मल्हार अध्याय 4 उपसर्ग

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं।” उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द में ‘अ’ ने ‘काल’ शब्द में जुड़कर एक नया अर्थ दिया है। काल का अर्थ है— समय, मृत्यु। जबकि अकाल का अर्थ है— कुसमय, सूखा। कुछ शब्दांश किसी शब्द के आरंभ में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं या कोई विशेषता उत्पन्न कर देते हैं और इस प्रकार नए शब्दों का निर्माण करते हैं। इस तरह के शब्दांश ‘उपसर्ग’ कहलाते हैं। आइए, कुछ और उपसर्गों की पहचान करते हैं— (पुस्तक में दिया चित्र — प्र, वि, पर, स्व + देश = प्रदेश, विदेश, परदेश, स्वदेश)
उत्तर

चित्र में ‘देश’ शब्द के आगे चार उपसर्ग जोड़े गए हैं। हर उपसर्ग अर्थ को नई दिशा में मोड़ देता है —

उपसर्ग+ मूल शब्दनया शब्दअर्थ
प्रदेशप्रदेशदेश का एक बड़ा भाग, राज्य — “हमारे प्रदेशों की राजधानियों में…”
विदेशविदेशअपने देश से बाहर का देश
परदेशपरदेशपराया देश या पराया इलाका, घर से दूर की जगह
स्वदेशस्वदेशअपना देश
उपसर्ग की पहचान: उपसर्ग शब्द के आरंभ में लगता है और अकेला खड़ा नहीं हो सकता। ‘वि’, ‘प्र’, ‘स्व’ अपने आप में कोई शब्द नहीं हैं — पर ‘देश’ के आगे लगते ही चार अलग-अलग शब्द बन जाते हैं। जो शब्दांश अंत में लगता है उसे प्रत्यय कहते हैं (जैसे — पर्यावरण + विद = पर्यावरणविद)।
पाठ में से और उदाहरण: अ + काल = अकाल, बे + वक्त = बेवक्त, सु + रक्षित = सुरक्षित, सम + तल = समतल, प्र + कृति = प्रकृति, आ + वश्यकता से जुड़ा ‘आवश्यक’, वि + शाल = विशाल
प्र2.
अब आप भी उपसर्ग के प्रयोग से नए शब्द बनाकर उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए— (पुस्तक में दिया चित्र — सु, अ, वि + पात्र, ज्ञान)
उत्तर

चित्र में तीन उपसर्ग (सु, अ, वि) और दो मूल शब्द (पात्र, ज्ञान) दिए गए हैं। इनसे बनने वाले चार शब्द और उनके वाक्य —

उपसर्ग + मूल शब्दनया शब्दअर्थवाक्य में प्रयोग
सु + पात्रसुपात्रयोग्य व्यक्ति, जिसे देना सार्थक होदान हमेशा सुपात्र को ही देना चाहिए।
अ + पात्रअपात्रअयोग्य, जो उस चीज के लायक न होअपात्र के हाथ में अधिकार आ जाए तो नुकसान ही होता है।
अ + ज्ञानअज्ञानजानकारी का अभाव, नासमझीतालाबों को पाट देना हमारे अज्ञान का ही परिणाम था।
वि + ज्ञानविज्ञानविशेष रूप से जाना हुआ ज्ञानविज्ञान ने वर्षा जल संग्रहण के कई सरल तरीके सुझाए हैं।

और अभ्यास कीजिए — इन्हीं तीन उपसर्गों से बने कुछ और शब्द —

उपसर्गअर्थ की दिशाबने हुए शब्दएक वाक्य
सुअच्छा, सुंदरसुगंध, सुजल, सुविधा, सुरक्षितबरसात के बाद मिट्टी से उठती सुगंध मन मोह लेती है।
नहीं, अभावअकाल, अशुद्ध, असंभव, अनजानबिना छाने वर्षा का जल अशुद्ध हो सकता है।
विविशेष, अलग, उलटाविशाल, विदेश, विवाद, विश्वासपानी को लेकर पड़ोसियों में विवाद न हो, इसका ध्यान रखिए।
सावधानी: ‘अ’ उपसर्ग स्वर से शुरू होने वाले शब्द के आगे ‘अन्’ हो जाता है — अन् + उपयोगी = अनुपयोगी, अन् + आवश्यक = अनावश्यक
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