इस प्रश्न में दो तरह के काम आने चाहिए — पानी बचाना (गुल्लक से कम निकालना) और पानी जमा करना (गुल्लक में ज्यादा डालना)। दोनों साथ चलें तभी बात बनेगी।
| क्या करूँ | कैसे | इससे क्या होगा |
|---|---|---|
| बूँद-बूँद बचाना | ब्रश करते और हाथ धोते समय नल बंद रखना; शॉवर की जगह बालटी से नहाना; टपकते नल तुरंत ठीक कराना। | एक टपकता नल दिन भर में कई लीटर पानी बहा देता है — यह बचत सबसे आसान है। |
| पानी दोबारा काम में लेना | सब्जी-चावल धोया पानी गमलों में डालना; कपड़े धोने का बचा पानी आँगन धोने में लगाना। | एक ही पानी दो काम कर देता है। |
| वर्षा जल संग्रहण | घर या विद्यालय की छत के पाइप को भंडारण टंकी से जोड़ना — “जल जहाँ गिरे वहीं एकत्र कीजिए।” | वर्षा का पानी बहकर जाने के बजाय गुल्लक में जमा हो जाएगा। |
| तालाब-कुओं की रखवाली | तालाब में कचरा न डालना, न डालने देना; सफाई के श्रमदान में भाग लेना; पुराने कुओं-बावड़ियों की सफाई में सहयोग करना। | तालाब भरा रहेगा तो पानी रिसकर भूजल बढ़ाता रहेगा। |
| पेड़ लगाना | घर, विद्यालय और सड़क के किनारे पौधे लगाना और उनकी देखभाल करना। | पेड़ों की जड़ें वर्षा के पानी को रोककर जमीन में उतारती हैं और मिट्टी बहने नहीं देतीं। |
| मोटर का लालच छोड़ना | नल के पाइप में मोटर लगाकर दूसरों का पानी न खींचना। | पाठ कहता है — “यह तो अपने आस-पास का हक छीनने जैसा काम है।” |
| दूसरों को बताना | कक्षा में पोस्टर, नारे और छोटी परिचर्चा; घर में माता-पिता से बात। | अकेले की बचत छोटी होती है, मोहल्ले भर की बचत बड़ी। |