मल्हार अध्याय 3 बड़प्पन

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
‘बड़प्पन’ शब्द ‘बड़ा’ और ‘पन’ से मिलकर बना है। इसका अर्थ होता है — बड़ाई, श्रेष्ठ या बड़ा होने का भाव, महत्व, गौरव। इसका उपयोग मुख्य रूप से व्यक्तित्व, गुण और चरित्र की ऊँचाई या महानता बताने के लिए किया जाता है, जैसे — उनकी सादगी और बड़प्पन ने सबका मन जीत लिया। • नीचे कुछ शब्द दिए गए हैं जो किसी भाव को व्यक्त करते हैं। इनमें से जो शब्द ‘बड़प्पन’ के भाव व्यक्त करते हैं, उन पर एक गोला बनाइए, जो बड़प्पन का भाव व्यक्त नहीं करते हैं, उनके नीचे रेखा खींचिए। (सहनशीलता, दया, अहंकार, विश्वास, घमंड, ईर्ष्या, द्वेष, प्रतिशोध, क्रूरता, उदारता, विनम्रता, त्याग, संतोष, समर्पण, आदर, सम्मान, निष्ठा, परोपकार, सद्भावना, स्वार्थ, अपमान, अविश्वास, झूठ, अधीरता, लालच, झगड़ालूपन)
उत्तर

गोला बनाइए (बड़प्पन का भाव) — 13 शब्द: सहनशीलता, दया, विश्वास, उदारता, विनम्रता, त्याग, संतोष, समर्पण, आदर, सम्मान, निष्ठा, परोपकार, सद्भावना।

नीचे रेखा खींचिए (बड़प्पन का भाव नहीं) — 13 शब्द: अहंकार, घमंड, ईर्ष्या, द्वेष, प्रतिशोध, क्रूरता, स्वार्थ, अपमान, अविश्वास, झूठ, अधीरता, लालच, झगड़ालूपन।

शब्दगोला / रेखाअर्थ और कारण
सहनशीलतागोलासह लेने की शक्ति — बड़ा व्यक्ति छोटी बातों पर बिगड़ता नहीं।
दयागोलादूसरों का दुख देखकर पिघल जाना।
अहंकाररेखास्वयं को सबसे बड़ा समझना — यह बड़प्पन का उलटा है।
विश्वासगोलादूसरों पर भरोसा करना; भरोसा वही करता है जिसका मन बड़ा हो।
घमंडरेखाअहंकार का ही दूसरा रूप।
ईर्ष्यारेखादूसरे की उन्नति से जलन।
द्वेषरेखामन में बैर पाल लेना।
प्रतिशोधरेखाबदला लेने की भावना; बड़प्पन क्षमा में है, बदले में नहीं।
क्रूरतारेखानिर्दयता — जैसे काँटे का चुभना।
उदारतागोलाखुले मन से देना।
विनम्रतागोलाझुककर बात करना; बड़ा होकर भी छोटा बने रहना।
त्यागगोलाअपना छोड़कर दूसरे को देना।
संतोषगोलाजो है उसी में सुखी रहना।
समर्पणगोलापूरे मन से किसी काम या व्यक्ति को सौंप देना।
आदरगोलादूसरों को मान देना।
सम्मानगोलाप्रतिष्ठा देना और पाना।
निष्ठागोलाअपने कर्तव्य पर टिके रहना।
परोपकारगोलादूसरों का भला करना — कविता का ‘फूल’ यही है।
सद्भावनागोलासबके प्रति अच्छी भावना रखना।
स्वार्थरेखाकेवल अपना हित देखना।
अपमानरेखादूसरे को नीचा दिखाना।
अविश्वासरेखाबिना कारण शक करना।
झूठरेखासच छिपाना — चरित्र की सबसे बड़ी कसर।
अधीरतारेखाधैर्य न रखना।
लालचरेखाऔर-और पाने की भूख।
झगड़ालूपनरेखाबात-बात पर झगड़ना।
पहचानने का सरल नियम: जो भाव दूसरों को कुछ देता है (दया, त्याग, आदर, परोपकार) वह बड़प्पन है; जो भाव दूसरों से कुछ छीनता है या उन्हें छोटा दिखाता है (अहंकार, ईर्ष्या, लालच, अपमान) वह बड़प्पन नहीं है।
शब्द-रचना देखिए: बड़ा + पन = बड़प्पन। इसी तरह — अपना + पन = अपनापन, लड़का + पन = लड़कपन, पागल + पन = पागलपन, बच्चा + पन = बचपन। ‘पन’ प्रत्यय संज्ञा बनाकर ‘होने का भाव’ बताता है।
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