मल्हार अध्याय 2 मेरी समझ से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) लोककथा के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (1) लोककथा में पिता ने अपने बेटों से ‘धन संचय करने’ को कहा। उनकी इस बात का क्या अर्थ हो सकता है? • खेती-बारी करना और धन इकट्ठा करना • पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करना • ऊँट का व्यापार करना • गाँव छोड़कर किसी नगर में जाकर बसना
उत्तर

सटीक उत्तर है — पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करना। इसी विकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।

विकल्पसही / ग़लतकारण
खेती-बारी करना और धन इकट्ठा करनाग़लतपिता ने साफ़ कहा — “हमारे पास न तो रुपया-पैसा है और न ही सोना-चाँदी।” वे रुपया जोड़ने की नहीं, दूसरे प्रकार के धन की बात कर रहे थे।
पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करनासही ★पिता के अपने शब्द हैं — “रुपये-पैसे के स्थान पर तुम्हारे पास पैनी दृष्टि होगी और सोने-चाँदी के स्थान पर तीव्र बुद्धि होगी।”
ऊँट का व्यापार करनाग़लतऊँट कथा में बहुत बाद में आता है और वह भी दूसरे व्यक्ति का है। पिता की सलाह से इसका कोई संबंध नहीं।
गाँव छोड़कर किसी नगर में जाकर बसनाग़लतनगर जाने का निर्णय बेटों ने पिता की मृत्यु के बाद स्वयं लिया — “आओ, घूम फिरकर जगत देखें।” यह पिता की सलाह नहीं थी।
क्यों: पिता जानता था कि वह बेटों को संपत्ति नहीं दे सकता। इसलिए उसने वह पूँजी देनी चाही जो कभी चोरी नहीं होती और ख़र्च करने पर घटती नहीं — ध्यान से देखने की आदत और सोचने की शक्ति। पूरी कथा इसी बात को सिद्ध करती है।
प्र2.
(2) तीनों भाइयों ने अपने ज्ञान और बुद्धि का उपयोग करके ऊँट के बारे में बहुत-कुछ बता दिया। इससे क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है? • बुद्धि का प्रयोग करके ऊँट के बारे में सब-कुछ बताया जा सकता है। • समस्या को सुलझाने के लिए ध्यान से निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है। • किसी व्यक्ति का ज्ञान, बुद्धि और धन ही सबसे बड़ी ताकत है। • ऊँट के बारे में जानने के लिए दूसरों पर भरोसा करना चाहिए।
उत्तर

सटीक उत्तर है — समस्या को सुलझाने के लिए ध्यान से निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है। इसके सामने तारा (★) बनाइए।

विकल्पसही / ग़लतकारण
बुद्धि का प्रयोग करके ऊँट के बारे में सब-कुछ बताया जा सकता है।ग़लतअकेली बुद्धि काफ़ी नहीं थी। भाइयों ने पहले देखा — पैरों के चिह्न, चरी हुई घास, जूतों के निशान — तब सोचा। बिना देखे बुद्धि के पास सोचने के लिए कुछ नहीं होता।
समस्या को सुलझाने के लिए ध्यान से निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है।सही ★भाइयों ने स्वयं कहा — “बचपन से ही हमें ऐसी आदत पड़ गई है कि हम कुछ भी अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते।” निरीक्षण ही उनके हर अनुमान की जड़ है।
किसी व्यक्ति का ज्ञान, बुद्धि और धन ही सबसे बड़ी ताकत है।ग़लतकथा तो यह कहती है कि भाइयों के पास धन था ही नहीं — “धन-संपत्ति … की दृष्टि से तो तुम धनवान नहीं हो।” ‘धन’ जोड़ते ही यह वाक्य पाठ के विरुद्ध हो जाता है।
ऊँट के बारे में जानने के लिए दूसरों पर भरोसा करना चाहिए।ग़लतभाइयों ने किसी से कुछ पूछा ही नहीं। उन्होंने ऊँट देखा तक नहीं था — सब कुछ स्वयं अपने अवलोकन से जाना।
ध्यान दीजिए: निरीक्षण (देखना) और अनुमान (सोचना) दो अलग-अलग चरण हैं। भाइयों ने चिह्न देखे — यह निरीक्षण; फिर उनसे यह निकाला कि ऊँट बड़ा था — यह अनुमान।
प्र3.
(3) राजा ने भाइयों की बुद्धिमत्ता पर विश्वास क्यों किया? • भाइयों ने अपनी बात को तर्क के साथ समझाया। • राजा को ऊँट के स्वामी की बातों पर संदेह था। • राजा ने स्वयं ऊँट और पेटी की जाँच कर ली थी। • भाइयों ने राजा को अपनी बात में उलझा लिया था।
उत्तर

सटीक उत्तर है — भाइयों ने अपनी बात को तर्क के साथ समझाया। इसके सामने तारा (★) बनाइए।

