मल्हार अध्याय 10 मेरी समझ से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (1) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” पद में मीरा किनसे विनती कर रही हैं? • संतों से • भक्तों से • वैजंती से • श्रीकृष्ण से
उत्तर

सटीक उत्तर है — श्रीकृष्ण से। इसी विकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।

‘नंदलाल’ = नंद के लाल यानी श्रीकृष्ण
‘बसो मेरे नैनन में’ = मेरी आँखों में बस जाइए
अर्थ — हे नंदलाल! आप मेरी आँखों में बस जाइए।
विकल्पसही / ग़लतकारण
संतों सेग़लतसंतों का नाम आता ज़रूर है, पर ‘संतन सुखदाई’ कहकर — वह श्रीकृष्ण का गुण है, विनती संतों से नहीं की जा रही।
भक्तों सेग़लत‘भक्त वछल’ भी श्रीकृष्ण का ही विशेषण है — भक्तों से प्रेम करने वाले।
वैजंती सेग़लतवैजंती माल तो श्रीकृष्ण के गले का आभूषण है, कोई व्यक्ति नहीं।
श्रीकृष्ण सेसही ★पूरा पद श्रीकृष्ण को ही संबोधित है — नंदलाल, गोपाल, मीरा के प्रभु, सब उन्हीं के नाम हैं।
क्यों: पद का पहला ही शब्द ‘बसो’ आज्ञा/प्रार्थना का रूप है — “बस जाइए”। जिसे यह प्रार्थना की जा रही है, उसी का नाम उसी पंक्ति में है — नंदलाल
प्र2.
(2) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” पद का मुख्य विषय क्या है? • प्रेम और भक्ति • प्रकृति की सुंदरता • युद्ध और शांति • ज्ञान और शिक्षा
उत्तर

सटीक उत्तर है — प्रेम और भक्ति। इसके सामने तारा (★) बनाइए।

विकल्पसही / ग़लतकारण
प्रेम और भक्तिसही ★मीरा अपने आराध्य से विनती कर रही हैं कि वे उनकी आँखों में बस जाएँ, और उनके रूप का प्रेम-भरा वर्णन करती हैं। अंत में उन्हें ‘संतन सुखदाई’ और ‘भक्त वछल’ कहती हैं — यह शुद्ध भक्ति-भाव है।
प्रकृति की सुंदरताग़लतप्रकृति का वर्णन दूसरे पद में है, इस पद में नहीं।
युद्ध और शांतिग़लतपद में युद्ध या संघर्ष का कोई प्रसंग ही नहीं है।
ज्ञान और शिक्षाग़लतमीरा यहाँ कुछ सिखा नहीं रहीं, अपने मन का प्रेम कह रही हैं।
जानने योग्य: मीरा को निर्गुण नहीं, सगुण भक्ति-धारा की कवयित्री कहा जाता है — क्योंकि वे ईश्वर को रूप, रंग, वेश और आभूषण के साथ, एक साकार रूप में देखती हैं।
प्र3.
(3) “बरसे बदरिया सावन की” पद में कौन-सी ऋतु का वर्णन किया गया है? • सर्दी • गरमी • वर्षा • वसंत
उत्तर

सटीक उत्तर है — वर्षा। इसके सामने तारा (★) बनाइए।

बदरिया बरस रही है → बादल
“दामिन दम कै” → बिजली चमक रही है
“नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे” → बूँदें गिर रही हैं
“सावन” → आषाढ़ के बाद का महीना = वर्षा ऋतु
क्यों: हिंदी महीनों में सावन (श्रावण) और भादों (भाद्रपद) — ये दो महीने वर्षा ऋतु के हैं। पद का पहला शब्द ही ‘बरसे’ है, इसलिए ऋतु पहचानने में कोई कठिनाई नहीं होती।
प्र4.
(4) “बरसे बदरिया सावन की” पद को पढ़कर ऐसा लगता है, जैसे मीरा— • प्रसन्न हैं। • दुखी हैं। • उदास हैं। • चिंतित हैं।
उत्तर

सटीक उत्तर है — प्रसन्न हैं। इसके सामने तारा (★) बनाइए।

पद के अपने शब्द ही इसका प्रमाण हैं —

  • “सावन की मन भावन की” — सावन मन को भाने वाला है।
  • “सावन में उमग्यो मेरो मनवा” — मन उमंग से भर गया।
  • भनक सुनी हरि आवन की” — प्रियतम के आने की आहट सुनाई दी।
  • “शीतल पवन सोहावन की” — हवा सुहावनी लग रही है।
  • आनंद मंगल गावन की” — आनंद और मंगल के गीत गाए जा रहे हैं।
ध्यान दें: वर्षा-वर्णन वाले अधिकतर भक्ति-पदों में विरह और तड़प होती है, इसलिए ‘दुखी’ या ‘उदास’ चुन लेने की भूल हो सकती है। पर इस पद में एक भी शब्द विरह का नहीं है — यहाँ बादल वियोग का नहीं, मिलन का संदेश लेकर आए हैं।
प्र5.
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर

यह चर्चा का प्रश्न है। चर्चा का तरीका यह है — हर साथी पहले अपना चुना हुआ विकल्प बताए, फिर पद की वह पंक्ति पढ़कर सुनाए जिसके कारण उसने वह विकल्प चुना। बिना पंक्ति के दिया गया कारण अधूरा माना जाए।

नमूना उत्तर:

प्रश्नमैंने चुनामेरा कारण (पद की पंक्ति से)
(1)श्रीकृष्ण से“बसो मेरे नैनन में नंदलाल” — नंदलाल श्रीकृष्ण का ही नाम है।
(2)प्रेम और भक्ति“मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल” — यह भक्त का अपने प्रभु के प्रति प्रेम है।
(3)वर्षाबरसे बदरिया सावन की” — सावन वर्षा ऋतु का महीना है।
(4)प्रसन्न हैं“सावन में उमग्यो मेरो मनवा” और “आनंद मंगल गावन की”।
चर्चा का सूत्र: यदि दो साथियों के उत्तर अलग हैं तो झगड़ने के बजाय दोनों पंक्तियाँ साथ रखकर देखिए — कई बार दोनों उत्तर ठीक निकलते हैं। जैसे प्रश्न (2) में कोई ‘प्रकृति की सुंदरता’ भी कह सकता है, पर वह दूसरे पद के लिए ठीक होगा, इस पद के लिए नहीं।
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