मल्हार अध्याय 3 आपकी बात

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) यदि आपको फूल और काँटे में से किसी एक को चुनना हो तो आप किसे चुनेंगे और क्यों?
उत्तर

यह आपकी अपनी राय का प्रश्न है। दोनों उत्तर सही माने जाएँगे, बशर्ते कारण ठोस हो और कविता से जुड़ा हो।

नमूना उत्तर 1 — फूल चुनते हुए: मैं फूल को चुनूँगा/चुनूँगी। फूल का जीवन दूसरों को देने में बीतता है — वह तितली को गोद देता है, भौंरे को अपना रस पिलाता है और अपनी सुगंध से आसपास के मन खिला देता है। इसी कारण वह देवता के सिर तक पहुँच जाता है। मैं भी चाहता हूँ कि लोग मुझसे मिलकर हल्का महसूस करें, भारी नहीं। फूल कुछ ही दिन रहता है, पर जितने दिन रहता है, किसी को दुख नहीं देता — यही उसका सबसे बड़ा गुण है।

नमूना उत्तर 2 — काँटा चुनते हुए: मैं काँटा चुनूँगा/चुनूँगी। काँटा किसी को ढूँढ़कर नहीं चुभता; वह चुपचाप अपने पौधे की पहरेदारी करता है। उसी की वजह से पशु पौधे को चर नहीं पाते और फूल सुरक्षित खिल पाता है। काँटा तेज़ धूप और सूखे में भी टिका रहता है, जबकि फूल जल्दी मुरझा जाता है। मैं भी ऐसा बनना चाहता हूँ जो दिखावे में न हो, पर मुश्किल समय में अपनों के आगे खड़ा हो जाए।

यदि फूल चुनें — तर्कयदि काँटा चुनें — तर्क
दूसरों को सुख और सुगंध देनादूसरों की रक्षा करना
सबका प्रिय बनना, सम्मान पानाकठिन परिस्थिति में टिके रहना
कोमलता और उदारतादृढ़ता और आत्मनिर्भरता
अच्छे उत्तर की पहचान: उत्तर में केवल “मुझे फूल अच्छा लगता है” लिखना पर्याप्त नहीं। कविता की कोई पंक्ति और अपने जीवन का कोई उदाहरण — ये दोनों जोड़ देने से उत्तर पूरा हो जाता है।
प्र2.
(ख) कविता में बताया गया है कि फूल अपनी सुगंध और व्यवहार से चारों ओर प्रसन्नता और आनंद फैला देता है। आप अपने मित्रों या परिवार के जीवन में प्रसन्नता और आनंद लाने के लिए क्या-क्या करते हैं और क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर

इस उत्तर के दो भाग बनाइए — जो मैं अभी करता/करती हूँ और जो मैं आगे कर सकता/सकती हूँ। छोटे-छोटे काम लिखिए, बड़े-बड़े वादे नहीं।

अभी जो करता/करती हूँआगे जो कर सकता/सकती हूँ
माँ के साथ रसोई और घर के काम में हाथ बँटाता हूँ।सप्ताह में एक दिन पूरा खाना परोसने और बर्तन समेटने की ज़िम्मेदारी ले लूँ।
दादा-दादी को अख़बार और कहानी पढ़कर सुनाता हूँ।उनकी सुनी हुई पुरानी कहानियाँ एक कापी में लिखकर परिवार की ‘कहानी-पोथी’ बना दूँ।
जो मित्र कक्षा में पीछे रह जाता है, उसे अपनी कापी दिखा देता हूँ।रोज़ आधा घंटा उसके साथ बैठकर पढ़ूँ, ताकि उसे नक़ल नहीं, समझ मिले।
जन्मदिन पर मित्रों को शुभकामना देता हूँ।ख़रीदे हुए उपहार की जगह अपने हाथ का बनाया कार्ड या चित्र दूँ।
छोटी बहन/भाई के साथ खेलता हूँ और झगड़ा होने पर पहले माफ़ी माँग लेता हूँ।उसे रोज़ एक नई कहानी सुनाऊँ या एक नया खेल सिखाऊँ।

नमूना उत्तर: “मैं मानता हूँ कि प्रसन्नता बड़ी चीज़ों से नहीं आती। जब मैं थकी हुई माँ के हाथ से थाली ले लेता हूँ या दादी की दवा समय पर याद दिला देता हूँ, तो उनके चेहरे पर जो हल्की-सी मुस्कान आती है, वही मेरे लिए फूल की सुगंध जैसी है। आगे मैं यह करना चाहता हूँ कि हर रविवार परिवार के साथ बैठकर एक खेल खेलूँ, ताकि सब एक साथ हँस सकें।”

टिप: ‘मीठा बोलना’, ‘सुनना’ और ‘समय देना’ — ये तीन काम बिना पैसे के किसी के जीवन में आनंद भर देते हैं। उत्तर में इन्हें ज़रूर शामिल कीजिए।
प्र3.
(ग) ‘फूल’ और ‘काँटे’ एक-दूसरे से बिलकुल भिन्न हैं फिर भी साथ-साथ पाए जाते हैं। अपने आस-पास से ऐसे अन्य उदाहरण दीजिए। (संकेत— वस्तुएँ, जैसे— नमक और चीनी; स्वभाव, जैसे— शांत और क्रोधी; स्वाद, जैसे— खट्टा-मीठा; रंग, जैसे— काला-सफेद; अनुभव, जैसे— सुख-दुख आदि)
उत्तर