विकल्पसही / ग़लतकारण
भाइयों ने अपनी बात को तर्क के साथ समझाया।सही ★राजा के हर प्रश्न पर भाइयों ने प्रमाण दिया — “धूल पर उसके पैरों के चिह्नों से”, “सड़क के दायीं ओर की घास तो ऊँट ने चरी थी, मगर बायीं ओर की घास ज्यों की त्यों थी”, “मुझे उसके अंदर किसी छोटी-सी गोल वस्तु के लुढ़कने की ध्वनि सुनाई दी।” तर्क सुनकर ही राजा का संदेह मिटा।
राजा को ऊँट के स्वामी की बातों पर संदेह था।ग़लतआरंभ में राजा ने स्वामी की ही बात मानी थी — “अवश्य उन्होंने उसे चुराया होगा। जाओ, उन चोरों को यहाँ लाओ।”
राजा ने स्वयं ऊँट और पेटी की जाँच कर ली थी।आधा सहीपेटी की जाँच राजा ने अवश्य की — उसने पेटी खुलवाकर कच्चा अनार निकालकर सबको दिखाया। पर ऊँट तो राजा ने देखा ही नहीं; ऊँट अंत तक खोया ही रहा। इसलिए यह विकल्प पूरी तरह सही नहीं है।
भाइयों ने राजा को अपनी बात में उलझा लिया था।ग़लतभाइयों ने कोई चालाकी नहीं की। उन्होंने खुलकर, सरल भाषा में कारण बताए और पेटी वाली परीक्षा में उनकी बात प्रमाणित भी हो गई।
क्यों: राजा बुद्धिमान था — उसने केवल आरोप पर भरोसा नहीं किया, परीक्षा ली। परीक्षा में भाइयों की बात सच निकली और उन्होंने अपने तर्क भी बता दिए। इसी दोहरे प्रमाण से राजा को विश्वास हुआ।
प्र4.
(4) लोककथा के पात्रों और घटनाओं के आधार पर, राजा के निर्णय के पीछे कौन-सा मूल्य छिपा है? • दोषी को कड़ा से कड़ा दंड देना हर समस्या का सबसे बड़ा समाधान है। • अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए। • राजा की प्रत्येक बात और निर्णय को सदा सही माना जाना चाहिए। • ऊँट की चोरी के निर्णय के लिए सेवक की बुद्धि का उपयोग करना चाहिए।
उत्तर

सटीक उत्तर है — अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए। इसके सामने तारा (★) बनाइए।

विकल्पसही / ग़लतकारण
दोषी को कड़ा से कड़ा दंड देना हर समस्या का सबसे बड़ा समाधान है।ग़लतराजा ने किसी को दंड दिया ही नहीं। कथा दंड की नहीं, सच्चाई परखने की है।
अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए।सही ★राजा ने पहले संदेह किया, पर तुरंत सज़ा नहीं सुनाई — उसने पेटी मँगवाकर परीक्षा ली और तब कहा — “इन लोगों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ये चोर नहीं हैं।”
राजा की प्रत्येक बात और निर्णय को सदा सही माना जाना चाहिए।ग़लतराजा का पहला निर्णय (“अवश्य उन्होंने उसे चुराया होगा”) ग़लत ही था। कथा यही दिखाती है कि राजा को भी अपना मत बदलना पड़ा।
ऊँट की चोरी के निर्णय के लिए सेवक की बुद्धि का उपयोग करना चाहिए।ग़लतसेवक केवल पेटी लाए और खोली। निर्णय राजा ने स्वयं, भाइयों के तर्क सुनकर लिया।
जोड़ने योग्य बात: इसी से एक दूसरा मूल्य भी निकलता है — न्याय का आधार प्रमाण है, आरोप नहीं। ऊँट के स्वामी के पास केवल शक था, प्रमाण नहीं।
प्र5.
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने भिन्न-भिन्न उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने।
उत्तर

यह चर्चा का काम है। इसका उद्देश्य ‘सही उत्तर’ ढूँढ़ना नहीं, बल्कि यह बताना है कि आपने वही उत्तर क्यों चुना — यानी अपने चुनाव के पीछे का प्रमाण पाठ में से दिखाना।

चर्चा कैसे कीजिए:

  1. बारी-बारी से हर साथी अपना चुना हुआ विकल्प पढ़े।
  2. फिर वह पाठ की एक पंक्ति बताए जिससे उसका उत्तर सिद्ध होता है।
  3. यदि दो साथियों के उत्तर अलग हैं तो देखिए — किसका प्रमाण पाठ के अधिक निकट है?
  4. अंत में लिखिए कि चर्चा के बाद आपका मत बदला या नहीं, और क्यों।
प्रश्नहमारे समूह का उत्तरप्रमाण जो हमने दिया
(1) ‘धन संचय’ का अर्थपैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास“रुपये-पैसे के स्थान पर तुम्हारे पास पैनी दृष्टि होगी…”
(2) निष्कर्षध्यान से निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है“हम कुछ भी अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते।”
(3) राजा का विश्वासभाइयों ने तर्क के साथ समझाया“दायीं ओर की घास तो ऊँट ने चरी थी, मगर बायीं ओर की घास ज्यों की त्यों थी।”
(4) छिपा मूल्यजाँच किए बिना किसी को दोषी न ठहरानाराजा का पेटी वाली परीक्षा लेना।
चर्चा का लाभ: जब आप कारण बताते हैं तो उत्तर याद रखने की ज़रूरत नहीं पड़ती — वह समझ में बदल जाता है। और यदि किसी साथी का प्रमाण आपसे अच्छा है तो अपना मत बदल लेना कमज़ोरी नहीं, समझदारी है — ठीक वैसे ही जैसे कथा में राजा ने अपना मत बदला।
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