प्र1.
पानी से संबंधित गीत या कविताओं का संकलन कीजिए और इनमें से कुछ को अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। इसके लिए आप अपने परिजनों एवं शिक्षक अथवा पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर
यह संकलन का काम है। इसे इस तरह कीजिए —
- तीन स्रोतों से इकट्ठा कीजिए — (क) घर के बड़े: दादी-नानी से बरसात के लोकगीत, मल्हार और कजरी जैसे वर्षा-गीत पूछिए; (ख) पुस्तकालय: हिंदी की कविता-पुस्तकें और पत्रिकाएँ; (ग) शिक्षक और इंटरनेट।
- एक कॉपी में ‘जल-संकलन’ बनाइए — हर पृष्ठ पर रचना, नीचे रचनाकार का नाम और स्रोत, और एक-दो पंक्ति में यह कि वह रचना आपको क्यों अच्छी लगी।
- प्रस्तुति — दो-तीन रचनाएँ चुनकर कक्षा में सस्वर पाठ या समूह-गान कीजिए। यदि लोकगीत हो तो ताली या ढोलक की लय के साथ और भी अच्छा लगेगा।
संकलन में ये पंक्तियाँ शामिल की जा सकती हैं (नमूना):
| रचना / पंक्ति | रचनाकार या रूप | क्यों चुनी |
|---|---|---|
| “रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।” | रहीम (दोहा) | ‘पानी’ शब्द के तीन अर्थ एक साथ — जल, चमक और मान-मर्यादा। इसी पाठ के एक शीर्षक में भी यही पंक्ति है। |
| “सिमिट-सिमिट जल भरहिं तलावा” | तुलसीदास (रामचरितमानस) | पुस्तक में ‘झरोखे से’ वाले पृष्ठ पर यही पंक्ति चित्र के साथ छपी है — बूँद-बूँद से तालाब भरने की बात। |
| बरसात के लोकगीत — कजरी, मल्हार, सावन के झूला-गीत | लोक-परंपरा | वर्षा को उत्सव की तरह देखने वाले गीत; पुस्तक का नाम मल्हार भी वर्षा-राग पर ही है। |
| “मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के” | सर्वेश्वरदयाल सक्सेना | बादलों का मानवीकरण — मेहमान की तरह आते मेघ। |
| “बादल गरजो!” | निराला | वर्षा में शक्ति और नई शुरुआत का भाव। |
सुझाव: संकलन के अंत में एक पृष्ठ अपनी लिखी हुई चार पंक्तियों के लिए भी रखिए। जो शब्द आपने ‘आज की पहेली’ में सीखे — नीर, वारि, सलिल, तटिनी — उन्हें अपनी कविता में प्रयोग कीजिए।