कक्षा ७ हिंदी अध्याय 3 फूल और काँटा के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
फूल और काँटा अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की कविता है। ‘उठो लाल, अब आँखें खोलो’ जैसी प्रसिद्ध बाल-कविता के रचयिता हरिऔध जी का जन्म आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उनकी चर्चित काव्य-कृति प्रियप्रवास को खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है। कविता का आधार एक सीधी-सी बात है — फूल और काँटा एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं। वही चाँदनी, वही वर्षा, वही हवा दोनों को मिलती है। पालन-पोषण में कोई अंतर नहीं, फिर भी “ढंग उनके एक से होते नहीं” । काँटे का ढंग — वह उँगलियाँ छेदता है, अच्छे वस्त्र फाड़ देता है, तितलियों के पंख कतर देता है और भौंरे के काले शरीर को बेध देता है। उसका काम चोट पहुँचाना है। फूल का ढंग — वह तितलियों को गोद में लेता है, भौंरे को अपना अनूठा रस पिलाता है और अपनी सुगंध तथा निराले रंग से कलियों का मन खिला देता है। उसका काम सुख बाँटना है। इसी अंतर का परिणाम भी अलग है — “है खटकता एक सब क
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| शब्द | अर्थ | कविता की पंक्ति | अपने वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|---|
| मेह | वर्षा, बारिश | “मेह उन पर है बरसता एक सा” | सावन का मेह बरसते ही खेत हरे हो गए। |
| वर बसन | श्रेष्ठ वस्त्र, अच्छा कपड़ा (वर = उत्तम, बसन = वसन/वस्त्र) | “फाड़ देता है किसी का वर बसन” | त्योहार पर दादी ने वर बसन पहनकर पूजा की। |
| कतर | काट देना, कतरना | “प्यार-डूबी तितलियों का पर कतर” | काँटे ने तितली का पर कतर दिया। |
| बेध | बेधना, छेद कर देना | “भौंर का है बेध देता श्याम तन” | तीर ने ढाल को बेध दिया। |
| श्याम तन | काला शरीर (श्याम = काला, तन = शरीर) | “भौंर का है बेध देता श्याम तन” | भौंरे का श्याम तन फूल पर साफ़ दिखाई देता है। |
| अनूठा | अनोखा, बेजोड़, जिस जैसा दूसरा न हो | “भौंर को अपना अनूठा रस पिला” | इस चित्रकार की शैली सचमुच अनूठी है। |
| निज | अपना, स्वयं का | “निज सुगंधों औ निराले रंग से” | हर व्यक्ति को निज कर्म पर भरोसा रखना चाहिए। |
| औ | ‘और’ का लय के लिए किया गया छोटा रूप | “निज सुगंधों औ निराले रंग से” | कवि ने छंद निभाने के लिए ‘और’ के स्थान पर ‘औ’ लिखा है। |
| खटकना | बुरा लगना, आँख में चुभना | “है खटकता एक सब की आँख में” | झूठ बोलने वाले की बात सबको खटकती है। |
| सोहना | शोभा पाना, सुंदर लगना | “दूसरा है सोहता सुर शीश पर” | माँ के हाथ का बनाया दीपक द्वार पर सोहता है। |
| सुर | देवता (सुर = देव) | “दूसरा है सोहता सुर शीश पर” | मंदिर में सुर-शीश पर फूल चढ़ाए गए। |
| कुल | वंश, ख़ानदान | “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे” | कुल बड़ा होने से कोई अपने आप बड़ा नहीं हो जाता। |
| बड़प्पन | ‘बड़ा’ + ‘पन’; बड़ाई, श्रेष्ठता, महानता का भाव | “जो किसी में हो बड़प्पन की कसर” | उनकी सादगी और बड़प्पन ने सबका मन जीत लिया। |
| कसर | कमी, अभाव | “जो किसी में हो बड़प्पन की कसर” | मेहनत में उसने कोई कसर नहीं छोड़ी। |
अभ्यास
- मेरी समझ से
- पंक्तियों पर चर्चा
- मिलकर करें मिलान
- सोच-विचार के लिए
- अनुमान और कल्पना से
- शब्द से जुड़े शब्द
- बड़प्पन
- कविता की रचना
- कविता का सौंदर्य
- विशेषण
- आपकी बात
- सृजन
- वाद-विवाद
- आज की पहेली
- खोजबीन के लिए