प्र1.
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए— (क) “कोई निरपराध को मारे, / तो क्यों अन्य उसे न उबारे? / रक्षक पर भक्षक को वारे, / न्याय दया का दानी!”
उत्तर
भावार्थ: ये पंक्तियाँ बालक राहुल का निर्णय हैं। वह कहता है — यदि कोई किसी निरपराध (बेकसूर) प्राणी को मारता है, तो दूसरा व्यक्ति उसे बचाए क्यों नहीं? न्याय तो भक्षक (मारने वाले) को छोड़कर रक्षक (बचाने वाले) का पक्ष लेगा, क्योंकि सच्चा न्याय दया करने वाला होता है।
| पंक्ति | सरल अर्थ |
|---|---|
| कोई निरपराध को मारे, | यदि कोई बेकसूर प्राणी पर वार करे |
| तो क्यों अन्य उसे न उबारे? | तो दूसरा व्यक्ति उसे बचाए क्यों न? (उबारना = बचाना) |
| रक्षक पर भक्षक को वारे, | न्याय रक्षक के आगे भक्षक को न्योछावर कर दे, यानी रक्षक को बड़ा माने |
| न्याय दया का दानी! | न्याय वही है जो दया देता है — निर्दयता का साथ नहीं देता |
क्यों महत्वपूर्ण है: पूरी कविता एक प्रश्न पर आकर रुकती है — जीवन बचाने वाले का हक बड़ा या मारने वाले का? बालक इन्हीं चार पंक्तियों में उत्तर दे देता है, और वह भी बिना डरे। यही कविता का केंद्रीय विचार है।
भाषा: ‘रक्षक’ और ‘भक्षक’ — तुक भी मिलती है और अर्थ भी आमने-सामने है। ऐसे विपरीत अर्थ वाले शब्दों को साथ रखने से बात और तीखी हो जाती है।