कक्षा ७ गणित अध्याय 1 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
दाईं ओर दिए गए चित्र को देखिए। सोमू 1 मीटर लंबा है। यदि प्रत्येक तल उसकी ऊँचाई का चार गुना हो तो भवन की अनुमानित ऊँचाई क्या है?
नमस्ते,मैं सोमू हूँ!
पृष्ठ 3 — पाठ के साथ दिया भवन; सोमू एक बालकनी से हाथ हिला रहा है।
उत्तर

चित्र में भवन के 10 तल हैं, अत: उसकी ऊँचाई लगभग 40 मीटर है।

सोमू की ऊँचाई = 1 मी.
एक तल की ऊँचाई = 4 × 1 मी. = 4 मी.
चित्र में तलों की संख्या = 10
भवन की ऊँचाई = 10 × 4 मी. = 40 मी.
ऐसा क्यों होता है: सोमू सबसे ऊपरी तल की बालकनी में खड़ा है। चित्र में नीचे तक गिनने पर 10 बालकनियाँ मिलती हैं और प्रत्येक तल उसकी अपनी ऊँचाई का चार गुना है। 4 मीटर को 10 तलों से गुणा करने पर 40 मीटर प्राप्त होता है।
संकेत: इस 40 मीटर ऊँचे भवन को याद रखिए — पूरे अध्याय में एकता की प्रतिमा, कुंचीकल जलप्रपात, माउंट एवरेस्ट और हवाई जहाज की तुलना इसी “मापदंड” से की गई है।
प्र2.
कौन ऊँचा है ______ एकता की प्रतिमा या यह भवन? कितना ऊँचा है? ______ मी.
उत्तर

एकता की प्रतिमा ऊँची है, 140 मी. अधिक।

एकता की प्रतिमा की ऊँचाई = 180 मी.
सोमू के भवन की ऊँचाई = 40 मी.
अंतर = 180 − 40 = 140 मी.
ऐसा क्यों होता है: 180 ÷ 40 = 4.5, अत: प्रतिमा भवन की लगभग साढ़े चार गुनी है। पुस्तक इसे “सोमू के भवन की ऊँचाई की लगभग 4 गुनी” कहती है।
क्या आप जानते हैं? गुजरात के केवड़िया में स्थित एकता की प्रतिमा विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा है — सरदार पटेल के सिर तक पहुँचने के लिए लगभग साढ़े चार दस-मंज़िला भवन एक के ऊपर एक रखने होंगे।
प्र3.
कुंचीकल जलप्रपात सोमू के भवन की तुलना में कितना ऊँचा है? ______ मी.
उत्तर

जलप्रपात भवन से 410 मी. ऊँचा है।

कुंचीकल जलप्रपात की ऊँचाई = 450 मी.
सोमू के भवन की ऊँचाई = 40 मी.
अंतर = 450 − 40 = 410 मी.
ऐसा क्यों होता है: 450 ÷ 40 = 11.25, अत: जलप्रपात पूरे भवन से ग्यारह गुने से भी अधिक ऊँचा है। इसीलिए 450 मीटर की ऊँचाई की कल्पना तब तक कठिन है जब तक उसकी तुलना किसी परिचित वस्तु से न की जाए।
क्या आप जानते हैं? कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले में वराही नदी पर स्थित कुंचीकल जलप्रपात भारत के सबसे ऊँचे जलप्रपातों में से एक है।
प्र4.
सोमू के भवन में कितने तल होने चाहिए ताकि उसकी ऊँचाई जलप्रपात की ऊँचाई के समान हो जाए?
उत्तर

लगभग 113 तल।

जलप्रपात की ऊँचाई = 450 मी.
एक तल की ऊँचाई = 4 मी.
तलों की संख्या = 450 ÷ 4
= 112.5
= 113 तल (आधा तल नहीं बन सकता, अत: ऊपर की ओर सन्निकटन)
ऐसा क्यों होता है: 112 तलों की ऊँचाई केवल 448 मी. होगी, जो जलप्रपात से 2 मी. कम है। एक और तल जोड़ने पर भवन 452 मी. का हो जाता है, जो जलप्रपात के शिखर से थोड़ा ऊपर है — अत: 113 सबसे छोटी पूर्ण संख्या है।
प्रयास करें: भारत का सबसे ऊँचा भवन लगभग 280 मी. का है। यह सोमू के कितने तलों के बराबर है? 280 ÷ 4 = 70 तल।
क्या यह उपयोगी रहा?