मल्हार अध्याय 4 आपकी बात

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) धरती की गुल्लक में जलराशि की कमी न हो इसके लिए आप क्या-क्या प्रयास कर सकते हैं, अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करके लिखिए।
उत्तर

इस प्रश्न में दो तरह के काम आने चाहिए — पानी बचाना (गुल्लक से कम निकालना) और पानी जमा करना (गुल्लक में ज्यादा डालना)। दोनों साथ चलें तभी बात बनेगी।

क्या करूँकैसेइससे क्या होगा
बूँद-बूँद बचानाब्रश करते और हाथ धोते समय नल बंद रखना; शॉवर की जगह बालटी से नहाना; टपकते नल तुरंत ठीक कराना।एक टपकता नल दिन भर में कई लीटर पानी बहा देता है — यह बचत सबसे आसान है।
पानी दोबारा काम में लेनासब्जी-चावल धोया पानी गमलों में डालना; कपड़े धोने का बचा पानी आँगन धोने में लगाना।एक ही पानी दो काम कर देता है।
वर्षा जल संग्रहणघर या विद्यालय की छत के पाइप को भंडारण टंकी से जोड़ना — “जल जहाँ गिरे वहीं एकत्र कीजिए।”वर्षा का पानी बहकर जाने के बजाय गुल्लक में जमा हो जाएगा।
तालाब-कुओं की रखवालीतालाब में कचरा न डालना, न डालने देना; सफाई के श्रमदान में भाग लेना; पुराने कुओं-बावड़ियों की सफाई में सहयोग करना।तालाब भरा रहेगा तो पानी रिसकर भूजल बढ़ाता रहेगा।
पेड़ लगानाघर, विद्यालय और सड़क के किनारे पौधे लगाना और उनकी देखभाल करना।पेड़ों की जड़ें वर्षा के पानी को रोककर जमीन में उतारती हैं और मिट्टी बहने नहीं देतीं।
मोटर का लालच छोड़नानल के पाइप में मोटर लगाकर दूसरों का पानी न खींचना।पाठ कहता है — “यह तो अपने आस-पास का हक छीनने जैसा काम है।”
दूसरों को बतानाकक्षा में पोस्टर, नारे और छोटी परिचर्चा; घर में माता-पिता से बात।अकेले की बचत छोटी होती है, मोहल्ले भर की बचत बड़ी।
याद रखने वाला सूत्र: गुल्लक भरने के दो ही तरीके हैं — कम खर्च करो और ज्यादा डालो। पानी के साथ भी ठीक यही नियम चलता है।
प्र2.
(ख) इस पाठ में एक छोटे से खंड में जल-चक्र की प्रक्रिया को प्रस्तुत किया गया है। उस खंड की पहचान करें और जल-चक्र को चित्र के माध्यम से प्रस्तुत करें।
उत्तर

जल-चक्र वाला खंड पाठ का सबसे पहला अनुच्छेद है (पृष्ठ 41)। उसकी पंक्तियाँ ये हैं —

“सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती, फिर बरसात की बूँदें और लो फिर बहती हुई एक नदी और उसके किनारे बसा तुम्हारा, हमारा घर, गाँव या शहर। चित्र के दूसरे भाग में यही नदी अपने चारों तरफ का पानी लेकर उसी समुद्र में मिलती दिखती है। … समुद्र से उठी भाप बादल बनकर पानी में बदलती है और फिर इन तीरों के सहारे जल की यात्रा एक तरफ से शुरू होकर समुद्र में वापिस मिल जाती है। जल-चक्र पूरा हो जाता है।

चित्र कैसे बनाएँ — कागज के बीच में एक चौड़ी पट्टी में समुद्र बनाइए, बाएँ ऊपर सूरज, ऊपर बीच में बादल, बाईं ओर पहाड़ और उससे निकलती नदी, नदी के किनारे घर-गाँव। फिर तीर लगाइए — यही चित्र की जान हैं —

  1. समुद्र से ऊपर की ओर तीर — लिखिए वाष्पीकरण (भाप बनना)
  2. भाप से बादल की ओर तीर — लिखिए संघनन (बादल बनना)
  3. बादल से धरती की ओर नीचे जाते तीर — लिखिए वर्षा
  4. पहाड़ से नदी होकर समुद्र तक तीर — लिखिए बहाव
  5. नदी से जमीन के नीचे जाता एक तीर — लिखिए रिसाव → भूजल भंडार
सूरज बादल वाष्पीकरण वर्षा पहाड़ समुद्र नदी गाँव रिसाव → भूजल भंडार
जल-चक्र का नमूना चित्र — सूरज, समुद्र, बादल, वर्षा, नदी और गाँव; तीर बताते हैं कि पानी किस दिशा में यात्रा कर रहा है।
अच्छे चित्र में क्या होना चाहिए: (1) हर भाग पर नाम लिखा हो, (2) तीरों की दिशा गोल घेरा पूरा करती हो, (3) कहीं यह भी दिखे कि पानी जमीन के नीचे उतरता है — क्योंकि पाठ का असली संदेश यही भूजल भंडार है।
प्र3.
(ग) अपने द्वारा बनाए गए जल-चक्र के चित्र का विवरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर

विवरण देते समय चित्र के हर भाग को क्रम से बताइए — कहाँ से शुरू, कहाँ होते हुए, कहाँ खत्म। नीचे एक नमूना विवरण दिया गया है, इसे अपने चित्र के अनुसार बदल लीजिए।

नमूना उत्तर: मेरे चित्र के दाईं ओर नीला समुद्र है और बाईं ओर ऊपर सूरज। सूरज की गर्मी से समुद्र का पानी भाप बनकर ऊपर उठ रहा है — यह मैंने ऊपर की ओर जाते घुमावदार तीर से दिखाया है और उस पर ‘वाष्पीकरण’ लिखा है। ऊपर जाकर यह भाप ठंडी होती है और बादल का रूप ले लेती है, जो मैंने आसमान के बीच में स्लेटी रंग से बनाया है। हवा इन बादलों को पहाड़ों की ओर ले जाती है। वहाँ बादल बरसते हैं — नीली सीधी रेखाओं से मैंने वर्षा दिखाई है। वर्षा का पानी पहाड़ से नीचे उतरकर नदी बन जाता है। नदी के किनारे मैंने एक छोटा-सा गाँव बनाया है, क्योंकि लोग हमेशा नदी के किनारे ही बसते हैं। नदी अंत में उसी समुद्र में जा मिलती है, जहाँ से पानी की यात्रा शुरू हुई थी — इस तरह चक्र पूरा हो जाता है। एक बैंगनी तीर मैंने नदी से नीचे जमीन की ओर भी बनाया है और लिखा है ‘रिसाव → भूजल भंडार’, क्योंकि पाठ के अनुसार तालाब और नदियों का पानी रिसकर ही धरती की गुल्लक भरता है और वही पानी हमें साल भर मिलता है।

विवरण में यह जरूर कहिए: जल-चक्र में पानी की मात्रा घटती-बढ़ती नहीं, केवल उसका रूप और जगह बदलती है। इसीलिए पानी को हम बना नहीं सकते — सिर्फ सँभाल सकते हैं।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