मल्हार अध्याय 3 कविता की रचना

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“फूल लेकर तितलियों को गोद में, भौंर को अपना अनूठा रस पिला। निज सुगंधों औ निराले रंग से, है सदा देता कली का जी खिला।” इस पंक्ति में रेखांकित शब्द पर ध्यान दीजिए। क्या आपने इस शब्द को पहले कहीं पढ़ा है? यह शब्द है— ‘और’। कविता में ‘र’ वर्ण नहीं लिखा गया है। कई बार बोलते हुए हम शब्द की अंतिम ध्वनि उच्चरित नहीं करते हैं। कवि भी कविता की लय के अनुसार ऐसा प्रयोग करते हैं। इस कविता में ऐसी अनेक विशेषताएँ छिपी हैं, जैसे— ‘प्यार में डूबी तितलियों’ के स्थान पर ‘प्यार-डूबी तितलियों’ का प्रयोग किया गया है। हर दूसरी पंक्ति का अंतिम शब्द मिलती-जुलती ध्वनि वाला यानी ‘तुकांत’ है आदि। (क) अपने समूह के साथ मिलकर इन विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर

पुस्तक ने तीन उदाहरण स्वयं दे दिए हैं — ‘और’ के स्थान पर ‘औ’, ‘प्यार में डूबी’ के स्थान पर ‘प्यार-डूबी’, और तुकांत। इसी तरह की और विशेषताएँ ढूँढ़कर सूची बनानी है। एक अच्छी सूची इस प्रकार बन सकती है —

क्रमविशेषताकविता से उदाहरण
1शब्द की अंतिम ध्वनि छोड़ देना — लय साधने के लिए‘और’ → (“निज सुगंधों औ निराले रंग से”)
2शब्दों को जोड़कर छोटा कर देना (समास जैसा प्रयोग)‘प्यार में डूबी’ → प्यार-डूबी तितलियों
3तुकांत — हर दूसरी पंक्ति का अंतिम शब्द मिलती-जुलती ध्वनि कापालता–डालता, बही–नहीं, बसन–तन, पिला–खिला, शीश पर–कसर
4अनुप्रास — एक ही वर्ण से शुरू होने वाले शब्द पास-पासोहता सुशीश पर”, “िस तरह कुी”
5मानवीकरण — पौधे, फूल और काँटे मनुष्य की तरह काम करते हैंफूल “गोद में” लेता है, “रस पिला” देता है, पौधा “पालता” है
6विपरीत अर्थ वाले चित्रों का जोड़ाखटकता ↔ सोहता; छेदना-फाड़ना ↔ गोद लेना-रस पिलाना
7मुहावरे का प्रयोग“आँख में खटकना”, “जी खिलाना”
8प्रश्न के रूप में बात कहना (प्रश्न-शैली)“किस तरह कुल की बड़ाई काम दे”
9पुराने/काव्य-रूप वाले शब्दमेह, बसन, सुर, हवायें, जनम, भौंर
10प्रतीक — फूल और काँटा दो स्वभावों के प्रतीकपूरी कविता
साझा करते समय: हर विशेषता के आगे कविता की पंक्ति ज़रूर पढ़िए। बिना उदाहरण के कही गई विशेषता आधी बात रह जाती है।
प्र2.
(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए। आप कविता की पंक्तियों में एक से अधिक विशेषताएँ भी ढूँढ़ सकते हैं। कविता की विशेषताएँ — 1. एक ही वर्ण से शुरू होने वाले दो शब्द एक ही पंक्ति में साथ-साथ आए हैं। 2. मुहावरे का प्रयोग किया गया है। 3. प्रश्न पूछा गया है। 4. प्राकृतिक वस्तुओं, जैसे— पेड़-पौधों में मानवीय कार्यों और भावनाओं का वर्णन किया गया है। 5. एक-दूसरे के विपरीत अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग किया गया है। कविता की पंक्तियाँ — 1. किस तरह कुल की बड़ाई काम दे 2. भौंर को अपना अनूठा रस पिला 3. फाड़ देता है किसी का वर बसन 4. है खटकता एक सब की आँख में, दूसरा है सोहता सुर शीश पर 5. है सदा देता कली का जी खिला 6. फूल लेकर तितलियों को गोद में
उत्तर

मिलान इस प्रकार होगा (एक पंक्ति में एक से अधिक विशेषताएँ भी मिल सकती हैं) —

विशेषतापंक्तिकैसे
1. एक ही वर्ण से शुरू होने वाले दो शब्द साथ-साथ (अनुप्रास)4 — “है खटकता एक सब की आँख में, दूसरा है सोहता सुशीश पर”
और 1 — “किस तरह कुकी बड़ाई काम दे”
‘सोहता–सुर–शीश’ में ‘स/श’ की आवृत्ति; पंक्ति 1 में ‘क’ की आवृत्ति।
2. मुहावरे का प्रयोग4 — “है खटकता एक सब की आँख में”
और 5 — “है सदा देता कली का जी खिला”
आँख में खटकना = बुरा लगना; जी खिलाना = मन प्रसन्न कर देना। दोनों मुहावरे हैं।
3. प्रश्न पूछा गया है1 — “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे”यह कथन नहीं, प्रश्न है — और इसी प्रश्न में कविता का संदेश छिपा है।
4. पेड़-पौधों में मानवीय कार्यों और भावनाओं का वर्णन (मानवीकरण)6 — “फूल लेकर तितलियों को गोद में”
और 2 — “भौंर को अपना अनूठा रस पिला”
और 5 — “है सदा देता कली का जी खिला”
गोद में लेना, पिलाना, किसी का जी खिलाना — ये सब मनुष्य के काम हैं, जो यहाँ फूल कर रहा है।
5. एक-दूसरे के विपरीत अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग4 — “है खटकता एक सब की आँख में, दूसरा है सोहता सुर शीश पर”खटकना ↔ सोहना — बुरा लगना और भला लगना; साथ ही ‘एक ↔ दूसरा’ भी विरोध बनाता है।

बची हुई पंक्ति 3 — “फाड़ देता है किसी का वर बसन” — काँटे की क्रूरता का चित्र है। इसमें भी मानवीकरण है, क्योंकि फाड़ना एक मानवीय क्रिया है।

पंक्ति 4 सबसे भरी हुई क्यों है: इस एक ही पंक्ति में अनुप्रास, मुहावरा और विलोम — तीनों विशेषताएँ एक साथ हैं। इसीलिए यह कविता की सबसे अधिक उद्धृत की जाने वाली पंक्ति है।
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