों में):

लीला अपने पिता के साथ खेत में काम कर रही थी। तब उसे ध्यान आया कि वे पीने का पानी घर पर ही भूल आए हैं। इससे पहले कि उसके पिता को प्यास लगे, वह पास के तालाब से पानी लेने गई। डिब्बे में पानी लेने के बाद उसने ध्यान दिया कि पानी मटमैला है और पीने के लिए अयोग्य है। पानी शुद्ध करने के लिए, उसने पानी को कुछ समय के लिए रख दिया और उसके बाद मटमैले पानी को मलमल के कपड़े से निस्यंदित किया। तब लीला ने पानी को दस मिनट तक ढके बर्तन में उबालाउबले पानी को उसने दोबारा से निस्यंदित किया और उसने पानी पीने योग्य बनाया।

विकल्पसही विकल्पकारण
प्यास / भूखप्याससमस्या भूला हुआ पीने का पानी थी
पानी / अनाजपानीतालाब से पानी मिलता है, अनाज नहीं
योग्य / अयोग्यअयोग्यमटमैला पानी पीने के लिए सुरक्षित नहीं
कागज / मलमल के कपड़ेमलमल के कपड़ेसाधारण कागज फट जाएगा; मलमल में बारीक रंध्र होते हैं
निस्यंदित किया / मथानिस्यंदित कियामथने से दही से मक्खन निकलता है; यहाँ मिट्टी छाननी है
ठंडा किया / उबालाउबालादस मिनट उबालने से रोगाणु मर जाते हैं
ठंडे / उबलेउबलेयह पिछले चरण के अनुसार है
निस्यंदित किया / मथानिस्यंदित कियाउबालने के बाद बैठी अशुद्धियाँ हटाने के लिए
योग्य / अयोग्ययोग्यअब पानी स्वच्छ और रोगाणु-मुक्त है

आप ये शीर्षक दे सकते हैं: “लीला ने पानी को सुरक्षित बनाया”, “मटमैले तालाब से स्वच्छ गिलास तक”, “बेटी की समझदारी”, अथवा “अवसादन, निस्यंदन और उबालना”।

लीला बुद्धिमान क्यों कही गई: उसने तीन बातें सही क्रम में कीं — पहले पानी को रखा रहने दिया ताकि मिट्टी बैठ जाए (अवसादन), फिर कपड़े से छाना (निस्यंदन), और अंत में उबाला, क्योंकि छानने से केवल वही हटता है जो फँसने लायक बड़ा हो और रोगाणु उससे कहीं छोटे होते हैं।
सुझाव: उबालते समय बर्तन ढका रखा गया था। इससे पानी बचता है — भाप ढक्कन पर संघनित होकर वापस गिर जाती है, बाहर नहीं जाती।
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