प्र1.
“फूल लेकर तितलियों को गोद में, भौंर को अपना अनूठा रस पिला। निज सुगंधों औ निराले रंग से, है सदा देता कली का जी खिला।” इस पंक्ति में रेखांकित शब्द पर ध्यान दीजिए। क्या आपने इस शब्द को पहले कहीं पढ़ा है? यह शब्द है— ‘और’। कविता में ‘र’ वर्ण नहीं लिखा गया है। कई बार बोलते हुए हम शब्द की अंतिम ध्वनि उच्चरित नहीं करते हैं। कवि भी कविता की लय के अनुसार ऐसा प्रयोग करते हैं। इस कविता में ऐसी अनेक विशेषताएँ छिपी हैं, जैसे— ‘प्यार में डूबी तितलियों’ के स्थान पर ‘प्यार-डूबी तितलियों’ का प्रयोग किया गया है। हर दूसरी पंक्ति का अंतिम शब्द मिलती-जुलती ध्वनि वाला यानी ‘तुकांत’ है आदि। (क) अपने समूह के साथ मिलकर इन विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर
पुस्तक ने तीन उदाहरण स्वयं दे दिए हैं — ‘और’ के स्थान पर ‘औ’, ‘प्यार में डूबी’ के स्थान पर ‘प्यार-डूबी’, और तुकांत। इसी तरह की और विशेषताएँ ढूँढ़कर सूची बनानी है। एक अच्छी सूची इस प्रकार बन सकती है —
| क्रम | विशेषता | कविता से उदाहरण |
|---|---|---|
| 1 | शब्द की अंतिम ध्वनि छोड़ देना — लय साधने के लिए | ‘और’ → औ (“निज सुगंधों औ निराले रंग से”) |
| 2 | शब्दों को जोड़कर छोटा कर देना (समास जैसा प्रयोग) | ‘प्यार में डूबी’ → प्यार-डूबी तितलियों |
| 3 | तुकांत — हर दूसरी पंक्ति का अंतिम शब्द मिलती-जुलती ध्वनि का | पालता–डालता, बही–नहीं, बसन–तन, पिला–खिला, शीश पर–कसर |
| 4 | अनुप्रास — एक ही वर्ण से शुरू होने वाले शब्द पास-पास | “सोहता सुर शीश पर”, “किस तरह कुल की” |
| 5 | मानवीकरण — पौधे, फूल और काँटे मनुष्य की तरह काम करते हैं | फूल “गोद में” लेता है, “रस पिला” देता है, पौधा “पालता” है |
| 6 | विपरीत अर्थ वाले चित्रों का जोड़ा | खटकता ↔ सोहता; छेदना-फाड़ना ↔ गोद लेना-रस पिलाना |
| 7 | मुहावरे का प्रयोग | “आँख में खटकना”, “जी खिलाना” |
| 8 | प्रश्न के रूप में बात कहना (प्रश्न-शैली) | “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे” |
| 9 | पुराने/काव्य-रूप वाले शब्द | मेह, बसन, सुर, हवायें, जनम, भौंर |
| 10 | प्रतीक — फूल और काँटा दो स्वभावों के प्रतीक | पूरी कविता |
साझा करते समय: हर विशेषता के आगे कविता की पंक्ति ज़रूर पढ़िए। बिना उदाहरण के कही गई विशेषता आधी बात रह जाती है।