मल्हार अध्याय 2 तीन बुद्धिमान के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
तीन बुद्धिमान एक लोककथा है — यानी पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से चली आई कहानी। पुस्तक में इसके किसी लेखक का नाम नहीं दिया गया, क्योंकि लोककथा किसी एक व्यक्ति की रचना नहीं होती। एक निर्धन पिता अपने तीन बेटों से कहता था — हमारे पास रुपया-पैसा और सोना-चाँदी नहीं है, इसलिए तुम “दूसरे प्रकार का धन” संचित करो, यानी पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि । पिता की मृत्यु के बाद तीनों भाई जगत देखने निकल पड़े। चालीस दिन की थकाऊ यात्रा के बाद वे एक बड़े नगर के पास पहुँचे। रास्ते के चिह्न देखकर बड़े भाई ने कहा — यहाँ से एक बहुत बड़ा ऊँट गया है; मझले ने कहा — वह एक आँख से नहीं देख पाता ; छोटे ने कहा — उस पर एक महिला और एक बच्चा सवार थे। यही बातें सुनकर ऊँट के स्वामी (घुड़सवार) ने उन्हें चोर समझ लिया और राजा के पास ले गया। राजा ने उनकी परीक्षा ली — एक बंद पेटी मँगवाई और पूछा कि उसमें क्या है। भाइयों ने बता दिया — उस
अभ्यास
- मेरी समझ से
- पंक्तियों पर चर्चा
- मिलकर करें मिलान
- सोच-विचार के लिए
- अनुमान और कल्पना से
- शब्द से जुड़े शब्द
- लोककथा को सुनाना
- कारक
- सूचनापत्र
- आपकी बात
- ध्यान से देखना-सुनना-अनुभव करना
- आज की पहेली
- खोजबीन के लिए