प्र1.
“देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं।” उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द में ‘अ’ ने ‘काल’ शब्द में जुड़कर एक नया अर्थ दिया है। काल का अर्थ है— समय, मृत्यु। जबकि अकाल का अर्थ है— कुसमय, सूखा। कुछ शब्दांश किसी शब्द के आरंभ में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं या कोई विशेषता उत्पन्न कर देते हैं और इस प्रकार नए शब्दों का निर्माण करते हैं। इस तरह के शब्दांश ‘उपसर्ग’ कहलाते हैं। आइए, कुछ और उपसर्गों की पहचान करते हैं— (पुस्तक में दिया चित्र — प्र, वि, पर, स्व + देश = प्रदेश, विदेश, परदेश, स्वदेश)
उत्तर
चित्र में ‘देश’ शब्द के आगे चार उपसर्ग जोड़े गए हैं। हर उपसर्ग अर्थ को नई दिशा में मोड़ देता है —
| उपसर्ग | + मूल शब्द | नया शब्द | अर्थ |
|---|---|---|---|
| प्र | देश | प्रदेश | देश का एक बड़ा भाग, राज्य — “हमारे प्रदेशों की राजधानियों में…” |
| वि | देश | विदेश | अपने देश से बाहर का देश |
| पर | देश | परदेश | पराया देश या पराया इलाका, घर से दूर की जगह |
| स्व | देश | स्वदेश | अपना देश |
उपसर्ग की पहचान: उपसर्ग शब्द के आरंभ में लगता है और अकेला खड़ा नहीं हो सकता। ‘वि’, ‘प्र’, ‘स्व’ अपने आप में कोई शब्द नहीं हैं — पर ‘देश’ के आगे लगते ही चार अलग-अलग शब्द बन जाते हैं। जो शब्दांश अंत में लगता है उसे प्रत्यय कहते हैं (जैसे — पर्यावरण + विद = पर्यावरणविद)।
पाठ में से और उदाहरण: अ + काल = अकाल, बे + वक्त = बेवक्त, सु + रक्षित = सुरक्षित, सम + तल = समतल, प्र + कृति = प्रकृति, आ + वश्यकता से जुड़ा ‘आवश्यक’, वि + शाल = विशाल।