प्र1.
“सब मिल-जुलकर रहते हैं वे / सब मिल-जुलकर खाते हैं” — रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ये शब्द लिखने-बोलने में एक जैसे हैं। इस तरह की शैली प्राय: कविता में आती है। अब आप सब मिल-जुलकर नीचे दी गई कविता को आगे बढ़ाइए— संकेत— सब मिल-जुलकर हँसते हैं वे / सब मिल-जुलकर गाते हैं......
उत्तर
यहाँ जो शैली दिखाई गई है उसे पुनरुक्ति (एक ही शब्द-समूह का बार-बार आना) कहते हैं। नियम सरल है — हर पंक्ति “सब मिल-जुलकर” से शुरू होगी, बीच में एक नया क्रिया शब्द रखिए, और दूसरी पंक्ति का अंत पहली से तुक मिलाइए।
ढाँचा — सब मिल-जुलकर ___ हैं वे
सब मिल-जुलकर ___ हैं;
तुक मिलाइए — हँसते / बसते, गाते / खाते / जाते, बोते / रोते
सब मिल-जुलकर ___ हैं;
तुक मिलाइए — हँसते / बसते, गाते / खाते / जाते, बोते / रोते
नमूना उत्तर:
सब मिल-जुलकर हँसते हैं वे
सब मिल-जुलकर गाते हैं;
सब मिल-जुलकर उड़ते नभ में,
सब मिल-जुलकर आते हैं!
सब मिल-जुलकर दाना चुगते,
सब मिल-जुलकर बाँटते हैं;
सब मिल-जुलकर तिनके लाकर,
सब मिल-जुलकर छाँटते हैं!
सब मिल-जुलकर पानी पीते,
सब मिल-जुलकर नहाते हैं;
सब मिल-जुलकर घोंसले रचकर,
सब मिल-जुलकर सो जाते हैं!
कक्षा में कीजिए: यह गतिविधि सचमुच ‘मिल-जुलकर’ करने की है। एक विद्यार्थी पहली पंक्ति बोले, दूसरा उससे तुक मिलाती दूसरी पंक्ति जोड़े, तीसरा अगली — पूरी कक्षा की एक कविता तैयार हो जाएगी।
यह शैली क्यों काम करती है: दोहराव कविता को गीत जैसी लय देता है और उसे याद रखना आसान बना देता है। साथ ही “सब मिल-जुलकर” बार-बार सुनकर एकता का भाव मन में गहरा बैठ जाता है — यही कवि चाहता है।