मल्हार अध्याय 1 आज की पहेली

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
नीचे कुछ पहेलियाँ दी गई हैं। इनके उत्तर आपको कविता में से मिल जाएँगे। पहेलियाँ बूझिए— पहेली 1: नानी की बेटी है कौन? / मामा की बहना है कौन? / भार्या है पिता की कौन? / भाभी है चाचा की कौन?
उत्तर

उत्तर है — माँ

पहेली की पंक्तिरिश्ता खोलकर देखिए
नानी की बेटी है कौन?नानी माँ की माँ होती है — इसलिए नानी की बेटी हुई माँ
मामा की बहना है कौन?मामा माँ का भाई होता है — इसलिए उसकी बहन हुई माँ
भार्या है पिता की कौन?‘भार्या’ का अर्थ है पत्नी — पिता की पत्नी हुई माँ
भाभी है चाचा की कौन?चाचा पिता का छोटा भाई होता है — उसकी भाभी हुई माँ
कविता से जोड़: कविता के आरंभ में बालक ठीक इसी तरह का रिश्तों वाला मज़ाक करता है — “कहती है मुझसे यह चेटी, तू मेरी नानी की बेटी!” और माँ हँसकर कहती है — “समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी?”
ऐसी पहेली स्वयं बनाइए: किसी एक व्यक्ति को चुनिए और उसके चार अलग-अलग रिश्ते लिखिए — जैसे “दादी का बेटा कौन? बुआ का भाई कौन?” उत्तर होगा — पिता
प्र2.
पहेली 2: आसमान में उड़-उड़ जाए, / तरह-तरह के गाने गाए, / पर फैलाकर करता सैर, / दो हैं जिसके पर और पैर।
उत्तर

उत्तर है — खग यानी पक्षी (कविता में यह हंस है)।

पहेली का संकेतपक्षी पर कैसे लागू होता हैकविता की पंक्ति
आसमान में उड़-उड़ जाएपक्षी आकाश में उड़ता है“सहसा एक हंस ऊपर से”
तरह-तरह के गाने गाएचहचहाना, कूकना, कलरव करना“गाते थे खग कल कल स्वर से”
पर फैलाकर करता सैरपंख फैलाकर घूमना“हुई पक्ष की हानी!” (पक्ष = पंख)
दो हैं जिसके पर और पैरपक्षी के दो पंख और दो पैर होते हैं
शब्द-ज्ञान: ‘पर’ के दो अर्थ यहाँ काम कर रहे हैं — पंख और लेकिन/ऊपर। पहेलियों में अक्सर ऐसे ही दो अर्थ वाले शब्द (श्लेष) से मज़ा बनता है। कविता में पंख के लिए ‘पक्ष’ शब्द आया है — इसी से ‘पक्षी’ बना है।
प्र3.
पहेली 3: बागों में जो सुगंध फैलाती, / फूल-फूल में बसती गाती, / हवा-हवा में घुल-मिल जाए, / कौन है जो यह नाम बताए?
उत्तर

उत्तर है — सुरभि यानी सुगंध (महक)।

पहेली का संकेतसुगंध पर कैसे लागू होता है
बागों में जो सुगंध फैलातीउपवन-बगीचे सुगंध से भर जाते हैं
फूल-फूल में बसती गातीसुगंध का घर फूल ही है
हवा-हवा में घुल-मिल जाएवह दिखती नहीं, हवा के साथ बहती है और दूर तक पहुँचती है
कविता से प्रमाण: माँ उपवन का वर्णन करते हुए कहती है — “जहाँ, सुरभि मनमानी।” यानी वहाँ सुगंध अपनी मनमानी कर रही थी, जहाँ चाहे वहाँ फैल रही थी। यहाँ सुगंध को मनुष्य की तरह ‘मनमानी करते’ दिखाया गया है — यह मानवीकरण है।
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