मल्हार अध्याय 1 अनुमान और कल्पना से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए— (क) माँ ने अपने बेटे को कहानी सुनाते समय अंत में कहानी को स्वयं पूरा नहीं किया, बल्कि उसी से निर्णय करने के लिए कहा। यदि आप किसी को यह कहानी सुना रहे होते तो कहानी को आगे कैसे बढ़ाते?
उत्तर

कहानी को आगे बढ़ाने के लिए सबसे अच्छा तरीका यही है कि न्यायालय का दृश्य दिखाया जाए — दोनों पक्ष अपनी बात रखें और फिर निर्णय सुनाया जाए।

अच्छे उत्तर में क्या होना चाहिए:

  • दोनों पक्षों के तर्क — आखेटक का और रक्षक का;
  • न्यायाधीश का प्रश्न या कसौटी, जिससे निर्णय निकले;
  • निर्णय और उसका कारण;
  • अंत में हंस का क्या हुआ।
नमूना उत्तर: न्यायालय में भीड़ जुट गई। आखेटक ने कहा — “यह पक्षी मेरा है, मेरा तीर इसे लगा है, यह मेरा शिकार है।” राजकुमार सिद्धार्थ बोले — “यह पक्षी मेरा है, क्योंकि इसे जीवन मैंने दिया है।” न्यायाधीश ने सोचकर कहा — “जो वस्तु दो लोग माँग रहे हों, उसका फ़ैसला उससे पूछकर करना चाहिए जिसकी वह वस्तु है।” उन्होंने हंस को बीच में रख दिया। आखेटक ने अपना धनुष उठाया तो हंस काँपकर पीछे सरक गया, और जब सिद्धार्थ ने हाथ बढ़ाया तो वह लड़खड़ाता हुआ उनकी गोद में जा बैठा। न्यायाधीश ने कहा — “निर्णय हो गया। जीवन लेने वाले से बड़ा अधिकार जीवन देने वाले का है।” कुछ दिनों बाद जब हंस के पंख ठीक हो गए, सिद्धार्थ ने उसे स्वयं आकाश में उड़ा दिया — क्योंकि सच्ची रक्षा किसी को अपना बनाकर रखना नहीं, उसे स्वतंत्र कर देना है।
प्र2.
(ख) मान लीजिए कि कहानी में हंस और तीर चलाने वाले के बीच बातचीत हो रही है। कल्पना से बताइए कि जब उसने हंस को तीर से घायल किया तो उसमें और हंस में क्या-क्या बातचीत हुई होगी? उन्होंने एक-दूसरे को क्या-क्या तर्क दिए होंगे?
उत्तर

यह कल्पना का प्रश्न है। इसे संवाद के रूप में लिखिए — नाम, फिर दो बिंदु (:), फिर बात। दोनों को तर्क दीजिए, केवल एक को बुरा मत बनाइए — तभी संवाद रोचक बनेगा।

नमूना उत्तर:
हंस: मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था? मैं तो बस आकाश में उड़ रहा था और गा रहा था।
आखेटक: तुमने कुछ नहीं बिगाड़ा। पर मैं आखेटक हूँ, शिकार करना मेरा काम है। तुम मेरे निशाने पर आ गए, इसमें मेरा क्या दोष?
हंस: निशाना लगाना तुम्हारा कौशल है, यह मानता हूँ। पर कौशल दिखाने के लिए किसी की जान लेना क्यों? तुम पेड़ पर, पत्थर पर, किसी लक्ष्य पर निशाना लगा सकते थे।
आखेटक: पेड़ से पेट नहीं भरता। मैं भी किसी का बेटा हूँ, मेरे घर भी लोग भूखे बैठे हैं।
हंस: और मेरे घोंसले में? वहाँ भी मेरे बच्चे मेरी राह देख रहे हैं। तुम्हारी भूख सच्ची है तो मेरा जीवन झूठा कैसे हुआ?
आखेटक: तुम आकाश के प्राणी हो, तुम्हें क्या पता कि धरती पर जीना कितना कठिन है।
हंस: कठिनाई किसी को निर्दयी बनने का अधिकार नहीं देती। जिसने मुझे उठाया, उसने भी तो चुना कि उसे क्या करना है। तुमने मारना चुना, उसने बचाना चुना — अंतर हमारे बीच नहीं, तुम दोनों के चुनाव में है।
ध्यान रखिए: संवाद लिखते समय दोनों की भाषा अलग रखिए — घायल हंस की बात में पीड़ा और विनती हो, आखेटक की बात में हठ और सफ़ाई। इसी से पात्र जीवित लगते हैं।
प्र3.
(ग) मान लीजिए कि माँ ने जो कहानी सुनाई है, आप भी उसके एक पात्र हैं। आप कौन-सा पात्र बनना चाहेंगे? और क्यों? • तीर चलाने वाला • पक्षी • पक्षी को बचाने वाला व्यक्ति • न्यायाधीश • कोई अन्य पात्र जो आप कहानी में जोड़ना चाहें
उत्तर

यह आपकी अपनी पसंद का प्रश्न है — कोई भी पात्र चुनिए, पर कारण अवश्य दीजिए और बताइए कि उस पात्र के रूप में आप क्या करते।

पात्रयदि आप यह बनें तो क्या लिख सकते हैं
पक्षी को बचाने वाला व्यक्तिकरुणा सबसे बड़ा गुण है; घायल की सेवा करना और उसके लिए लड़ना दोनों साहस का काम है।
न्यायाधीशदोनों पक्षों को सुनकर बिना पक्षपात निर्णय देना; न्याय का सिद्धांत बनाना — जीवन देने वाले का अधिकार बड़ा।
पक्षीपीड़ा और स्वतंत्रता की बात कह सकते हैं — “मैं किसी का सामान नहीं, मैं अपना हूँ।”
तीर चलाने वालायदि यह चुनें तो लिखिए कि आप कहानी के अंत में बदल जाते और शिकार छोड़ देते।
कोई अन्य पात्रजैसे — उपवन का माली, न्यायालय में बैठा कोई बालक, या हंस का साथी पक्षी।
नमूना उत्तर: मैं पक्षी को बचाने वाला व्यक्ति बनना चाहूँगा। इसका कारण यह है कि उस पूरी कहानी में सबसे कठिन काम उसी ने किया — उसने केवल दया नहीं दिखाई, बल्कि दया के लिए खड़ा भी हुआ। घायल पक्षी को उठा लेना आसान है, पर एक हथियारबंद आखेटक के सामने “नहीं दूँगा” कह देना और बात न्यायालय तक ले जाना — यह साहस है। मैं भी चाहूँगा कि जब किसी कमज़ोर के साथ अन्याय हो रहा हो तो मैं चुपचाप देखता न रहूँ। और यदि मुझे एक और पात्र जोड़ने को कहा जाए तो मैं उपवन के माली को जोड़ता, जो न्यायालय में गवाह बनकर बताता कि उसने अपनी आँखों से क्या-क्या देखा।
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