मल्हार अध्याय 1 कविता में विराम चिह्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) नीचे कविता का एक अंश बिना विराम चिह्नों के दिया गया है। इसमें उपयुक्त स्थानों पर विराम चिह्न लगाइए— राहुल तू निर्णय कर इसका– / न्याय पक्ष लेता है किसका / कह दे निर्भय जय हो जिसका / सुन लूँ तेरी बानी / माँ मेरी क्या बानी / मैं सुन रहा कहानी / कोई निरपराध को मारे / तो क्यों अन्य उसे न उबारे / रक्षक पर भक्षक को वारे / न्याय दया का दानी / न्याय दया का दानी / तूने गुनी कहानी
उत्तर

विराम चिह्न लगाने पर अंश इस प्रकार होगा —

राहुल, तू निर्णय कर इसका–
न्याय पक्ष लेता है किसका?
कह दे निर्भय, जय हो जिसका
सुन लूँ तेरी बानी

माँ, मेरी क्या बानी?
मैं सुन रहा कहानी
कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य उसे न उबारे?
रक्षक पर भक्षक को वारे,
न्याय दया का दानी!

“न्याय दया का दानी?
तूने गुनी कहानी
चिह्ननामयहाँ क्यों लगाया
“ ”उद्धरण चिह्नयह बताने के लिए कि कौन-सा भाग माँ ने कहा और कौन-सा राहुल ने। पहला और तीसरा भाग माँ का, बीच का भाग बेटे का है।
,अल्प विरामपुकारने के बाद (राहुल, / माँ,) और पंक्ति के भीतर थोड़ा ठहरने के लिए (निर्भय, / मारे, / वारे,)।
पूर्ण विरामजहाँ बात पूरी हो जाती है — “जय हो जिसका।”, “सुन लूँ तेरी बानी।”, “मैं सुन रहा कहानी।”, “तूने गुनी कहानी।”
?प्रश्नवाचक चिह्नजहाँ प्रश्न पूछा गया है — “किसका?”, “क्या बानी?”, “न उबारे?”, “न्याय दया का दानी?”
!विस्मयादिबोधक चिह्न“न्याय दया का दानी!” — बालक यह बात आवेश और विश्वास के साथ कहता है, इसलिए यहाँ प्रश्न नहीं, विस्मय है।
निर्देशक/योजक रेखा“तू निर्णय कर इसका–” — बात आगे बढ़ रही है, वाक्य यहीं समाप्त नहीं होता।
सबसे रोचक बात: एक ही वाक्य “न्याय दया का दानी” दो बार आया है, पर उसके चिह्न अलग हैं। बेटा उसे ! के साथ कहता है — यह उसका निर्णय है। माँ उसे ? के साथ दोहराती है — मानो पूछ रही हो, “सचमुच ऐसा ही है?” चिह्न बदलते ही वाक्य का भाव बदल जाता है।
प्र2.
(ख) अब विराम चिह्नों का ध्यान रखते हुए कविता को अपने समूह में सुनाइए।
उत्तर

यह सस्वर वाचन (कविता-पाठ) की गतिविधि है। नीचे दिए ढंग से अभ्यास कीजिए —

चिह्नपढ़ते समय क्या करें
, (अल्प विराम)ज़रा-सा रुकिए — एक साँस जितना।
। (पूर्ण विराम)पूरा ठहरिए और आवाज़ नीचे लाइए।
? (प्रश्नवाचक)अंतिम शब्द पर आवाज़ ऊपर उठाइए — “रानी?”
! (विस्मयादिबोधक)ज़ोर देकर, भाव भरकर बोलिए — “न्याय दया का दानी!”
“ ” (उद्धरण)यहीं वक्ता बदलता है — माँ की पंक्तियाँ एक साथी पढ़े, बेटे की दूसरा।

अच्छे वाचन के सुझाव:

  • समूह में दो भूमिकाएँ बाँट लीजिए — एक माँ, एक राहुल। इससे संवाद-शैली स्वयं उभर आएगी।
  • बेटे की पंक्तियों में जिज्ञासा और हठ का स्वर रखिए; माँ की पंक्तियों में स्नेह और ठहराव
  • “राजा था या रानी? राजा था या रानी?” — दूसरी बार थोड़ा और ज़ोर देकर बोलिए, क्योंकि यह हठ है।
  • हंस के गिरने वाले पद में आवाज़ धीमी और गंभीर कीजिए — “हुई पक्ष की हानी!”
ध्यान रखें: कविता तेज़ नहीं, लय में पढ़ी जाती है। हर पंक्ति के अंत में तुक (कहानी, नानी, रानी, बानी) को थोड़ा ठहरकर सुनाइए — तभी श्रोताओं को कविता का संगीत सुनाई देगा।
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