अच्छी पटकथा में क्या होना चाहिए: पाँच पड़ावों के पाँच दृश्य, जिनमें से प्रत्येक विधि का नाम ले, उसे होते हुए दिखाए और बताए कि वह किस गुण का उपयोग करती है; कथा को आगे बढ़ाने वाला एक सूत्रधार; और एक छोटा समापन जो बताए कि हम पदार्थ पृथक क्यों करते हैं।
नमूना उत्तर — आरंभ के संवाद, जिन्हें आप आगे बढ़ा सकते हैं:
सूत्रधार: गरमी की छुट्टियाँ, और एक परिवार निकल पड़ा भारत की यात्रा पर। पहला पड़ाव — हरियाणा।
वल्ली: नानी जी, सब लोग अनाज में से क्या चुन रहे हैं?
नानी जी: कंकड़ निकाल रहे हैं बेटा, ताकि अनाज पकाने योग्य हो जाए। यह हाथ से किया जाता है — इसे हस्त चयन कहते हैं।
मल्ली: पर भूसी तो कंकड़ों से कहीं ज़्यादा है! क्या वह भी हाथ से चुनेंगे?
मामा जी (हँसकर): नहीं। उसके लिए हम पवन को बुलाते हैं। (वे सूप उठाकर अनाज गिराते हैं।)
वल्ली: देखिए! दाने सीधे नीचे गिर रहे हैं और भूसी उड़ रही है!
मामा जी: क्योंकि भूसी हल्की है। यही ओसाई है।
सूत्रधार: एक गुण, एक विधि। अब चलिए अहमदाबाद …
प्रस्तुति के लिए सुझाव: असली वस्तुएँ प्रयोग कीजिए — सूप, चालनी, चाय की चालनी, चुंबक और बुरादे-कीलों का कटोरा। दर्शक वही मानते हैं जो आँखों से होते देखते हैं, और विज्ञान कहीं अधिक समय तक याद रहता है।