मल्हार अध्याय 9 भावों की बात

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) जब आप नीचे दिए गए दृश्य देखते हैं तो आपको कैसा महसूस होता है? अपने उत्तर के कारण भी सोचिए और बताइए। आप नीचे दिए गए भावों में से शब्द चुन सकते हैं। आप किसी भी दृश्य के लिए एक से अधिक शब्द भी चुन सकते हैं। [भाव — प्रेम, वीरता, दया, करुणा, क्रोध, हँसी, आनंद, डर, घृणा, आश्चर्य, ममता, शांति, सुख, दुख, ईर्ष्या, गर्व, निराशा, आभार, उत्साह, चिंता, आत्मविश्वास, सहानुभूति, उदासीनता, शंका] दृश्य — 1. आपको कहीं से किसी पक्षी के चहचहाने की आवाज सुनाई देती है। 2. शाम के समय किसी पेड़ पर अनगिनत पक्षी एक साथ चहचहा रहे हैं। 3. कोई गाय अपने बच्चे को दूध पिला रही है। 4. कोई व्यक्ति अपने वाहन की खिड़की से कूड़ा बाहर फेंक देता है। 5. कोई बच्चा किसी व्यर्थ कागज को कूड़ेदान में डाल देता है। 6. कोई व्यक्ति बिना हेलमेट पहने बहुत तेज बाइक चला रहा है। 7. दो प्राणी किसी कारण लड़ रहे हैं। 8. एक व्यक्ति जिसके पैर नहीं हैं, वह विशेष रूप से बनाई गई तिपहिया गाड़ी पर यात्रा कर रहा है। 9. किसी स्थान पर नेत्रहीन व्यक्तियों के लिए भारती (ब्रेल) लिपि में सूचनाओं के बोर्ड लगे हैं। 10. कोई व्यक्ति किसी को अपशब्द कह रहा है। 11. कोई व्यक्ति किसी जरूरतमंद भूखे को भोजन दे रहा है। 12. कोई लड़का स्वादिष्ट भोजन बनाकर अपनी बहन को खिला रहा है।
उत्तर

यह अनुभव का प्रश्न है, इसलिए भाव आपके अपने होंगे। नीचे दी गई तालिका एक नमूना उत्तर है — भाव के साथ-साथ कारण लिखना सबसे ज़रूरी है, क्योंकि प्रश्न में यही माँगा गया है।

क्र.दृश्यभावकारण
1पक्षी के चहचहाने की आवाज़आनंद, शांतियह आवाज़ मन को शांत कर देती है और लगता है कि आस-पास का वातावरण अब भी हरा-भरा और स्वस्थ है।
2शाम को पेड़ पर अनगिनत पक्षीआनंद, उत्साह, आश्चर्यइतने सारे पक्षियों का एक साथ लौटना कविता की उसी पंक्ति को साकार कर देता है — “सब मिल-जुलकर रहते हैं वे”।
3गाय अपने बछड़े को दूध पिलाती हुईममता, प्रेम, करुणामाँ का वात्सल्य मनुष्य और पशु — दोनों में एक जैसा है; यह दृश्य अपनी माँ की याद दिला देता है।
4वाहन की खिड़की से कूड़ा फेंकनाक्रोध, घृणा, चिंतायह सार्वजनिक जगह को गंदा करना है। उस कूड़े से नाली रुकती है और आवारा पशु प्लास्टिक निगल जाते हैं।
5बच्चा कागज़ कूड़ेदान में डालता हुआआनंद, गर्व, आभारछोटा-सा बच्चा भी अपनी ज़िम्मेदारी समझ रहा है — यह देखकर भरोसा जगता है कि सफ़ाई की आदत बन रही है।
6बिना हेलमेट तेज़ बाइक चलानाचिंता, डर, शंकाएक छोटी-सी चूक जान ले सकती है; उसके परिवार का चेहरा आँखों के सामने आ जाता है।
7दो प्राणी लड़ रहे हैंदुख, चिंता, करुणालड़ाई में दोनों को चोट लगती है। कविता कहती है — पक्षी तो “हिलमिल” रहते हैं; फिर हम क्यों नहीं?
8दिव्यांग व्यक्ति तिपहिया गाड़ी पर यात्रा करता हुआआत्मविश्वास, गर्व, प्रेरणावह किसी पर निर्भर नहीं है, अपने बल पर आगे बढ़ रहा है। यह दृश्य दया का नहीं, सम्मान का है।
9ब्रेल लिपि में सूचना-बोर्डसुख, गर्व, आभारइसका अर्थ है कि समाज ने नेत्रहीन साथियों को भी बराबरी से याद रखा — सच्ची समानता यही है।
10कोई किसी को अपशब्द कह रहा हैक्रोध, दुख, घृणाकड़वे शब्द की चोट चोट से भी गहरी होती है और वर्षों याद रहती है।
11ज़रूरतमंद भूखे को भोजन देनाकरुणा, दया, प्रेम, सुखयह ठीक वही भाव है जो कविता में है — “बच जाता जो, औरों के हित, उसे छोड़ वे देते हैं!”
12लड़का भोजन बनाकर बहन को खिलाता हुआप्रेम, ममता, आनंदरसोई का काम केवल लड़कियों का नहीं होता — यह दृश्य स्नेह भी दिखाता है और बराबरी भी।
ध्यान दीजिए: दृश्य 8 पर सबसे अधिक सोचने की ज़रूरत है। दिव्यांग व्यक्ति को देखकर ‘दया’ या ‘सहानुभूति’ लिखना सहज लगता है, पर वह गाड़ी उसकी स्वतंत्रता का साधन है, कमज़ोरी की निशानी नहीं। इसलिए वहाँ ‘आत्मविश्वास’ और ‘गर्व’ अधिक सही भाव हैं।
याद रखिए: कोई भी भाव ‘ग़लत’ नहीं होता, बशर्ते आप उसका कारण बता सकें। शिक्षक भी कारण ही देखेंगे।
प्र2.
(ख) उपर्युक्त भावों में से आप कौन-से भाव कब-कब अनुभव करते हैं? भावों के नाम लिखकर उन स्थितियों के लिए एक-एक वाक्य लिखिए। (संकेत— आत्मविश्वास– जब मैं अकेले पड़ोस की दुकान से कुछ खरीदकर ले आता हूँ।)
उत्तर

