मल्हार अध्याय 4 पानी रे पानी के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
पानी रे पानी एक निबंध है। लेखक अनुपम मिश्र प्रखर लेखक, संपादक, छायाकार और जाने-माने पर्यावरणविद थे। उनकी सबसे चर्चित पुस्तक आज भी खरे हैं तालाब है; साफ माथे का समाज उनकी एक और महत्वपूर्ण पुस्तक है। वे गाँधी शांति प्रतिष्ठान की पत्रिका गांधी मार्ग के संस्थापक-संपादक भी थे। पाठ की शुरुआत भूगोल की किताब वाले जल-चक्र के चित्र से होती है — सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती, बरसात की बूँदें, नदी और फिर वही नदी समुद्र में। समुद्र से उठी भाप बादल बनकर बरसती है और जल की यात्रा घूमकर समुद्र में लौट आती है — जल-चक्र पूरा हो जाता है । पर किताबी बात से बाहर हालात दूसरे हैं — नलों में पानी बेवक्त आता है, लोग पाइप में मोटर लगवाकर पड़ोसियों का हक खींच लेते हैं, शहरों में पानी बिकने लगा है, और दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बैंगलोर तक में जल-संकट है। लेखक का मूल सूत्र यह है कि अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो
अभ्यास
- मेरी समझ से
- मिलकर करें मिलान
- पंक्तियों पर चर्चा
- सोच-विचार के लिए
- शीर्षक
- शब्दों की बात
- समानार्थी शब्द
- उपसर्ग
- आपकी बात
- सृजन
- पानी रे पानी (चित्रों पर बातचीत)
- सबका पानी
- दैनिक कार्यों में पानी
- जन-सुविधा के रूप में जल
- बिन पानी सब सून
- यह भी जानें
- आज की पहेली
- खोजबीन के लिए
- झरोखे से और साझी समझ