मल्हार अध्याय 4 पंक्तियों पर चर्चा

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
इस पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और अपने सहपाठियों से चर्चा कीजिए। • “पानी आता भी है तो बेवक्त।”
उत्तर

आशय: पानी बिलकुल नहीं आता, ऐसा नहीं है — पर जब आता है तब वह समय ठीक नहीं होता। कभी देर रात, कभी बहुत सबेरे। इसलिए घर के लोगों को मीठी नींद छोड़कर बालटियाँ, बर्तन और घड़े भरने पड़ते हैं।

चर्चा किस दिशा में ले जाएँ: इस एक वाक्य में पानी की कमी से भी बड़ी बात कही गई है — पानी की अनिश्चितता। जो चीज तय समय पर न मिले, उसका इंतजाम करने में पूरा दिन उलझ जाता है। बच्चों की पढ़ाई, बड़ों का काम, सबका समय इसी में चला जाता है। पाठ आगे कहता है कि इसी खींचतान से “तू-तू, मैं-मैं” शुरू हो जाती है।
शब्द पर ध्यान दीजिए: ‘बेवक्त’ में बे- उपसर्ग है, जिसका अर्थ है ‘बिना’ या ‘नहीं’ — बेवक्त = बिना वक्त का, गलत समय पर। ऐसे ही — बेकाम, बेचैन, बेईमान।
प्र2.
• “देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं।”
उत्तर

आशय: पानी की कमी केवल एक-दो नलों तक सीमित नहीं रहती। जब वर्षा न हो और भूजल भी न बचे, तो देश के बड़े-बड़े भाग सूखे की चपेट में आ जाते हैं — खेत सूख जाते हैं, कुएँ-तालाब खाली हो जाते हैं, पशुओं के लिए चारा-पानी नहीं बचता।

अकाल = अ + काल
काल का अर्थ — समय, मृत्यु
अकाल का अर्थ — कुसमय, सूखा
चर्चा किस दिशा में ले जाएँ: लेखक ने आगे यही बात दूसरे सिरे से भी कही है — “अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।” यानी अकाल आसमान की गलती नहीं, हमारी अपनी गलती का नतीजा भी है। जिस साल वर्षा हुई थी उस साल का पानी हमने रोका ही नहीं, तो अगले साल के लिए बचता कहाँ से?
प्र3.
• “कुछ दिनों के लिए सब कुछ थम जाता है।”
उत्तर

आशय: यह पंक्ति बाढ़ के बारे में है। जब घरों, स्कूलों, सड़कों और रेल की पटरियों पर पानी भर जाता है, तो जीवन की सारी गति रुक जाती है — स्कूल बंद, दुकानें बंद, गाड़ियाँ बंद, काम बंद। पाठ इसके ठीक बाद कहता है — “सब कुछ बह जाता है।”

‘थमना’ और ‘बहना’ का जोड़ा: लेखक ने जान-बूझकर दो उलटे शब्द पास-पास रखे हैं। जीवन थम जाता है, पर पानी बह जाता है। जो पानी हमें साल भर चाहिए था, वह चंद दिनों में नुकसान करके निकल जाता है — यही बाढ़ की सबसे बड़ी विडंबना है।
चर्चा के लिए: अपने इलाके की किसी बाढ़ या जल-भराव की घटना याद कीजिए — कितने दिन स्कूल बंद रहा? पानी उतरने के बाद सबसे बड़ी परेशानी क्या थी?
प्र4.
• “अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।”
उत्तर

आशय: सिक्के के दो पहलू अलग दिखते हैं, पर होते एक ही सिक्के के हैं। इसी तरह अकाल (पानी का बेहद कम हो जाना) और बाढ़ (पानी का बेहद ज्यादा हो जाना) ऊपर से उलटी लगती दो समस्याएँ हैं, पर दोनों की जड़ एक ही है — हमने वर्षा के पानी को सँभालना छोड़ दिया।

तालाब पाट दिए
→ वर्षा का पानी न रुका, न जमीन में उतरा
→ बरसात में सब तरफ बहकर बाढ़
→ भूजल भरा ही नहीं, गर्मी में नल सूखे — अकाल
एक ही गलती, दो सजाएँ।
भाषा की सुंदरता: यह एक मुहावरेदार वाक्य है, जिसमें अमूर्त बात (जल-प्रबंधन) को एक ठोस, रोज दिखने वाली चीज (सिक्का) से समझाया गया है। पाठ का पूरा तर्क इसी एक वाक्य में सिमट आया है — इसीलिए लेखक ने आगे लिखा, “यदि हम इन दोनों को ठीक से समझ सकें और सँभाल लें तो इन कई समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।”
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