मल्हार अध्याय 9 चिड़िया के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
चिड़िया आरसी प्रसाद सिंह की कविता है। पीपल की ऊँची डाली पर बैठी एक चिड़िया गाती है — कवि पूछता है कि क्या तुम्हें पता है, वह अपनी बोली में कोई संदेश सुना रही है? चिड़िया का पहला संदेश है प्रेम-प्रीति की रीति और मुक्ति-मंत्र । जंगल के सारे पक्षी — खंजन, कपोत, चातक, कोकिल, काक, हंस, शुक — आपस में हिलमिल कर रहते हैं, मिल-जुलकर खाते हैं और पूरा आसमान उनका घर है। दूसरा संदेश है संतोष । पक्षियों के मन में न लोभ है, न पाप। वे अपने श्रम से जितना मिलता है उतना ही लेते हैं और बचा हुआ दूसरों के लिए छोड़ देते हैं — “नहीं कमाई से औरों की, अपना घर वे भरते हैं!” तीसरा और सबसे बड़ा संदेश है स्वतंत्रता । पक्षी सीमा-हीन गगन में निर्भय विचरण करते हैं, जबकि मनुष्य ने स्वयं अपने पैरों में बेड़ी डाल रखी है। इसलिए वे कहते हैं — “तुम देखो हमको, फिर अपनी सोने की कड़ियाँ तोड़ो ”। ‘सोने की कड़ियाँ’ कविता का सबसे सुं
अभ्यास
- मेरी समझ से
- मिलकर करें मिलान
- पंक्तियों पर चर्चा
- सोच-विचार के लिए
- अनुमान और कल्पना से
- कविता की रचना
- भाषा की बात
- भावों की बात
- आज की पहेली
- चित्र की बात
- निर्भय विचरण
- साथ-साथ
- शब्द एक अर्थ अनेक
- रचनात्मकता
- हमारा पर्यावरण
- परियोजना कार्य
- झरोखे से
- साझी समझ
- खोजबीन के लिए