संकेत के ढाँचे पर चलिए — भाव का नाम – वह स्थिति जिसमें आपको वह भाव होता है। स्थिति अपने ही जीवन की हो, तभी वाक्य सच्चा लगेगा।

नमूना उत्तर:

भावमैं इसे कब अनुभव करता/करती हूँ
आनंदजब पहली बारिश में मैं आँगन में भीगता हूँ और मिट्टी की सोंधी गंध चारों ओर फैल जाती है।
प्रेमजब दादी अपने हिस्से का लड्डू भी मेरी थाली में रख देती हैं।
ममताजब छोटा भाई डरकर मेरा हाथ पकड़ लेता है और मैं उसे सीने से लगा लेता हूँ।
करुणाजब सर्दी की रात में कोई कुत्ता ठिठुरता हुआ दुकान के बाहर बैठा दिखाई देता है।
आत्मविश्वासजब मैं पूरी कक्षा के सामने बिना काग़ज़ देखे कविता सुना देता हूँ।
गर्वजब गणतंत्र दिवस पर हमारा तिरंगा फहराया जाता है और सब मिलकर राष्ट्रगान गाते हैं।
उत्साहजब खेल-दिवस से एक दिन पहले हम मैदान में अभ्यास करने जाते हैं।
आभारजब मेरी साइकिल पंक्चर हो गई थी और एक अनजान व्यक्ति ने बिना पैसे लिए उसे ठीक कर दिया।
आश्चर्यजब मैंने पहली बार आकाश में सारसों की ‘वी’ आकार की लंबी कतार देखी।
डरजब रात में तेज़ आँधी चलती है और खिड़कियाँ ज़ोर-ज़ोर से खड़कने लगती हैं।
चिंताजब परीक्षा का परिणाम आने वाला होता है और मुझे नींद नहीं आती।
दुखजब हमारे आँगन का पुराना नीम का पेड़ काट दिया गया और उस पर बना घोंसला गिर गया।
क्रोधजब कोई किसी छोटे बच्चे को बिना कारण डाँटता या चिढ़ाता है।
शांतिजब भोर में मैं छत पर बैठकर पक्षियों की चहचहाहट सुनता हूँ।
सहानुभूतिजब मेरे मित्र की तबीयत ख़राब होती है और वह विद्यालय नहीं आ पाता।
हँसीजब मेरा तोता मेरी ही आवाज़ में “कौन है?” बोल उठता है।
लिखने का सुझाव: हर वाक्य ‘जब…’ से शुरू कीजिए। इससे भाव और स्थिति दोनों एक ही वाक्य में स्पष्ट हो जाते हैं।
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