मल्हार अध्याय 3 फूल और काँटा के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
फूल और काँटा अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की कविता है। ‘उठो लाल, अब आँखें खोलो’ जैसी प्रसिद्ध बाल-कविता के रचयिता हरिऔध जी का जन्म आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उनकी चर्चित काव्य-कृति प्रियप्रवास को खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है। कविता का आधार एक सीधी-सी बात है — फूल और काँटा एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं। वही चाँदनी, वही वर्षा, वही हवा दोनों को मिलती है। पालन-पोषण में कोई अंतर नहीं, फिर भी “ढंग उनके एक से होते नहीं” । काँटे का ढंग — वह उँगलियाँ छेदता है, अच्छे वस्त्र फाड़ देता है, तितलियों के पंख कतर देता है और भौंरे के काले शरीर को बेध देता है। उसका काम चोट पहुँचाना है। फूल का ढंग — वह तितलियों को गोद में लेता है, भौंरे को अपना अनूठा रस पिलाता है और अपनी सुगंध तथा निराले रंग से कलियों का मन खिला देता है। उसका काम सुख बाँटना है। इसी अंतर का परिणाम भी अलग है — “है खटकता एक सब क
अभ्यास
- मेरी समझ से
- पंक्तियों पर चर्चा
- मिलकर करें मिलान
- सोच-विचार के लिए
- अनुमान और कल्पना से
- शब्द से जुड़े शब्द
- बड़प्पन
- कविता की रचना
- कविता का सौंदर्य
- विशेषण
- आपकी बात
- सृजन
- वाद-विवाद
- आज की पहेली
- खोजबीन के लिए