प्र1.
विभिन्न समूह बनाकर कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। इसके लिए विषय है— ‘जीवन में फूल और काँटे, दोनों की आवश्यकता होती है’। (कक्षा में वाद-विवाद का आयोजन करने के लिए पुस्तक में दस सुझाव दिए गए हैं — समूह बनाना, निर्णायक मंडल, 15 मिनट की तैयारी, तीन-चार मिनट का समय, क्रम, अंकों का निर्धारण, विजेता का निर्णय, तालियाँ और अनुभवों पर अनुच्छेद-लेखन।)
उत्तर
यह कक्षा में करने की गतिविधि है। पुस्तक ने आयोजन के दस चरण दे दिए हैं। नीचे दोनों पक्षों के लिए तैयार तर्क दिए जा रहे हैं, जिन्हें आप अपने समूह की तैयारी में काम में ला सकते हैं।
| ‘फूल’ के पक्ष में तर्क | ‘काँटे’ के पक्ष में तर्क |
|---|---|
| फूल सुख, सुगंध और सुंदरता देता है — “है सदा देता कली का जी खिला”। | काँटा पौधे की रक्षा करता है; उसी के कारण फूल सुरक्षित खिलता है। |
| फूल दूसरों को अपनाता है — तितली को गोद, भौंरे को रस। | काँटा कठिनाई सहना सिखाता है; सूखे और धूप में भी टिका रहता है। |
| फूल के बिना परागण नहीं, बीज नहीं, नया पौधा नहीं। | नागफनी जैसे रेगिस्तानी पौधों में काँटा ही पत्तियों का काम करता है और पानी बचाता है। |
| समाज में मीठा बोलने वाले, सहयोग करने वाले लोग ही जोड़ते हैं। | समाज में नियम, अनुशासन और ‘ना’ कहने वाले लोग भी ज़रूरी हैं, वरना ग़लत बात नहीं रुकती। |
| फूल सम्मान पाता है — “सोहता सुर शीश पर”। | जीवन में कठिनाइयाँ ही व्यक्ति को मज़बूत बनाती हैं; बिना काँटों के मिली सफलता की क़ीमत नहीं होती। |
निष्कर्ष जो निर्णायक मंडल रख सकता है — विषय स्वयं कहता है कि ‘दोनों की आवश्यकता होती है’। इसलिए सबसे अच्छा वही समूह माना जाएगा जो अपने पक्ष के तर्क रखते हुए दूसरे पक्ष का महत्व भी स्वीकार करे — जैसे “फूल बड़ा है, पर काँटे के पहरे के बिना वह खिल ही नहीं पाता।”
| निर्णायक मंडल किन बातों पर अंक दे | क्या देखे |
|---|---|
| तर्क की गहराई | तर्क के साथ उदाहरण या कविता की पंक्ति दी गई या नहीं |
| भाषा कौशल | शब्द चयन, स्पष्ट उच्चारण, शिष्ट भाषा |
| प्रस्तुति शैली | आत्मविश्वास, समय का पालन, सबकी भागीदारी |
| श्रवण-शिष्टाचार | दूसरे समूह की बात बिना टोके सुनी गई या नहीं |
अंत में (सुझाव 10): गतिविधि के बाद अपने अनुभव पर एक अनुच्छेद लिखिए — “मुझे कौन-सा तर्क सबसे अच्छा लगा और क्यों”, “बोलते समय मुझे क्या कठिनाई हुई”, “अगली बार मैं क्या अलग करूँगा/करूँगी”।