प्र1.
(क) नीचे कविता का एक अंश बिना विराम चिह्नों के दिया गया है। इसमें उपयुक्त स्थानों पर विराम चिह्न लगाइए— राहुल तू निर्णय कर इसका– / न्याय पक्ष लेता है किसका / कह दे निर्भय जय हो जिसका / सुन लूँ तेरी बानी / माँ मेरी क्या बानी / मैं सुन रहा कहानी / कोई निरपराध को मारे / तो क्यों अन्य उसे न उबारे / रक्षक पर भक्षक को वारे / न्याय दया का दानी / न्याय दया का दानी / तूने गुनी कहानी
उत्तर
विराम चिह्न लगाने पर अंश इस प्रकार होगा —
“राहुल, तू निर्णय कर इसका–
न्याय पक्ष लेता है किसका?
कह दे निर्भय, जय हो जिसका।
सुन लूँ तेरी बानी।”
“माँ, मेरी क्या बानी?
मैं सुन रहा कहानी।
कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य उसे न उबारे?
रक्षक पर भक्षक को वारे,
न्याय दया का दानी!”
“न्याय दया का दानी?
तूने गुनी कहानी।”
न्याय पक्ष लेता है किसका?
कह दे निर्भय, जय हो जिसका।
सुन लूँ तेरी बानी।”
“माँ, मेरी क्या बानी?
मैं सुन रहा कहानी।
कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य उसे न उबारे?
रक्षक पर भक्षक को वारे,
न्याय दया का दानी!”
“न्याय दया का दानी?
तूने गुनी कहानी।”
| चिह्न | नाम | यहाँ क्यों लगाया |
|---|---|---|
| “ ” | उद्धरण चिह्न | यह बताने के लिए कि कौन-सा भाग माँ ने कहा और कौन-सा राहुल ने। पहला और तीसरा भाग माँ का, बीच का भाग बेटे का है। |
| , | अल्प विराम | पुकारने के बाद (राहुल, / माँ,) और पंक्ति के भीतर थोड़ा ठहरने के लिए (निर्भय, / मारे, / वारे,)। |
| । | पूर्ण विराम | जहाँ बात पूरी हो जाती है — “जय हो जिसका।”, “सुन लूँ तेरी बानी।”, “मैं सुन रहा कहानी।”, “तूने गुनी कहानी।” |
| ? | प्रश्नवाचक चिह्न | जहाँ प्रश्न पूछा गया है — “किसका?”, “क्या बानी?”, “न उबारे?”, “न्याय दया का दानी?” |
| ! | विस्मयादिबोधक चिह्न | “न्याय दया का दानी!” — बालक यह बात आवेश और विश्वास के साथ कहता है, इसलिए यहाँ प्रश्न नहीं, विस्मय है। |
| – | निर्देशक/योजक रेखा | “तू निर्णय कर इसका–” — बात आगे बढ़ रही है, वाक्य यहीं समाप्त नहीं होता। |
सबसे रोचक बात: एक ही वाक्य “न्याय दया का दानी” दो बार आया है, पर उसके चिह्न अलग हैं। बेटा उसे ! के साथ कहता है — यह उसका निर्णय है। माँ उसे ? के साथ दोहराती है — मानो पूछ रही हो, “सचमुच ऐसा ही है?” चिह्न बदलते ही वाक्य का भाव बदल जाता है।