मल्हार अध्याय 4 बिन पानी सब सून

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) पाठ में भूजल स्तर के कम होने के कुछ कारण बताए गए हैं, जैसे— तालाबों में कचरा फेंककर भरना आदि। भूजल स्तर कम होने के और क्या-क्या कारण हो सकते हैं? पता लगाइए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। (इसके लिए आप अपने सहपाठियों, शिक्षकों और घर के सदस्यों की सहायता भी ले सकते हैं।)
उत्तर

भूजल स्तर तभी गिरता है जब निकाला ज्यादा जाए और भरा कम। दोनों तरफ के कारण नीचे दिए हैं —

वर्गकारणकैसे असर डालता है
भरना घट गयातालाब, झील, बावड़ी और कुओं का पाटा जानापाठ का बताया मुख्य कारण — जो पानी रिसकर जमीन में जाता था, उसका रास्ता ही बंद हो गया।
भरना घट गयासड़कों, आँगनों और गलियों का पूरी तरह पक्का (कंक्रीट) हो जानावर्षा का पानी जमीन में उतरने के बजाय नालियों से बहकर निकल जाता है।
भरना घट गयापेड़ों और जंगलों की कटाईजड़ें पानी को रोकती और धीरे-धीरे नीचे उतारती हैं; पेड़ न रहें तो पानी बहकर चला जाता है और मिट्टी भी कटती है।
भरना घट गयानदी-नालों का सिकुड़ना और उन पर अतिक्रमणपानी के फैलने और ठहरने की जगह ही नहीं बचती।
निकालना बढ़ गयाघर-घर बोरवेल और सबमर्सिबल पंपपहले हाथ से जितना खींचा जाता था, अब मोटर उससे कई गुना खींच लेती है।
निकालना बढ़ गयाज्यादा पानी माँगने वाली फसलें और खुली नाली से सिंचाईबहुत-सा पानी वाष्प बनकर उड़ जाता है; टपक (ड्रिप) सिंचाई से यह बचता है।
निकालना बढ़ गयाबढ़ती आबादी, कारखाने और निर्माण कार्यपाठ भी कहता है — “कार्यालय में, कारखानों और खेतों में पानी का कुछ अजीब-सा चक्कर सामने आने लगा है।”
बर्बादीटूटे पाइप, टपकते नल और खुले छोड़े गए नलनिकाला हुआ पानी काम आए बिना ही बह जाता है।
गुणवत्ताकचरे और गंदे पानी का जमीन में रिसनाभूजल की मात्रा भले रहे, वह पीने लायक नहीं रह जाता — यानी उपयोगी पानी और घट जाता है।
प्रस्तुति कैसे करें: कक्षा में एक चार्ट बनाइए जिसके बीच में एक कुआँ हो — बाईं ओर “जो भरता था, वह रुक गया” और दाईं ओर “जो निकलता है, वह बढ़ गया”। हर तरफ तीन-चार कारण लिखिए। बात एक नजर में समझ आ जाएगी।
प्र2.
(ख) भूजल स्तर की कमी से हमें आजकल किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है?
उत्तर

भूजल घटने की मार रोज के जीवन पर कई तरफ से पड़ती है —

  • नल और हैंडपंप सूख जाते हैं। पाठ के शब्दों में — “नल खोलो तो उससे पानी के बदले सूँ-सूँ की आवाज आने लगती है।”
  • पानी बेवक्त और बहुत कम समय के लिए आता है, जिससे मीठी नींद छोड़कर बर्तन भरने पड़ते हैं।
  • पानी पर खर्च बढ़ जाता है। बोरवेल और गहरा करना पड़ता है, मोटर लगवानी पड़ती है और शहरों में तो “पानी भी बिकने लगा है।”
  • खेती चौपट होती है। सिंचाई का पानी न मिलने से फसल सूखती है और किसान कर्ज में डूबता है।
  • पानी को लेकर झगड़े बढ़ते हैं — पाठ में इसे “तू-तू, मैं-मैं” और “झगड़े-टंटे” कहा गया है।
  • समय और पढ़ाई का नुकसान। दूर से पानी ढोने में जो घंटे लगते हैं, वे बच्चों — खासकर लड़कियों — की पढ़ाई से कटते हैं।
  • बीमारियाँ बढ़ती हैं। कम और गंदा पानी मिलने पर सफाई घट जाती है, जिससे पेट की बीमारियाँ फैलती हैं। कुछ जगहों पर गहरे भूजल में फ्लोराइड या खारापन भी मिलने लगता है।
  • गाँव छोड़ना पड़ता है। लगातार पानी न मिलने पर परिवार शहरों की ओर पलायन करने लगते हैं।
जड़ की बात: ये सब अलग-अलग कठिनाइयाँ नहीं हैं — सबकी जड़ एक ही है। जब धरती की गुल्लक खाली हो जाए, तो हर जरूरत के लिए हाथ फैलाना पड़ता है।
प्र3.
(ग) आपके विद्यालय, गाँव या शहर के स्थानीय प्रशासन द्वारा भूजल स्तर बढ़ाने के लिए क्या-क्या प्रयास किए जा रहे हैं, पता लगाकर लिखिए।
उत्तर

यह पता लगाने का काम है। जानकारी इन जगहों से मिल सकती है — ग्राम पंचायत या नगरपालिका का कार्यालय, विद्यालय के प्रधानाचार्य, जल विभाग का कर्मचारी, स्थानीय समाचार पत्र और घर के बड़े।

पूछने के लिए प्रश्न: क्या यहाँ वर्षा जल संग्रहण अनिवार्य है? कितने सरकारी भवनों में यह लगा है? पुराने तालाबों-बावड़ियों की सफाई कब हुई? नए भवनों को नक्शा पास कराते समय क्या शर्त रहती है?

आमतौर पर किए जाने वाले प्रयास (अपने इलाके के अनुसार जाँचिए):

  • सरकारी भवनों, विद्यालयों और नए मकानों में छत के ऊपर वर्षा जल संग्रहण अनिवार्य करना।
  • पुराने तालाबों, कुओं और बावड़ियों की सफाई और गहरीकरण, और उनके किनारे अतिक्रमण हटाना।
  • नालों पर छोटे चेक डैम और खेतों में मेड़बंदी, ताकि पानी वहीं ठहरे।
  • सोख्ता गड्ढे (रिचार्ज पिट) बनवाना, जिनसे वर्षा का पानी सीधे जमीन में उतरे।
  • सड़क के किनारे और सार्वजनिक जगहों पर वृक्षारोपण
  • जल जागरूकता अभियान — रैली, नुक्कड़ नाटक, पोस्टर और विद्यालयों में जल-मित्र दल।
  • बिना अनुमति के बोरवेल पर रोक और पानी की चोरी/बर्बादी पर जुर्माना।

नमूना उत्तर: हमारे विद्यालय की छत पर पिछले वर्ष वर्षा जल संग्रहण की टंकी लगाई गई है, जिसका पानी बगीचे में काम आता है। नगरपालिका ने मोहल्ले के पुराने तालाब की सफाई कराई और उसके किनारे पेड़ लगवाए हैं। इसके अलावा नए मकानों का नक्शा पास कराते समय अब सोख्ता गड्ढा बनवाना अनिवार्य कर दिया गया है। पिछले जल सप्ताह में हमारी कक्षा ने भी पोस्टर बनाकर रैली में भाग लिया था।

प्रस्तुति के लिए: जो पता चले उसे तीन खानों में लिखिए — क्या हो रहा है, कितना असर दिखा, और क्या और होना चाहिए। तीसरा खाना ही आपकी अपनी राय है।
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