प्र1.
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए— (क) “मेह उन पर है बरसता एक सा, एक सी उन पर हवायें हैं बही। पर सदा ही यह दिखाता है हमें, ढंग उनके एक से होते नहीं।”
उत्तर
अर्थ — वर्षा दोनों पर एक जैसी बरसती है और हवा भी दोनों पर एक जैसी बहती है। फिर भी यह बात हमें हमेशा दिखाई देती रहती है कि फूल और काँटे का ढंग, यानी स्वभाव और व्यवहार, कभी एक जैसा नहीं होता।
| पंक्ति | क्या कह रही है |
|---|---|
| “मेह उन पर है बरसता एक सा” | प्रकृति भेदभाव नहीं करती — बादल यह नहीं देखता कि नीचे फूल है या काँटा। |
| “एक सी उन पर हवायें हैं बही” | हवा, धूप, पानी — सब अवसर दोनों को बराबर मिले। |
| “पर सदा ही यह दिखाता है हमें” | ‘सदा’ शब्द बताता है कि यह कोई एक दिन की बात नहीं, हर बार का अनुभव है। |
| “ढंग उनके एक से होते नहीं” | एक जैसा पालन-पोषण पाकर भी दोनों का चरित्र अलग निकला। |
गहरी बात: यह केवल पौधे की बात नहीं है। एक ही घर, एक ही विद्यालय, एक ही शिक्षक — फिर भी दो बच्चों का स्वभाव अलग हो सकता है। कवि कहना चाहता है कि परिस्थिति सबको समान मिल सकती है, पर चरित्र हर कोई अपना स्वयं गढ़ता है। इसीलिए किसी के अच्छे या बुरे होने की ज़िम्मेदारी उसके कुल पर नहीं, उस पर स्वयं है।
भाषा की बात: ‘मेह’ = वर्षा, ‘हवायें’ = हवाएँ (कवि ने लय के लिए पुराना रूप रखा है), ‘ढंग’ = तौर-तरीक़ा, स्वभाव।