मल्हार अध्याय 2 ध्यान से देखना-सुनना-अनुभव करना

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) ‘हाँ’ या ‘नहीं’ प्रश्न-उत्तर खेल — चरण— 1. एक विद्यार्थी कक्षा से बाहर जाकर दिखाई देने वाली किसी एक वस्तु या स्थान का नाम चुनेगा। कक्षा के भीतर से भी कोई नाम चुना जा सकता है। 2. विद्यार्थी वापस कक्षा में आएगा और उस नाम को एक कागज पर लिख लेगा। लेकिन ध्यान रहे, वह कागज पर लिखे नाम को किसी को न दिखाए। 3. अन्य विद्यार्थी बारी-बारी से उस वस्तु का नाम पता करने के लिए प्रश्न पूछेंगे। 4. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर केवल ‘हाँ’ या ‘नहीं’ में दिया जाएगा। उदाहरण के लिए— • क्या इस वस्तु का उपयोग कक्षा में होता है? • क्या यह खाने-पीने की चीज है? • क्या यह लकड़ी से बनी है? • क्या यह बिजली से चलती है? 5. सभी विद्यार्थी अधिकतम 20 प्रश्न ही पूछ सकते हैं। … 8. गतिविधि के अंत में सभी मिलकर इस खेल से जुड़े अपने अनुभवों के बारे में चर्चा करें।
उत्तर

यह कक्षा में खेला जाने वाला खेल है। जीतने की कुंजी यह है कि 20 प्रश्न बहुत कम हैं, इसलिए ऐसे प्रश्न पूछिए जो हर बार संभावनाओं को आधा कर दें। एक-एक वस्तु का नाम लेकर पूछना (“क्या यह डस्टर है?”) सबसे ख़राब रणनीति है।

प्रश्नों का सही क्रम — चौड़े से सँकरे की ओर:

  1. स्थान: क्या वह वस्तु कक्षा के भीतर है?
  2. जीवित/निर्जीव: क्या वह सजीव है?
  3. आकार: क्या वह आपके बस्ते में आ सकती है?
  4. पदार्थ: क्या वह लकड़ी की बनी है? / क्या वह धातु की है?
  5. उपयोग: क्या उसका उपयोग पढ़ने-लिखने में होता है?
  6. बिजली: क्या वह बिजली से चलती है?
  7. रंग/स्थिति: क्या वह दीवार पर लगी है?
  8. अब बचे हुए दो-तीन नामों में से सीधे पूछिए — “क्या यह घड़ी है?”
क्रमप्रश्नउत्तरक्या बचा
1क्या वह कक्षा के भीतर है?हाँबाहर की सब चीज़ें हट गईं
2क्या वह सजीव है?नहींकेवल निर्जीव वस्तुएँ
3क्या वह बस्ते में आ सकती है?नहींबड़ी वस्तुएँ — मेज़, कुर्सी, बोर्ड, पंखा, घड़ी…
4क्या वह बिजली से चलती है?हाँपंखा, बल्ब, घड़ी
5क्या वह छत पर लगी है?नहींघड़ी (दीवार पर)
6क्या यह घड़ी है?हाँ — जीत!केवल 6 प्रश्नों में
इसका पाठ से क्या संबंध है: यही तो तीनों भाइयों ने किया था। उन्होंने एक-एक करके संभावनाएँ घटाईं — बड़े पैरों के चिह्न यानी बड़ा ऊँट; एक ओर की चरी घास यानी एक आँख से न देखना; घुटनों के निशान और जूतों के निशान यानी सवार उतरे थे। हर अवलोकन ने उत्तर को थोड़ा और सँकरा किया।
चर्चा के लिए (चरण 8): खेल के बाद पूछिए — कौन-सा प्रश्न सबसे अधिक काम आया? किस प्रश्न से कुछ भी पता नहीं चला और क्यों? (सामान्यत: वे प्रश्न बेकार जाते हैं जिनका उत्तर पहले ही मालूम था।)
प्र2.
(ख) गतिविधि— ‘स्पर्श, गंध और स्वाद से पहचानना’ — 1. एक थैले या डिब्बे में (सावधानीपूर्वक एवं सुरक्षित) विभिन्न वस्तुएँ (जैसे— फल, फूल, मसाले, खिलौने, कपड़े, किताब, गुड़ आदि) रखें। 2. विद्यार्थियों को आँखों पर पट्टी बाँधकर केवल स्पर्श, गंध या स्वाद का उपयोग करके वस्तु की पहचान करनी होगी और उसका नाम बताना होगा। … 7. अंत में सभी वस्तुओं को कक्षा में दिखाएँ और उनके बारे में चर्चा करें कि किस वस्तु को पहचानना आसान या कठिन लगा।
उत्तर

यह गतिविधि सिखाती है कि ज्ञान केवल आँख से नहीं आता। ज्ञानेंद्रियाँ पाँच हैं — आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा। यहाँ आँख बंद है, इसलिए बाक़ी चार को काम करना पड़ता है।

वस्तुकिस इंद्रिय से पहचानीपहचान का संकेत
इलायची / लौंगनाक (गंध)तेज़ सुगंध — छूने से पहले ही पहचान में आ जाती है
गुड़जीभ (स्वाद), त्वचा (चिपचिपाहट)मीठा, थोड़ा चिपचिपा और दानेदार
नींबूत्वचा + नाकखुरदुरा छिलका और खट्टी ताज़ा गंध
कपड़ात्वचा (स्पर्श)मुलायम, लचीला, मोड़ा जा सकता है
किताबत्वचा + कानसख़्त किनारे और पन्ने पलटने की खड़खड़ाहट
खिलौनात्वचाप्लास्टिक की चिकनाहट, हल्का वज़न, विशेष आकार
फूलनाक + त्वचासुगंध और पंखुड़ियों की कोमलता

सावधानियाँ: डिब्बे में कोई नुकीली, गरम, टूटने वाली या गंदी वस्तु न रखें। स्वाद केवल उसी वस्तु का लें जो साफ़ और खाने योग्य हो, और हर विद्यार्थी के लिए अलग टुकड़ा हो।

चर्चा के निष्कर्ष (चरण 7): सामान्यत: गंध वाली वस्तुएँ सबसे आसान लगती हैं और एक-से आकार वाली चिकनी वस्तुएँ सबसे कठिन (जैसे साबुन और रबड़, या दो तरह के कपड़े)। जिस वस्तु के दो संकेत मिल जाएँ — जैसे नींबू का खुरदुरापन और गंध — वह सबसे जल्दी पहचानी जाती है।
पाठ से जोड़िए: बड़े भाई ने पेटी को छुआ तक नहीं था — उसने केवल सुना कि भीतर कोई गोल वस्तु लुढ़क रही है, और देखा कि सेवक पेटी को कितनी आसानी से उठा लाए। इन्हीं दो संकेतों से उसने कह दिया कि पेटी हल्की है और उसमें कोई छोटी गोल वस्तु है। यही इस गतिविधि का पाठ है — हर इंद्रिय एक प्रमाण देती है।
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