भूजल स्तर तभी गिरता है जब निकाला ज्यादा जाए और भरा कम। दोनों तरफ के कारण नीचे दिए हैं —
| वर्ग | कारण | कैसे असर डालता है |
|---|---|---|
| भरना घट गया | तालाब, झील, बावड़ी और कुओं का पाटा जाना | पाठ का बताया मुख्य कारण — जो पानी रिसकर जमीन में जाता था, उसका रास्ता ही बंद हो गया। |
| भरना घट गया | सड़कों, आँगनों और गलियों का पूरी तरह पक्का (कंक्रीट) हो जाना | वर्षा का पानी जमीन में उतरने के बजाय नालियों से बहकर निकल जाता है। |
| भरना घट गया | पेड़ों और जंगलों की कटाई | जड़ें पानी को रोकती और धीरे-धीरे नीचे उतारती हैं; पेड़ न रहें तो पानी बहकर चला जाता है और मिट्टी भी कटती है। |
| भरना घट गया | नदी-नालों का सिकुड़ना और उन पर अतिक्रमण | पानी के फैलने और ठहरने की जगह ही नहीं बचती। |
| निकालना बढ़ गया | घर-घर बोरवेल और सबमर्सिबल पंप | पहले हाथ से जितना खींचा जाता था, अब मोटर उससे कई गुना खींच लेती है। |
| निकालना बढ़ गया | ज्यादा पानी माँगने वाली फसलें और खुली नाली से सिंचाई | बहुत-सा पानी वाष्प बनकर उड़ जाता है; टपक (ड्रिप) सिंचाई से यह बचता है। |
| निकालना बढ़ गया | बढ़ती आबादी, कारखाने और निर्माण कार्य | पाठ भी कहता है — “कार्यालय में, कारखानों और खेतों में पानी का कुछ अजीब-सा चक्कर सामने आने लगा है।” |
| बर्बादी | टूटे पाइप, टपकते नल और खुले छोड़े गए नल | निकाला हुआ पानी काम आए बिना ही बह जाता है। |
| गुणवत्ता | कचरे और गंदे पानी का जमीन में रिसना | भूजल की मात्रा भले रहे, वह पीने लायक नहीं रह जाता — यानी उपयोगी पानी और घट जाता है। |