पुस्तक के संकेत के अनुसार वर्ग बनाकर उदाहरण दीजिए। ऐसे जोड़े चुनिए जो विपरीत हों, फिर भी साथ-साथ मिलते हों।

वर्गउदाहरणये साथ-साथ कैसे
वस्तुएँनमक और चीनी; सुई और धागा; ताला और चाबीदोनों एक ही रसोई या एक ही डिब्बे में रहते हैं; एक के बिना दूसरे का काम अधूरा है।
स्वादखट्टा-मीठा (आम की चटनी), तीखा-मीठा (गोलगप्पे का पानी)एक ही थाली में दोनों मिलते हैं; मिलकर ही स्वाद पूरा होता है।
रंगकाला-सफ़ेद (शतरंज की बिसात, बुलबुल के पंख)एक ही वस्तु पर दोनों रंग साथ दिखते हैं।
प्रकृतिदिन-रात; धूप-छाँव; गर्मी-सर्दी; नदी का शांत और तेज़ बहावएक के बाद दूसरा आता है; एक ही चक्र के दो हिस्से हैं।
स्वभावशांत और क्रोधी भाई-बहन; एक ही कक्षा में शरारती और गंभीर विद्यार्थीएक ही घर, एक ही कक्षा — फिर भी स्वभाव अलग, ठीक फूल और काँटे की तरह।
अनुभवसुख-दुख; जीत-हार; मिलना-बिछड़नाएक ही जीवन में दोनों आते हैं; दुख के बाद सुख अधिक मीठा लगता है।
पेड़-पौधेगुलाब में फूल और काँटा; नीबू और बेर में फल और काँटाएक ही टहनी पर दोनों — यही तो कविता का मूल चित्र है।
यहाँ सीखने की बात: विपरीत चीज़ों का साथ रहना कोई गड़बड़ी नहीं, प्रकृति का नियम है। यदि छाँव न हो तो धूप की क़ीमत न पता चले; यदि काँटा न हो तो फूल की कोमलता विशेष न लगे।
प्र4.
(घ) “छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ, फाड़ देता है किसी का वर बसन।” आप अपने आस-पास की किसी समस्या का वर्णन कीजिए जिसे आप ‘काँटे’ के समान महसूस करते हैं। उस समस्या का समाधान भी सुझाइए।
उत्तर

इस उत्तर में तीन बातें होनी चाहिए — समस्या क्या है, वह ‘काँटे’ जैसी क्यों लगती है, और उसका व्यावहारिक समाधान

नमूना उत्तर: हमारे मुहल्ले के नुक्कड़ पर कूड़े का ढेर लगा रहता है। लोग घर का कचरा वहीं फेंक देते हैं। बारिश में उससे बदबू उठती है, मच्छर पनपते हैं और गाय-कुत्ते पन्नी खाकर बीमार हो जाते हैं। यह मुझे ठीक ‘काँटे’ जैसा लगता है — वह वहीं पड़ा रहता है, किसी को बुलाता नहीं, पर जो पास से गुज़रता है उसी को चुभ जाता है।

समाधान —

  1. मुहल्ले के बच्चों की एक ‘सफ़ाई टोली’ बने जो महीने में एक बार वहाँ श्रमदान करे।
  2. नगर पालिका को आवेदन देकर वहाँ दो कूड़ेदान — गीला और सूखा — रखवाए जाएँ।
  3. दीवार पर बच्चों के बनाए चित्र और नारे लगाए जाएँ; जिस दीवार पर सुंदर चित्र होता है, वहाँ लोग कचरा नहीं फेंकते।
  4. हर घर से एक व्यक्ति यह ज़िम्मेदारी ले कि कचरा गाड़ी आने पर ही कचरा दिया जाएगा।
और कौन-सी समस्याएँ ‘काँटे’ जैसी हैंसुझाया जा सकने वाला समाधान
सड़क पर खुला पड़ा नाला या गड्ढाग्राम पंचायत/नगर निगम को शिकायत; तब तक गड्ढे के पास संकेत-पट्टी लगाना।
विद्यालय जाते समय रास्ते में झुंड बनाकर चिढ़ाने वाले बड़े लड़केअकेले न जाकर समूह में जाना; शिक्षक और अभिभावक को तुरंत बताना।
पानी के नल का दिन भर टपकते रहनाटोंटी बदलवाना; ‘पानी बचाओ’ का बोर्ड लगाना।
कक्षा में किसी साथी को उसके रंग, कद या भाषा पर चिढ़ानातुरंत टोकना, चुप न रहना; कक्षा में ‘सम्मान का नियम’ बनाकर दीवार पर लगाना।
लिखते समय: समस्या ऐसी चुनिए जो सचमुच आपके आसपास हो और जिसका समाधान आप स्वयं कुछ हद तक कर सकें। बहुत बड़ी समस्या चुनने पर समाधान केवल भाषण बनकर रह जाता है।
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