मल्हार अध्याय 1 रूप बदलकर

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“सुन, उपवन में बड़े सबेरे, / तात भ्रमण करते थे तेरे,” — कविता की इन पंक्तियों को निम्न प्रकार से बदलकर लिखा जा सकता है— “सुनो! आपके पिता एक उपवन में बहुत सवेरे भ्रमण किया करते थे... ” अब आप भी पाठ के किसी एक पद को एक अनुच्छेद के रूप में लिखिए।
उत्तर

इस काम को गद्य-रूपांतरण कहते हैं — कविता की बात को साधारण बोलचाल के वाक्यों में लिख देना।

तरीका:

  • पद को दो-तीन बार पढ़कर उसका दृश्य मन में बना लीजिए;
  • कठिन शब्दों के अर्थ पहले लिख लीजिए (बिद्ध = घायल, खर-शर = तेज़ तीर, आहत = घायल);
  • तुक और लय की चिंता छोड़ दीजिए — अब पूरे वाक्य बनाइए;
  • क्रम वही रखिए जो कविता में है, ताकि कहानी न बदले।
नमूना उत्तर 1 — पद: “गाते थे खग कल कल स्वर से…”
सुबह का समय था और उपवन में पक्षी मीठी आवाज़ में चहचहा रहे थे। तभी अचानक ऊपर आकाश से एक हंस नीचे आ गिरा। किसी ने उस पर तेज़ धार वाला तीर चला दिया था और वह उसी से बिंध गया था। बेचारे पक्षी का पंख बुरी तरह घायल हो गया था।
नमूना उत्तर 2 — पद: “हुआ विवाद सदय-निर्दय में…”
इसके बाद दयालु राजकुमार और उस निर्दयी शिकारी के बीच झगड़ा हो गया। दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे — शिकारी कहता था कि पक्षी उसका है क्योंकि उसने उसे मारा है, और राजकुमार कहते थे कि पक्षी उनका है क्योंकि उन्होंने उसे बचाया है। आख़िर यह मामला न्यायालय तक जा पहुँचा और वहाँ सबने इसे सुना और जाना।
क्या ध्यान रखें: गद्य में बदलते समय कविता का भाव नहीं बदलना चाहिए। आप अपने वाक्य बना सकते हैं, पर घटना, क्रम और पात्रों की भावना वही रहनी चाहिए।
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