प्र1.
लेख को एक बार पुन: पढ़िए और निम्नलिखित के विषय में पता लगाकर लिखिए। (क) पाठ में धरती को एक बहुत बड़ी गुल्लक क्यों कहा गया है?
उत्तर
धरती को गुल्लक इसलिए कहा गया है क्योंकि दोनों का काम एक जैसा है — थोड़ा-थोड़ा जमा करना और जरूरत पड़ने पर काम आना।
| गुल्लक | धरती |
|---|---|
| मिट्टी की बनी होती है। | “मिट्टी की बनी इस विशाल गुल्लक…” |
| उसमें एक-एक रुपया, सिक्के और नोट जमा होते जाते हैं। | उसमें वर्षा का पानी बूँद-बूँद करके जमा होता जाता है। |
| जमा करने का रास्ता ऊपर बनी दरार है। | जमा करने का रास्ता तालाब और झीलें हैं — “वे धरती की गुल्लक में पानी भरने का काम करते हैं।” |
| जमा पैसा दिखता नहीं, पर रहता है। | “पानी का यह खजाना हमें दिखता नहीं” — यानी भूजल भंडार। |
| जरूरत पड़ने पर बचत काम आती है। | बरसात बीत जाने के बाद पूरे साल घर, खेत और पाठशाला के लिए पानी उसी से मिलता है। |
यह कौन-सा अलंकार है: धरती पर गुल्लक का आरोप किया गया है, यानी धरती को सीधे गुल्लक कह दिया गया है — यह रूपक है। यदि कहा जाता “धरती गुल्लक के समान है”, तो उपमा होती।
चेतावनी भी इसी रूपक में है: गुल्लक तभी काम आती है जब उसमें डालते रहें। हम डालना भूल गए और ऊपर से उसे पाट भी दिया — इसीलिए वह खाली पड़ी है।