मल्हार अध्याय 1 माँ, कह एक कहानी के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
माँ, कह एक कहानी मैथिलीशरण गुप्त की कविता है, जो उनकी काव्य-कृति यशोधरा से ली गई है। इसमें बालक राहुल अपनी माँ यशोधरा से कहानी सुनाने की हठ करता है और माँ उसे उसके पिता सिद्धार्थ (बाद में गौतम बुद्ध) की एक घटना सुनाती है। कहानी यह है — एक सबेरे सिद्धार्थ उपवन में घूम रहे थे। वहाँ फूल खिले थे, ओस की बूँदें झिलमिला रही थीं और पक्षी गा रहे थे। तभी एक हंस तीर से बिंधकर गिर पड़ा। सिद्धार्थ ने उसे उठाकर उसकी सेवा की और उसे मानो नया जीवन दे दिया। तभी आखेटक (शिकारी) आ पहुँचा और घायल पक्षी को अपना ‘लक्ष्य’ बताकर माँगने लगा। सिद्धार्थ ने देने से मना कर दिया। दोनों में विवाद हुआ — एक सदय (दयालु) था, दूसरा निर्दय । बात न्यायालय तक जा पहुँची। कविता का सबसे सुंदर मोड़ यह है कि माँ कहानी का अंत स्वयं नहीं करती। वह कहती है — “राहुल, तू निर्णय कर इसका” । बालक उत्तर देता है — “रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय
अभ्यास
- मेरी समझ से
- मिलकर करें मिलान
- पंक्तियों पर चर्चा
- सोच-विचार के लिए
- अनुमान और कल्पना से
- संवाद
- शब्द से जुड़े शब्द
- पंक्ति से पंक्ति
- कविता की रचना
- रूप बदलकर
- कविता में विराम चिह्न
- आपकी बात
- निर्णय करें
- सुनी कहानी
- आज की पहेली
- खोजबीन के लिए