प्र1.
(क) इस कविता के बारे में एक चित्र बनाइए। आप चित्र में जहाँ चाहें, अपने मनोनीत रंग भर सकते हैं। आप बिना रंगों या केवल उपलब्ध रंगों की सहायता से भी चित्र बना सकते हैं। चित्र बिलकुल मौलिक लगे इसकी चिंता करने की भी आवश्यकता नहीं है। आप अपनी कल्पना को जैसे मन करे, वैसे साकार कर सकते हैं।
उत्तर
यह चित्रकला की गतिविधि है — इसे अपनी कापी के दिए गए ख़ाने में स्वयं बनाइए। नीचे बताया गया है कि चित्र में क्या-क्या आना चाहिए ताकि वह कविता का चित्र लगे, केवल एक फूल का नहीं।
चित्र में ये पाँच बातें आनी चाहिए —
- एक ही पौधा, जिसकी एक टहनी पर फूल खिला हो और उसी टहनी पर काँटे भी दिखें — यही कविता का मूल दृश्य है।
- ऊपर चाँद और चाँदनी, तथा एक ओर बादल से गिरती बूँदें और हवा की लहरें — ये तीनों दोनों पर समान रूप से पड़ती दिखाइए।
- फूल की ओर तितली और भौंरा, जिन्हें फूल मानो बुला रहा हो।
- काँटे की ओर एक फटा हुआ आँचल या दुपट्टा अथवा चुभी हुई उँगली का संकेत।
- ऊपर या नीचे कविता की कोई एक पंक्ति सुंदर अक्षरों में लिख दीजिए, जैसे — “ढंग उनके एक से होते नहीं।”
| भाग | सुझाया गया रंग |
|---|---|
| फूल | लाल / गुलाबी, बीच में पीला पराग |
| पत्तियाँ और तना | दो तरह का हरा — गहरा और हल्का |
| काँटे | भूरा या गहरा हरा, नुकीली रेखाओं से |
| रात का आकाश | गहरा नीला, चाँद के चारों ओर सफ़ेद आभा |
| तितली | नारंगी-काली, भौंरा काला |
सुझाव: चित्र को दो भागों में बाँट दीजिए — बायाँ आधा भाग फूल का संसार (चमकीले रंग) और दायाँ आधा भाग काँटे का संसार (फीके रंग)। इससे कविता का ‘अंतर’ चित्र में अपने आप दिखने लगेगा। यदि रंग न हों तो पेंसिल की छायांकन (shading) से भी यही असर लाया जा सकता है।