कक्षा ७ हिंदी अध्याय 4 पानी रे पानी के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

पानी रे पानी एक निबंध है। लेखक अनुपम मिश्र प्रखर लेखक, संपादक, छायाकार और जाने-माने पर्यावरणविद थे। उनकी सबसे चर्चित पुस्तक आज भी खरे हैं तालाब है; साफ माथे का समाज उनकी एक और महत्वपूर्ण पुस्तक है। वे गाँधी शांति प्रतिष्ठान की पत्रिका गांधी मार्ग के संस्थापक-संपादक भी थे। पाठ की शुरुआत भूगोल की किताब वाले जल-चक्र के चित्र से होती है — सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती, बरसात की बूँदें, नदी और फिर वही नदी समुद्र में। समुद्र से उठी भाप बादल बनकर बरसती है और जल की यात्रा घूमकर समुद्र में लौट आती है — जल-चक्र पूरा हो जाता है । पर किताबी बात से बाहर हालात दूसरे हैं — नलों में पानी बेवक्त आता है, लोग पाइप में मोटर लगवाकर पड़ोसियों का हक खींच लेते हैं, शहरों में पानी बिकने लगा है, और दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बैंगलोर तक में जल-संकट है। लेखक का मूल सूत्र यह है कि अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो

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शब्दअर्थपाठ की पंक्तिअपने वाक्य में प्रयोग
जल-चक्रपानी का समुद्र से भाप बनकर उठना, बादल बनना, बरसना, नदी बनकर बहना और फिर समुद्र में लौट आना“इन तीरों के सहारे जल की यात्रा एक तरफ से शुरू होकर समुद्र में वापिस मिल जाती है। जल-चक्र पूरा हो जाता है।”जल-चक्र प्रकृति का सबसे बड़ा पुनर्चक्रण है।
भूजलजमीन के नीचे छिपा हुआ जल भंडार“इससे हमारा भूजल भंडार समृद्ध होता जाता है।”गाँव के हैंडपंप का पानी भूजल से ही आता है।
गुल्लकपैसे जमा करने का मिट्टी का पात्र; पाठ में धरती के लिए प्रयुक्त रूपक“हमारी यह धरती भी इसी तरह की खूब बड़ी गुल्लक है।”मैंने अपनी गुल्लक तोड़कर बहन के लिए उपहार खरीदा।
अकालकुसमय, सूखा; अनाज-पानी की भारी कमी का समय“देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसी हालत बन जाती है।”लगातार दो साल वर्षा न होने से इलाके में अकाल पड़ गया।
बेवक्तगलत समय पर, कुसमय“पानी आता भी है तो बेवक्त।”बेवक्त की बारिश ने पूरी फसल भिगो दी।
झगड़े-टंटेछोटी-छोटी बातों पर होने वाले आपसी विवाद“रोज-रोज के इन झगड़े-टंटों से बचने के लिए…”मोहल्ले के झगड़े-टंटे बैठकर बात करने से ही सुलझते हैं।
रिसनाधीरे-धीरे बूँद-बूँद करके अंदर जाना या टपकना“जमीन के नीचे छिपे जल के भंडार में धीरे-धीरे रिसकर, छनकर जा मिलता है।”घड़े से पानी रिसकर नीचे फर्श पर फैल गया।
पाटनागड्ढे या तालाब को मिट्टी-कचरे से भरकर बराबर कर देना“अपने तालाबों को कचरे से पाटकर, भरकर समतल बना दिया।”नाले को पाटकर वहाँ सड़क बना दी गई।
जलस्रोतपानी मिलने की जगह — कुआँ, तालाब, झील, नदी, झरना“अपने आस-पास के जलस्रोतों की, तालाबों की और नदियों आदि की रखवाली…”गाँव का पुराना कुआँ आज भी सबसे भरोसेमंद जलस्रोत है।
वर्षा जल संग्रहणवर्षा के जल को प्राकृतिक या कृत्रिम रूप से धरती में/टंकी में जमा करना“जल जहाँ गिरे वहीं एकत्र कीजिए।”हमारे विद्यालय की छत पर वर्षा जल संग्रहण की टंकी लगी है।
पहलूकिसी बात का एक पक्ष या रुख“अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।”हर समस्या के दो पहलू होते हैं, दोनों देखने चाहिए।
समृद्धभरा-पूरा, संपन्न“इससे हमारा भूजल भंडार समृद्ध होता जाता है।”पुस्तकालय अच्छी किताबों से समृद्ध होना चाहिए।
पर्यावरणविदपर्यावरण का जानकार, पर्यावरण के लिए काम करने वाला“…जाने-माने पर्यावरणविद होने के साथ-साथ छायाकार भी थे।”पर्यावरणविद ने पेड़ों की कटाई रोकने का सुझाव दिया।
पालतालाब की मेड़ या बाँध, तालाब का किनारा“पाल के किनारे रखा इतिहास”गाँव के लोग शाम को तालाब की पाल पर बैठते हैं।
पारसवह कल्पित पत्थर जिसके छूने से लोहा सोना बन जाता है“उनके हाथ में कोई साधारण पत्थर नहीं है, पारस है।”अच्छी संगति पारस की तरह होती है।
  1. मेरी समझ से
  2. मिलकर करें मिलान
  3. पंक्तियों पर चर्चा
  4. सोच-विचार के लिए
  5. शीर्षक
  6. शब्दों की बात
  7. समानार्थी शब्द
  8. उपसर्ग
  9. आपकी बात
  10. सृजन
  11. पानी रे पानी (चित्रों पर बातचीत)
  12. सबका पानी
  13. दैनिक कार्यों में पानी
  14. जन-सुविधा के रूप में जल
  15. बिन पानी सब सून
  16. यह भी जानें
  17. आज की पहेली
  18. खोजबीन के लिए
  19. झरोखे से और साझी समझ
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