सही उत्तर है — काँटा उँगलियों को छेदता है और वस्त्र फाड़ देता है। इसी विकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
| विकल्प | सही / ग़लत | कविता से कारण |
|---|---|---|
| काँटा अपने आस-पास की सुगंध को नष्ट करता है। | ग़लत | कविता में कहीं नहीं कहा गया कि काँटा सुगंध नष्ट करता है। सुगंध की बात केवल फूल के संदर्भ में आई है — “निज सुगंधों औ निराले रंग से”। |
| काँटा तितलियों और भौंरों को आकर्षित करता है। | ग़लत | तितली और भौंरे को गोद में लेना और रस पिलाना फूल का काम है। काँटा तो उनके “पर कतर” देता है और भौंरे का “श्याम तन” बेध देता है। |
| काँटा उँगलियों को छेदता है और वस्त्र फाड़ देता है। | सही ★ | “छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ, फाड़ देता है किसी का वर बसन।” — यह वाक्य सीधे कविता की पंक्ति से निकलता है। |
| काँटा पौधे को हानि पहुँचाता है। | ग़लत | काँटा दूसरों को चुभता है, अपने पौधे को नहीं। कविता कहती है कि पौधा तो दोनों को समान रूप से पालता है — “एक ही पौधा उन्हें है पालता।” |