यदि प्रकृति भेदभाव करने लगे तो केवल एक पौधा हरा-भरा रहेगा और शेष सारे पौधे मुरझा जाएँगे।
बाकी पौधे कैसे दिखेंगे —
- पत्ते पीले पड़कर सूखने और झड़ने लगेंगे; टहनियाँ भूरी और भंगुर हो जाएँगी।
- न कोई कली फूटेगी, न फूल खिलेंगे, न फल लगेंगे।
- जड़ें सूखी मिट्टी में सिकुड़ जाएँगी और पौधे झुककर गिर पड़ेंगे।
उनके जीवन पर प्रभाव —
| किसके बिना | क्या होगा |
|---|---|
| मेघ (वर्षा) के बिना | जल न मिलने से पौधा भोजन नहीं बना पाएगा और सूख जाएगा। |
| हवा के बिना | साँस लेने और भोजन बनाने की क्रिया रुक जाएगी; परागण न होने से बीज नहीं बनेंगे। |
| चाँदनी और चाँद के बिना | रात-दिन का चक्र बिगड़ जाएगा; फूलों का खिलना-मुरझाना अस्त-व्यस्त हो जाएगा। |
इसका असर केवल पौधों तक नहीं रुकेगा। तितलियाँ और भौंरे भूखे रह जाएँगे, पक्षियों के घोंसले उजड़ जाएँगे, और अंत में मनुष्य को भी अनाज, फल और छाया नहीं मिलेगी।