मल्हार अध्याय 3 सृजन

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) इस कविता के बारे में एक चित्र बनाइए। आप चित्र में जहाँ चाहें, अपने मनोनीत रंग भर सकते हैं। आप बिना रंगों या केवल उपलब्ध रंगों की सहायता से भी चित्र बना सकते हैं। चित्र बिलकुल मौलिक लगे इसकी चिंता करने की भी आवश्यकता नहीं है। आप अपनी कल्पना को जैसे मन करे, वैसे साकार कर सकते हैं।
उत्तर

यह चित्रकला की गतिविधि है — इसे अपनी कापी के दिए गए ख़ाने में स्वयं बनाइए। नीचे बताया गया है कि चित्र में क्या-क्या आना चाहिए ताकि वह कविता का चित्र लगे, केवल एक फूल का नहीं।

चित्र में ये पाँच बातें आनी चाहिए —

  1. एक ही पौधा, जिसकी एक टहनी पर फूल खिला हो और उसी टहनी पर काँटे भी दिखें — यही कविता का मूल दृश्य है।
  2. ऊपर चाँद और चाँदनी, तथा एक ओर बादल से गिरती बूँदें और हवा की लहरें — ये तीनों दोनों पर समान रूप से पड़ती दिखाइए।
  3. फूल की ओर तितली और भौंरा, जिन्हें फूल मानो बुला रहा हो।
  4. काँटे की ओर एक फटा हुआ आँचल या दुपट्टा अथवा चुभी हुई उँगली का संकेत।
  5. ऊपर या नीचे कविता की कोई एक पंक्ति सुंदर अक्षरों में लिख दीजिए, जैसे — “ढंग उनके एक से होते नहीं।”
भागसुझाया गया रंग
फूललाल / गुलाबी, बीच में पीला पराग
पत्तियाँ और तनादो तरह का हरा — गहरा और हल्का
काँटेभूरा या गहरा हरा, नुकीली रेखाओं से
रात का आकाशगहरा नीला, चाँद के चारों ओर सफ़ेद आभा
तितलीनारंगी-काली, भौंरा काला
सुझाव: चित्र को दो भागों में बाँट दीजिए — बायाँ आधा भाग फूल का संसार (चमकीले रंग) और दायाँ आधा भाग काँटे का संसार (फीके रंग)। इससे कविता का ‘अंतर’ चित्र में अपने आप दिखने लगेगा। यदि रंग न हों तो पेंसिल की छायांकन (shading) से भी यही असर लाया जा सकता है।
प्र2.
(ख) मान लीजिए कि फूल और काँटे के बीच बातचीत हो रही है। उनकी बातचीत या संवाद अपनी कल्पना से लिखिए। संवाद का विषय निम्नलिखित हो सकता है— • उनके गुणों और विशेषताओं पर चर्चा। • यह समझाना कि उनका जीवन में क्या योगदान है। उदाहरण — • फूल — मैं दूसरों के जीवन में सुगंध और सुख फैलाने आया हूँ। • काँटा — और मैं संघर्ष की याद दिलाने और सुरक्षा देने के लिए हूँ।
उत्तर

नमूना उत्तर — फूल और काँटे का संवाद

पात्रसंवाद
फूलकाँटे भाई, सुबह से सब मुझे ही देख रहे हैं। कोई तुम्हारी ओर आँख उठाकर भी नहीं देखता।
काँटादेखें भी क्यों? तुम्हारे पास रंग है, सुगंध है। मेरे पास केवल नोक है।
फूलपर मैं सोचता हूँ — हम दोनों तो एक ही पौधे के हैं। एक ही जड़ हमें पानी देती है, एक ही चाँदनी हम पर पड़ती है। फिर हमारा ढंग इतना अलग क्यों है?
काँटाक्योंकि हमारा काम अलग है, भाई। तुम्हारा काम देना है — तितली को गोद, भौंरे को रस, कली को हौसला। मेरा काम पहरा देना है। रात में जब बकरी मुँह बढ़ाती है, तो सामने मैं होता हूँ, तुम नहीं।
फूलयह तो मैंने कभी सोचा ही नहीं। यानी मैं जो खिल पाता हूँ, वह तुम्हारे पहरे के कारण?
काँटाऔर मैं जो टिका रह पाता हूँ, वह तुम्हारे कारण। तुम्हारी सुगंध से भौंरा आता है, भौंरे से बीज बनता है, बीज से नया पौधा। मैं अकेला कुछ नहीं।
फूलतो फिर लोग तुम्हें बुरा क्यों कहते हैं?
काँटाक्योंकि लोग वही देखते हैं जो उन्हें चुभता है। पर मुझे शिकायत नहीं। सम्मान माँगने से नहीं, काम करने से मिलता है — देर से ही सही।
फूलसच कहा। कवि ने भी तो यही पूछा है — कुल की बड़ाई किस काम की, जब अपने में बड़प्पन न हो। हम दोनों का कुल एक है, बड़प्पन अपना-अपना है।
काँटाठीक। तुम महकते रहो, मैं पहरा देता रहूँगा। पौधा तभी पूरा है जब हम दोनों हैं।
संवाद लिखने की विधि: (1) हर पंक्ति के आगे पात्र का नाम और डैश (—) लगाइए। (2) पात्र की भाषा उसके स्वभाव जैसी रखिए — फूल की बात कोमल, काँटे की बात रूखी पर सच्ची। (3) संवाद केवल बहस न रहे — अंत में कोई साझा निष्कर्ष निकलना चाहिए। (4) आठ से बारह पंक्तियाँ पर्याप्त हैं।
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