मल्हार अध्याय 1 सुनी कहानी

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
हमारे देश और विश्व में अनेक कहानियाँ लोग एक-दूसरे को सैकड़ों-हजारों सालों से सुनते-सुनाते रहे हैं। इन कहानियों को लोककथाएँ कहते हैं। अपने घर या आस-पास सुनी-सुनाई जाने वाली किसी लोककथा को लिखकर कक्षा में सुनाइए। आपने जिस भाषा में लोककथा सुनी है या जिस भाषा में आप लोककथा लिखना चाहें, लिख सकते हैं। कक्षा के सभी समूहों द्वारा एकत्रित लोककथाओं को जोड़कर एक पुस्तिका बनाइए और कक्षा के पुस्तकालय में उसे सम्मिलित कीजिए।
उत्तर

यह परियोजना कार्य है। इसे तीन चरणों में कीजिए — सुनना → लिखना → पुस्तिका बनाना

चरणक्या करना है
1. खोजदादी-नानी, माता-पिता, पड़ोस के बुज़ुर्ग या गाँव के किसी वरिष्ठ व्यक्ति से एक लोककथा सुनिए। सुनते समय टोकिए नहीं; बाद में कठिन नाम और स्थान पूछकर लिख लीजिए।
2. लेखनकथा को अपनी भाषा में लिखिए — हिंदी में या अपनी बोली/मातृभाषा में (भोजपुरी, अवधी, मराठी, तमिल… जो भी हो)। ऊपर लिखिए — कथा का नाम, किससे सुनी, और वह किस क्षेत्र की है।
3. साझाकक्षा में सुनाइए। सुनाते समय आवाज़ बदलिए, रुकिए और बीच में एक प्रश्न पूछिए — जैसे कविता में माँ ने पूछा था।
4. पुस्तिकासब कथाओं को एक क्रम में लगाइए, अनुक्रमणिका बनाइए, चित्र जोड़िए, आवरण पर पुस्तिका का नाम लिखिए (जैसे — हमारी कहानियाँ) और उसे कक्षा-पुस्तकालय में रखिए।

लोककथा की पहचान: इसका कोई एक लेखक नहीं होता; यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी मुँह-ज़ुबानी चलती है; इसमें अक्सर बोलने वाले जानवर, राजा-रानी, चतुर किसान या कोई सीख होती है; और हर सुनाने वाला उसमें अपना थोड़ा रंग भर देता है।

नमूना उत्तर (संक्षेप में): “सोने का घड़ा” — मेरी नानी ने यह कथा सुनाई थी। एक गरीब किसान को खेत जोतते समय सोने से भरा घड़ा मिला। उसने वह घड़ा उस व्यक्ति के पास पहुँचा दिया जिससे उसने खेत ख़रीदा था, यह कहकर कि “मैंने खेत ख़रीदा था, घड़ा नहीं।” उस व्यक्ति ने कहा — “मैंने खेत बेचा था, उसमें जो कुछ था वह भी बेच दिया।” दोनों राजा के पास पहुँचे। राजा ने पूछा — क्या इन दोनों के बच्चों का विवाह हो सकता है? दोनों मान गए और राजा ने घड़ा उन नवदंपती को दे दिया। नानी अंत में हमेशा पूछती थीं — “बताओ, इसमें सबसे बड़ा धनी कौन था?”
पाठ से जोड़: ‘माँ, कह एक कहानी’ भी वैसे ही सुनाई-सुनी परंपरा का हिस्सा है — माँ अपने बेटे को उसके पिता की कथा सुना रही है। लोककथाएँ इसी तरह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचती हैं।
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