प्र1.
नीचे दिए गए लिंक का प्रयोग करके आप बहुत-सी अन्य लोककथाएँ देख-सुन सकते हैं— • सुनो लोककथा • दुनिया की छत • भूल चूक लेनी देनी
उत्तर
पुस्तक में इन तीनों के साथ क्यू आर कोड दिए गए हैं। उन्हें अपने शिक्षक या अभिभावक की सहायता से स्कैन कीजिए और लोककथाएँ सुनिए-देखिए। ये तीनों सामग्रियाँ NCERT के अपने डिजिटल मंचों (दीक्षा / e-पाठशाला) पर उपलब्ध हैं।
| शीर्षक | क्या मिलेगा |
|---|---|
| सुनो लोककथा | भारत के अलग-अलग प्रदेशों की लोककथाओं का सुनाया हुआ (ऑडियो) रूप — यानी वही मौखिक परंपरा जिसकी बात ‘लोककथा को सुनाना’ में की गई है। |
| दुनिया की छत | पहाड़ी क्षेत्र से जुड़ी कथा-सामग्री। ‘दुनिया की छत’ नाम तिब्बत-पामीर के ऊँचे पठारों के लिए प्रयोग होता है। |
| भूल चूक लेनी देनी | एक रोचक कथा, जिसका शीर्षक ही एक प्रचलित मुहावरा है — अर्थात ‘जो भूल हो गई, उसे आपस में क्षमा कर लें’। |
खोजबीन को अपनी परियोजना बनाइए:
- सुनी हुई प्रत्येक लोककथा का नाम, प्रदेश और उसका एक पंक्ति का सार कॉपी में लिखिए।
- हर कथा से मिलने वाली सीख अलग से लिखिए।
- अपने घर के किसी बुज़ुर्ग से एक लोककथा सुनिए और उसे अपने शब्दों में लिखकर कक्षा में सुनाइए — यही सबसे अच्छी खोजबीन है, क्योंकि वह कथा शायद कहीं लिखी ही न हो।
- कक्षा में सबकी कथाओं को जोड़कर एक ‘हमारी लोककथाएँ’ नाम की हस्तलिखित पुस्तिका बनाइए।
लोककथा की पहचान: उसका कोई एक लेखक नहीं होता; वह सुनने-सुनाने से चलती है; उसमें सरल पात्र, छोटे संवाद और अंत में कोई सीख होती है। ‘तीन बुद्धिमान’ में भी यही सब है — इसीलिए वह लोककथा है।