मल्हार अध्याय 9 भाषा की बात

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“पीपल की ऊँची डाली पर / बैठी चिड़िया गाती है! / तुम्हें ज्ञात क्या अपनी / बोली में संदेश सुनाती है?” — रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ‘गाती’ और ‘सुनाती’ रेखांकित शब्दों से चिड़िया के गाने और सुनाने के कार्य का बोध होता है। वे शब्द जिनसे कार्य करने या होने का बोध होता है, उन्हें क्रिया कहते हैं। कविता में ऐसे क्रिया शब्दों को ढूँढ़कर लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।
उत्तर

क्रिया वह शब्द है जिससे किसी कार्य के करने या होने का बोध हो। ‘चिड़िया’ कविता में क्रिया शब्दों की भरमार है — नीचे उन्हें ढूँढ़कर, अर्थ और नए वाक्य के साथ दिया गया है।

कविता का क्रिया शब्दकविता की पंक्तिनया वाक्य
गाती है“बैठी चिड़िया गाती है!”मेरी छोटी बहन प्रार्थना बहुत सुरीली आवाज़ में गाती है।
सुनाती है“बोली में संदेश सुनाती है?”दादी हर रात हमें एक नई कहानी सुनाती हैं।
सिखलाती है“रीति हमें सिखलाती है!”हमारी शिक्षिका हमें चित्र बनाना सिखलाती हैं।
बतलाती है“मुक्ति-मंत्र बतलाती है!”घड़ी हमें ठीक समय बतलाती है।
वास करते हैं“काक, हंस, शुक आदि वास करते”इस पुराने क़िले में अब केवल कबूतर वास करते हैं।
रहते हैं“सब मिल-जुलकर रहते हैं वे”मेरे नाना-नानी गाँव में रहते हैं।
खाते हैं“सब मिल-जुलकर खाते हैं;”हम सब दोपहर का भोजन एक साथ बैठकर खाते हैं।
जाते हैं“जहाँ चाहते, जाते हैं!”गरमी की छुट्टियों में हम हर साल पहाड़ों पर जाते हैं।
बसाते हैं“दुनिया एक बसाते हैं;”चींटियाँ मिट्टी के नीचे अपनी पूरी बस्ती बसाते हैं।
सो जाते हैं“पेड़ों पर सो जाते हैं।”थककर लौटे मज़दूर पेड़ की छाँव में सो जाते हैं।
ले लेते हैं“उतना भर ले लेते हैं;”बच्चे थाली में उतना ही ले लेते हैं जितना खा सकें।
छोड़ देते हैं“उसे छोड़ वे देते हैं!”अच्छे लोग बदले की भावना छोड़ देते हैं।
उड़ते हैं“सीमा-हीन गगन में उड़ते”शाम होते ही सारस कतार बनाकर उड़ते हैं।
विचरण करते हैं“निर्भय विचरण करते हैं;”अभयारण्य में हिरण निडर होकर विचरण करते हैं।
भरते हैं“अपना घर वे भरते हैं!”किसान कटाई के बाद अपनी कोठियाँ अनाज से भरते हैं।
कहते हैं“वे कहते हैं, मानव! सीखो”बड़े-बूढ़े कहते हैं कि सुबह जल्दी उठना चाहिए।
सीखो“मानव! सीखो, तुम हमसे जीना”पहले तैरना सीखो, फिर गहरे पानी में जाना।
देखो“तुम देखो हमको, फिर अपनी”ज़रा ऊपर देखो, आकाश में इंद्रधनुष निकला है!
तोड़ो“सोने की कड़ियाँ तोड़ो;”डर की दीवार तोड़ो, तभी आगे बढ़ पाओगे।
छोड़ो“द्रोह-भावना को छोड़ो!”पुराना झगड़ा छोड़ो और नए सिरे से मित्रता करो।
आती है“यही सुनाने आती है”हमारी गली में हर सुबह दूध वाली आती है।
उड़ जाती है“गा-कर फिर उड़ जाती है।”पतंग डोर टूटते ही दूर उड़ जाती है।
पहचानने का सरल तरीक़ा: वाक्य से पूछिए — “क्या किया?” या “क्या हो रहा है?”। जिस शब्द से उत्तर मिले, वही क्रिया है। जैसे — चिड़िया ने क्या किया? गाया
ध्यान दीजिए: ‘बैठी’, ‘गाकर’, ‘मिल-जुलकर’ जैसे शब्द भी काम से बने हैं, पर ये अकेले वाक्य पूरा नहीं करते — ये क्रिया के सहायक रूप (कृदंत) हैं। मुख्य क्रिया वही है जो वाक्य के अंत में आकर उसे पूरा करती है।
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