कक्षा ७ हिंदी अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

माँ, कह एक कहानी मैथिलीशरण गुप्त की कविता है, जो उनकी काव्य-कृति यशोधरा से ली गई है। इसमें बालक राहुल अपनी माँ यशोधरा से कहानी सुनाने की हठ करता है और माँ उसे उसके पिता सिद्धार्थ (बाद में गौतम बुद्ध) की एक घटना सुनाती है। कहानी यह है — एक सबेरे सिद्धार्थ उपवन में घूम रहे थे। वहाँ फूल खिले थे, ओस की बूँदें झिलमिला रही थीं और पक्षी गा रहे थे। तभी एक हंस तीर से बिंधकर गिर पड़ा। सिद्धार्थ ने उसे उठाकर उसकी सेवा की और उसे मानो नया जीवन दे दिया। तभी आखेटक (शिकारी) आ पहुँचा और घायल पक्षी को अपना ‘लक्ष्य’ बताकर माँगने लगा। सिद्धार्थ ने देने से मना कर दिया। दोनों में विवाद हुआ — एक सदय (दयालु) था, दूसरा निर्दय । बात न्यायालय तक जा पहुँची। कविता का सबसे सुंदर मोड़ यह है कि माँ कहानी का अंत स्वयं नहीं करती। वह कहती है — “राहुल, तू निर्णय कर इसका” । बालक उत्तर देता है — “रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दअर्थकविता की पंक्तिअपने वाक्य में प्रयोग
चेटीदासी, सेविका“कहती है मुझसे यह चेटी”राजकुमारी की चेटी उसके लिए फूल लेकर आई।
मानधनजिसका धन ‘मान’ है; प्यार से पुकारने का शब्द — मेरे मान-सम्मान वाले पुत्र“तू है हठी मानधन मेरे”माँ ने बेटे को गोद में लेकर कहा — “मेरे मानधन, अब सो जा।”
तातपिता (आदर के साथ); पूज्य“तात भ्रमण करते थे तेरे”तात के बताए मार्ग पर चलना ही सबसे बड़ा सम्मान है।
सुरभिसुगंध, महक“जहाँ, सुरभि मनमानी।”रातरानी की सुरभि पूरे आँगन में भर गई।
हिम-बिंदुओस की बूँदें“झलमल कर हिम-बिंदु झिले थे”सुबह घास पर हिम-बिंदु मोती-से चमक रहे थे।
खगपक्षी“गाते थे खग कल कल स्वर से”भोर होते ही खग अपने घोंसलों से निकल पड़े।
बिद्धबिंधा हुआ, तीर से घायल“गिरा, बिद्ध होकर खर-शर से”बाण से बिद्ध हिरण झाड़ियों में गिर पड़ा।
खर-शरतेज़ धार वाला तीर (खर = तीखा, शर = बाण)“गिरा, बिद्ध होकर खर-शर से”खर-शर लगते ही पक्षी नीचे आ गिरा।
आखेटकशिकारी, आखेट (शिकार) करने वाला“इतने में आखेटक आया”आखेटक जाल लेकर जंगल की ओर बढ़ा।
आहतघायल, चोट खाया हुआ“माँगा उसने आहत पक्षी”आहत खिलाड़ी को तुरंत अस्पताल भेजा गया।
रक्षीरक्षा करने वाला, रक्षक“तेरे तात किंतु थे रक्षी”अच्छा राजा अपनी प्रजा का रक्षी होता है।
खगभक्षीपक्षियों को मारकर खाने वाला“तब उसने, जो था खगभक्षी–”खगभक्षी बाज आकाश में मंडरा रहा था।
सदय / निर्दयदया करने वाला / दया न करने वाला — दोनों विपरीतार्थक शब्द हैं“हुआ विवाद सदय-निर्दय में”सदय व्यक्ति दूसरों का दुख देखकर रुक जाता है, निर्दय नहीं।
उभयदोनों“उभय आग्रही थे स्वविषय में”उभय पक्षों ने अपनी-अपनी बात न्यायालय में रखी।
निरपराधजिसका कोई अपराध न हो, बेकसूर“कोई निरपराध को मारे”निरपराध को दंड देना सबसे बड़ा अन्याय है।
गुनीगुन लेना = समझ लेना, विचार कर लेना“तूने गुनी कहानी।”उसने बात को गुनकर ही उत्तर दिया।
  1. मेरी समझ से
  2. मिलकर करें मिलान
  3. पंक्तियों पर चर्चा
  4. सोच-विचार के लिए
  5. अनुमान और कल्पना से
  6. संवाद
  7. शब्द से जुड़े शब्द
  8. पंक्ति से पंक्ति
  9. कविता की रचना
  10. रूप बदलकर
  11. कविता में विराम चिह्न
  12. आपकी बात
  13. निर्णय करें
  14. सुनी कहानी
  15. आज की पहेली
  16. खोजबीन के लिए
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