कक्षा ७ हिंदी अध्याय 9 चिड़िया के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

चिड़िया आरसी प्रसाद सिंह की कविता है। पीपल की ऊँची डाली पर बैठी एक चिड़िया गाती है — कवि पूछता है कि क्या तुम्हें पता है, वह अपनी बोली में कोई संदेश सुना रही है? चिड़िया का पहला संदेश है प्रेम-प्रीति की रीति और मुक्ति-मंत्र । जंगल के सारे पक्षी — खंजन, कपोत, चातक, कोकिल, काक, हंस, शुक — आपस में हिलमिल कर रहते हैं, मिल-जुलकर खाते हैं और पूरा आसमान उनका घर है। दूसरा संदेश है संतोष । पक्षियों के मन में न लोभ है, न पाप। वे अपने श्रम से जितना मिलता है उतना ही लेते हैं और बचा हुआ दूसरों के लिए छोड़ देते हैं — “नहीं कमाई से औरों की, अपना घर वे भरते हैं!” तीसरा और सबसे बड़ा संदेश है स्वतंत्रता । पक्षी सीमा-हीन गगन में निर्भय विचरण करते हैं, जबकि मनुष्य ने स्वयं अपने पैरों में बेड़ी डाल रखी है। इसलिए वे कहते हैं — “तुम देखो हमको, फिर अपनी सोने की कड़ियाँ तोड़ो ”। ‘सोने की कड़ियाँ’ कविता का सबसे सुं

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दअर्थकविता की पंक्तिअपने वाक्य में प्रयोग
ज्ञातमालूम, पता“तुम्हें ज्ञात क्या अपनी”मुझे ज्ञात नहीं था कि आज विद्यालय बंद है।
रीतिढंग, तरीका, परंपरा“रीति हमें सिखलाती है!”अतिथि का स्वागत करना हमारे गाँव की पुरानी रीति है।
बंदीकैदी, बंधन में पड़ा हुआ“वह जग के बंदी मानव को”पिंजरे का तोता बंदी होकर भी गाना नहीं भूला।
मुक्ति-मंत्रबंधन से छूटने का उपाय / सूत्र“मुक्ति-मंत्र बतलाती है!”मेहनत ही ग़रीबी से निकलने का मुक्ति-मंत्र है।
पंछीपक्षी, चिड़िया“वन में जितने पंछी हैं”शाम होते ही पंछी अपने घोंसलों को लौट आते हैं।
खंजनएक छोटा काला-सफ़ेद पक्षी जो प्रायः जल के पास दिखता है (wagtail)“वन में जितने पंछी हैं, खंजन”तालाब के किनारे खंजन पूँछ हिलाता फिर रहा था।
कपोतकबूतर“कपोत, चातक, कोकिल”छत के रोशनदान में कपोत ने घोंसला बना लिया।
चातकएक पक्षी, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह केवल वर्षा की बूँद पीता है (पपीहा)“कपोत, चातक, कोकिल”चातक की तरह हम भी पहली बारिश की राह देख रहे थे।
कोकिलकोयल“कपोत, चातक, कोकिल”आम बौराते ही कोकिल कूकने लगी।
काककौआ“काक, हंस, शुक आदि वास”काक ने घड़े में कंकड़ डालकर पानी ऊपर कर लिया।
शुकतोता“काक, हंस, शुक आदि वास”शुक की चोंच लाल और पंख हरे होते हैं।
हिलमिलमिल-जुलकर, घुलमिल कर“करते सब आपस में हिलमिल!”हमारे मुहल्ले में सब लोग हिलमिल कर त्योहार मनाते हैं।
श्रममेहनत, परिश्रम“जो मिलता है अपने श्रम से”अपने श्रम की कमाई में सबसे अधिक सुख है।
हितभलाई, फ़ायदा“बच जाता जो, औरों के हित”पेड़ लगाना सबके हित का काम है।
गगनआकाश, नभ“सीमा-हीन गगन में उड़ते”गगन में सारस की कतार बहुत सुंदर लगी।
निर्भयबिना डर के, निडर“निर्भय विचरण करते हैं”सच बोलने वाला व्यक्ति निर्भय रहता है।
विचरणघूमना-फिरना, विचरना“निर्भय विचरण करते हैं”हिरणों का झुंड घास के मैदान में विचरण कर रहा था।
स्वच्छंदअपनी इच्छा से चलने वाला, स्वतंत्र“हम स्वच्छंद और क्यों तुमने”नदी पहाड़ों में स्वच्छंद होकर बहती है।
बेड़ीपैरों में डाली जाने वाली ज़ंजीर; बंधन“डाली है बेड़ी पग में?”डर हमारे मन की सबसे बड़ी बेड़ी है।
पगपैर, चरण“डाली है बेड़ी पग में?”थके पग भी घर की राह पहचान लेते हैं।
द्रोह-भावनावैर, बैर, दूसरों का बुरा चाहने का भाव“द्रोह-भावना को छोड़ो!”द्रोह-भावना छोड़ दें तो आधे झगड़े अपने आप मिट जाएँ।
चकितहैरान, अचंभित“बैठ घड़ी भर, हमें चकित कर”छोटी बहन का चित्र देखकर सब चकित रह गए।
  1. मेरी समझ से
  2. मिलकर करें मिलान
  3. पंक्तियों पर चर्चा
  4. सोच-विचार के लिए
  5. अनुमान और कल्पना से
  6. कविता की रचना
  7. भाषा की बात
  8. भावों की बात
  9. आज की पहेली
  10. चित्र की बात
  11. निर्भय विचरण
  12. साथ-साथ
  13. शब्द एक अर्थ अनेक
  14. रचनात्मकता
  15. हमारा पर्यावरण
  16. परियोजना कार्य
  17. झरोखे से
  18. साझी समझ
  19. खोजबीन के लिए
क्या यह उपयोगी रहा?