कुतूहल अध्याय 9 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आइए! नदी और महासागरों में प्रदूषण के मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने के लिए एक कविता की रचना करें। यहाँ कुछ पंक्तियाँ लिखी गई हैं, इनमें कुछ और पंक्तियाँ जोड़ें—
उत्तर

आपकी कविता में क्या होना चाहिए: प्रदूषण क्या है (प्लास्टिक की थैलियाँ, बोतलें, रैपर, नलियाँ), किसे हानि पहुँचती है (कोइलास जैसी मछलियाँ, पक्षी और हम स्वयं), वह आता कहाँ से है (हमारे ही घरों और गलियों से) और हम क्या कर सकते हैं (एक बार उपयोग वाला प्लास्टिक न लें, जल में कचरा न फेंकें, दिखे तो उठाएँ)।

नमूना उत्तर — पुस्तक की कविता में जोड़ी जा सकने वाली पंक्तियाँ:

बोतल का ढक्कन, टूटी नली,
दुकान से आई रैपर की पन्नी,
नाली ले गई, नदी ले गई,
और समुद्र की तली में जा बैठी।

कोइलास अब कह नहीं सकती,
जाल में मछली भी, कचरा भी,
थैली, बोतल, प्लास्टिक डोरी,
मछुआरे की नाव भर आई।

थैला कपड़े का साथ ले जाएँ,
प्लास्टिक दुकान पर ही ठुकराएँ,
जो एक टुकड़ा हम न फेंकें,
उतनी पीड़ा नदी बचाए।
इस अध्याय से संबंध: ओटुक्कम का मछली पकड़ने का जाल जल से मछली को पृथक करता है — यह एक प्रकार का प्राकृतिक निस्यंदन है। पर जाल के साथ थैलियाँ, बोतलें और रैपर भी ऊपर आ जाते हैं, क्योंकि प्लास्टिक न घुलता है और न सड़ता है। प्रकृति के पास ऐसी कोई पृथक्करण विधि नहीं जो नदी से प्लास्टिक निकाल सके। एक ही उपाय है — उसे नदी में डालें ही नहीं।
प्र2.
आपके घर में कटोरे में रखा हुआ दूध फट गया है। अपने माता-पिता के साथ चर्चा करें कि आप इसे किस प्रकार उपयोग कर सकते हैं? इस प्रक्रिया में आप पृथक्करण की किस विधि का प्रयोग करेंगे।
उत्तर

फटा दूध बेकार नहीं है। भारतीय रसोई में वह तुरंत काम में ले लिया जाता है।

किस काम मेंक्या किया जाता हैपृथक्करण विधि
पनीर या छेनादूध फट जाता है; ठोस छेना मलमल के कपड़े में डालकर पानी (व्हे) निकाल दिया जाता हैनिस्यंदन (कपड़े से)
मक्खन और छाछदही जमाकर मथनी से मथने पर मक्खन ऊपर तैर आता हैमथना
कढ़ी, ढोकला, इडली का घोल, खट्टे दूध का पराँठाखट्टेपन के लिए सीधे उपयोगपृथक्करण की आवश्यकता नहीं
व्हे — आटा गूँधने या पौधों में डालने के लिएपनीर बनाने के बाद बचा द्रव रख लिया जाता हैनिस्यंदन से पहले ही अलग
यहाँ मुख्य विधि निस्यंदन है। फटा दूध एक ठोस भाग (छेना) और एक द्रव भाग (व्हे) में बँट जाता है। मलमल के कपड़े से छानने पर ठोस रुक जाता है — छेना अवशेष है और व्हे निस्यंद। यदि इसके बजाय दही जमाकर मथें तो हल्का मक्खन अलग होकर तैर आता है, जो मथना है।
सुझाव: कपड़े को धीरे से निचोड़िए, आधे घंटे लटकाइए और छेने को किसी वज़न के नीचे दबाइए। ताज़ा पनीर तैयार — और आपने रसोई में ही निस्यंदन और निस्तारण दोनों कर लिए।
प्र3.
क्या आप रसोईघर के किसी एक उपकरण का नाम बता सकते हैं जो बिजली से चलता है और छाछ तैयार करने के लिए उपयोग में लाया जाता है?
उत्तर

मिक्सर-ग्राइंडर (मिक्सी), अथवा विशेष रूप से बनी बिजली की मथनी (इलेक्ट्रिक चर्नर)। हैंड ब्लेंडर भी यही काम करता है।

जार में दही → ब्लेड तेज़ी से उसे मथते हैं
→ वसा के कण जुड़ते जाते हैं और हल्के होने के कारण ऊपर तैर आते हैं (मक्खन)
→ नीचे बचा द्रव छाछ है
मथने से मक्खन क्यों अलग होता है: दही में वसा असंख्य सूक्ष्म कणों के रूप में पूरे द्रव में फैली रहती है। मथने से ये कण आपस में टकराकर इतने बड़े लोंदे बना लेते हैं कि दिखने लगें। वसा जलीय भाग से हल्की होती है, इसलिए ये लोंदे ऊपर तैर आते हैं और उतार लिए जाते हैं।
क्या आप जानते हैं? रस्सी लपेटकर चलाई जाने वाली परंपरागत मथनी (या रई) बिना बिजली के ठीक यही काम करती है — और ढाबे की पेंटिंग वाली बड़ी मथनी उसी का गाँव-संस्करण है।
प्र4.
बढ़ई ने पृथक्करण की किस विधि का उपयोग किया? ‘चुंबकों को जानें’ अध्याय का स्मरण करें।
उत्तर

उसने चुंबकीय पृथक्करण का उपयोग किया — बुरादे पर चुंबक घुमाया और सारी लोहे की कीलें उछलकर उससे चिपक गईं।

अवयवचुंबक के पास व्यवहारकहलाता है
लोहे की कीलेंप्रबल आकर्षण, चुंबक से चिपक जाती हैंचुंबकीय पदार्थ
लकड़ी का बुरादाबिल्कुल आकर्षित नहीं होता, पीछे रह जाता हैअचुंबकीय पदार्थ
यहाँ यह हस्त चयन से बेहतर क्यों है: बढ़ई कीलें हाथ से चुनने लगा था। पर बुरादे में दबी कीलें दिखती नहीं और चुभती हैं। चुंबक एक ही बार घुमाने में हर कील ढूँढ़ लेता है, उन्हें भी जो दिखाई नहीं दे रहीं — क्योंकि वह उस गुण (चुंबकीय गुणों में भिन्नता) का उपयोग करता है जिसे आँख नहीं पहचान सकती।
क्या आप जानते हैं? पुनर्चक्रणकर्ता क्रेन में लगे विशाल विद्युत चुंबकों से मिश्रित कचरे के ढेर से लोहे की कतरनें खींच लेते हैं। फिर इन्हें गलाकर पुन: उपयोग में लाया जाता है।
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