प्र1.
आइए! नदी और महासागरों में प्रदूषण के मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने के लिए एक कविता की रचना करें। यहाँ कुछ पंक्तियाँ लिखी गई हैं, इनमें कुछ और पंक्तियाँ जोड़ें—
उत्तर
आपकी कविता में क्या होना चाहिए: प्रदूषण क्या है (प्लास्टिक की थैलियाँ, बोतलें, रैपर, नलियाँ), किसे हानि पहुँचती है (कोइलास जैसी मछलियाँ, पक्षी और हम स्वयं), वह आता कहाँ से है (हमारे ही घरों और गलियों से) और हम क्या कर सकते हैं (एक बार उपयोग वाला प्लास्टिक न लें, जल में कचरा न फेंकें, दिखे तो उठाएँ)।
नमूना उत्तर — पुस्तक की कविता में जोड़ी जा सकने वाली पंक्तियाँ:
बोतल का ढक्कन, टूटी नली,
दुकान से आई रैपर की पन्नी,
नाली ले गई, नदी ले गई,
और समुद्र की तली में जा बैठी।
कोइलास अब कह नहीं सकती,
जाल में मछली भी, कचरा भी,
थैली, बोतल, प्लास्टिक डोरी,
मछुआरे की नाव भर आई।
थैला कपड़े का साथ ले जाएँ,
प्लास्टिक दुकान पर ही ठुकराएँ,
जो एक टुकड़ा हम न फेंकें,
उतनी पीड़ा नदी बचाए।
बोतल का ढक्कन, टूटी नली,
दुकान से आई रैपर की पन्नी,
नाली ले गई, नदी ले गई,
और समुद्र की तली में जा बैठी।
कोइलास अब कह नहीं सकती,
जाल में मछली भी, कचरा भी,
थैली, बोतल, प्लास्टिक डोरी,
मछुआरे की नाव भर आई।
थैला कपड़े का साथ ले जाएँ,
प्लास्टिक दुकान पर ही ठुकराएँ,
जो एक टुकड़ा हम न फेंकें,
उतनी पीड़ा नदी बचाए।
इस अध्याय से संबंध: ओटुक्कम का मछली पकड़ने का जाल जल से मछली को पृथक करता है — यह एक प्रकार का प्राकृतिक निस्यंदन है। पर जाल के साथ थैलियाँ, बोतलें और रैपर भी ऊपर आ जाते हैं, क्योंकि प्लास्टिक न घुलता है और न सड़ता है। प्रकृति के पास ऐसी कोई पृथक्करण विधि नहीं जो नदी से प्लास्टिक निकाल सके। एक ही उपाय है — उसे नदी में डालें ही नहीं।