पहले देखिए और पूछिए — छतों से उतरते पाइप कहाँ जाकर खत्म होते हैं? आँगन में कोई सोख्ता गड्ढा है? मोहल्ले में कोई तालाब, बावड़ी या चेक डैम है?
यदि हाँ — विधि का विवरण कुछ इस तरह लिखिए (नमूना): हमारे विद्यालय में ‘छत के ऊपर वर्षा-जल संग्रहण’ की विधि अपनाई गई है। भवन की छत पर गिरने वाला वर्षा जल पाइपों से होकर पीछे बनी भंडारण टंकी में पहुँचता है। पाइप के मुँह पर एक जाली लगी है जो पत्ते और कचरा रोक लेती है। पहली बारिश का पानी छोड़ दिया जाता है, क्योंकि उसमें छत की मिट्टी और धूल मिली रहती है — पाठ में भी लिखा है कि “इसका उपयोग करने से पहले इसे स्वच्छ करना आवश्यक होता है।” इस पानी से बगीचे की सिंचाई और शौचालय की सफाई होती है, और टंकी भर जाने पर बचा पानी पास के सोख्ता गड्ढे में जाकर भूजल बढ़ाता है।
यदि नहीं — संपादक के नाम पत्र का नमूना:
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सेवा में, संपादक महोदय, दैनिक समाचार पत्र, (नगर का नाम) विषय — मुहल्ले में वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था कराने हेतु। महोदय, मैं आपके लोकप्रिय समाचार पत्र के माध्यम से नगर प्रशासन और मुहल्लेवासियों का ध्यान एक गंभीर समस्या की ओर दिलाना चाहता/चाहती हूँ। हमारे मुहल्ले में गर्मी आते ही नल सूखने लगते हैं और हैंडपंप से पानी के बदले सिर्फ हवा निकलती है। दूसरी ओर बरसात के दिनों में छतों और गलियों का सारा पानी नालियों से बहकर व्यर्थ चला जाता है, और कई बार गलियों में भर भी जाता है। यदि भवनों की छतों का पानी पाइप द्वारा भंडारण टंकी या सोख्ता गड्ढे तक पहुँचा दिया जाए, तो यही पानी जमीन में उतरकर हमारा भूजल भंडार बढ़ा सकता है। इस विधि को ‘छत के ऊपर वर्षा-जल संग्रहण’ कहते हैं और यह खर्च में कम तथा लाभ में बहुत अधिक है। अत: आपसे निवेदन है कि इस विषय को अपने पत्र में स्थान देकर प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करें, जिससे हमारे मुहल्ले में भी वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था हो सके। धन्यवाद। भवदीय/भवदीया, (अपना नाम) कक्षा 7, (विद्यालय का नाम) (पता) दिनांक — ………… |