मल्हार अध्याय 1 पंक्तियों पर चर्चा

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए— (क) “कोई निरपराध को मारे, / तो क्यों अन्य उसे न उबारे? / रक्षक पर भक्षक को वारे, / न्याय दया का दानी!”
उत्तर

भावार्थ: ये पंक्तियाँ बालक राहुल का निर्णय हैं। वह कहता है — यदि कोई किसी निरपराध (बेकसूर) प्राणी को मारता है, तो दूसरा व्यक्ति उसे बचाए क्यों नहीं? न्याय तो भक्षक (मारने वाले) को छोड़कर रक्षक (बचाने वाले) का पक्ष लेगा, क्योंकि सच्चा न्याय दया करने वाला होता है।

पंक्तिसरल अर्थ
कोई निरपराध को मारे,यदि कोई बेकसूर प्राणी पर वार करे
तो क्यों अन्य उसे न उबारे?तो दूसरा व्यक्ति उसे बचाए क्यों न? (उबारना = बचाना)
रक्षक पर भक्षक को वारे,न्याय रक्षक के आगे भक्षक को न्योछावर कर दे, यानी रक्षक को बड़ा माने
न्याय दया का दानी!न्याय वही है जो दया देता है — निर्दयता का साथ नहीं देता
क्यों महत्वपूर्ण है: पूरी कविता एक प्रश्न पर आकर रुकती है — जीवन बचाने वाले का हक बड़ा या मारने वाले का? बालक इन्हीं चार पंक्तियों में उत्तर दे देता है, और वह भी बिना डरे। यही कविता का केंद्रीय विचार है।
भाषा: ‘रक्षक’ और ‘भक्षक’ — तुक भी मिलती है और अर्थ भी आमने-सामने है। ऐसे विपरीत अर्थ वाले शब्दों को साथ रखने से बात और तीखी हो जाती है।
प्र2.
(ख) “हुआ विवाद सदय-निर्दय में, / उभय आग्रही थे स्वविषय में, / गई बात तब न्यायालय में, / सुनी सभी ने जानी।”
उत्तर

भावार्थ: घायल हंस को लेकर दयालु सिद्धार्थ और निर्दयी आखेटक में झगड़ा हो गया। उभय यानी दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे — एक कहता था “पक्षी मेरा है, मैंने मारा है”, दूसरा कहता था “पक्षी मेरा है, मैंने बचाया है”। जब बात किसी तरह न सुलझी तो मामला न्यायालय पहुँचा और सबने इस विवाद के बारे में सुना-जाना।

शब्दअर्थ
सदयदया करने वाला — यहाँ सिद्धार्थ
निर्दयदया न करने वाला — यहाँ आखेटक
उभयदोनों
आग्रहीहठ पर अड़ा हुआ, अपनी बात न छोड़ने वाला
स्वविषयअपना पक्ष, अपनी बात
बड़ी बात: झगड़ा हाथापाई में नहीं बदला — बात न्यायालय में गई। कविता यही सिखाती है कि विवाद का हल ताकत से नहीं, न्याय की प्रक्रिया से निकाला जाता है।
काव्य-सौंदर्य: ‘सदय-निर्दय’ विपरीतार्थक युग्म है और ‘विषय में–न्यायालय में’ में सुंदर तुक है। एक ही पंक्ति में दो विरोधी स्वभाव रखकर कवि ने पूरे विवाद का चित्र खींच दिया है।
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