मल्हार अध्याय 9 अनुमान और कल्पना से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अपने समूह में मिलकर संवाद कीजिए— 1. चिड़िया मनुष्य को स्वतंत्रता का संदेश देती है, आपके अनुसार मनुष्य के पास किन कार्यों को करने की स्वतंत्रता है और किन कार्यों को करने की स्वतंत्रता नहीं है?
उत्तर

मनुष्य को स्वतंत्रता तो बहुत कुछ करने की है, पर वह स्वतंत्रता वहीं तक है जहाँ तक किसी दूसरे को हानि न पहुँचे। यही स्वतंत्रता और स्वच्छंदता का अंतर है।

ये करने की स्वतंत्रता हैये करने की स्वतंत्रता नहीं है
अपनी पसंद का काम, खेल और विषय चुननाकिसी को उसकी पसंद से रोकना या उस पर अपनी पसंद थोपना
अपने विचार बोलना और लिखनाकिसी का अपमान करना, अपशब्द कहना या झूठ फैलाना
देश में कहीं भी आना-जाना और बसनाकिसी की ज़मीन या घर पर ज़बरदस्ती क़ब्ज़ा करना
अपनी पूजा-पद्धति और त्योहार मनानादूसरे की आस्था का मज़ाक उड़ाना या उसे बदलने को मजबूर करना
ईमानदारी से कमाना और अपनी कमाई ख़र्च करनादूसरे की कमाई या हक़ छीनना — “नहीं कमाई से औरों की…”
पेड़ लगाना, पशु-पक्षियों की देखभाल करनापेड़ काटना, घोंसले उजाड़ना, पक्षी को पिंजरे में बंद करना
सड़क पर वाहन चलानाबिना हेलमेट, तेज़ रफ़्तार या ग़लत दिशा में चलाना
क्यों: चिड़िया भी सीमा-हीन गगन में उड़ती है, पर वह किसी दूसरे पक्षी का घोंसला नहीं छीनती। उसकी स्वतंत्रता में दूसरों के लिए जगह बची रहती है — असली स्वतंत्रता का यही अर्थ है।
चर्चा के लिए: समूह में यह सवाल उठाइए — “क्या मुझे टीवी की आवाज़ रात में तेज़ रखने की स्वतंत्रता है?” उत्तर सोचते ही स्वतंत्रता की सीमा अपने आप समझ में आ जाएगी।
प्र2.
2. चिड़िया और मनुष्य का जीवन एक-दूसरे से कैसे भिन्न है?
उत्तर

कविता के अनुसार दोनों का जीवन लगभग हर बात में उलटा है — चिड़िया का जीवन सरल, स्वच्छंद और संतोषी है, मनुष्य का जटिल, बँधा हुआ और असंतुष्ट

बिंदुचिड़िया का जीवनमनुष्य का जीवन
घर“आसमान ही उनका घर है” — जहाँ रहते हैं, वहीं दुनिया बसा लेते हैंपक्का घर बनाता है और फिर उसी से बँध जाता है
भोजनश्रम से जितना मिला, उतना ही; बचा हुआ औरों के लिएआवश्यकता से अधिक जोड़ता है, बाँटने में कंजूसी करता है
दिनचर्या“दिन भर करते काम, रात में पेड़ों पर सो जाते हैं” — सहजरात में भी चिंता और हिसाब-किताब
आपसी संबंधअलग-अलग जाति के पक्षी भी ‘हिलमिल’ कर रहते हैंजाति, धर्म, धन के भेद और द्रोह-भावना
मन“लोभ नहीं, पाप नहीं, परवाह नहीं”लोभ, होड़ और खोने का डर
स्वतंत्रता“सीमा-हीन गगन में… निर्भय विचरण”“डाली है बेड़ी पग में” — बंधन स्वयं का बनाया हुआ
ध्यान देने की बात: कवि यह नहीं कहता कि मनुष्य बुरा है। वह कहता है कि मनुष्य ने अपने जीवन को ज़रूरत से ज़्यादा उलझा लिया है — और उलझन सुलझाने का सूत्र एक छोटी-सी चिड़िया के पास है।
दूसरा पक्ष: मनुष्य के जीवन में कुछ बातें ऐसी भी हैं जो चिड़िया के पास नहीं — भाषा, शिक्षा, कला, चिकित्सा और एक-दूसरे की योजनाबद्ध सहायता। कविता इन्हें नकारती नहीं; वह बस कहती है कि इन सबके साथ चिड़िया-सा मन भी बचा रहना चाहिए।
प्र3.
3. चिड़िया कहीं भी अपना घर बना सकती है, यदि आपके पास चिड़िया जैसी सुविधा हो तो आप अपना घर कहाँ बनाना चाहेंगे और क्यों?
उत्तर

यह कल्पना का प्रश्न है, इसलिए उत्तर हर विद्यार्थी का अलग होगा। अच्छे उत्तर में तीन बातें ज़रूर होनी चाहिए — (1) जगह का नाम, (2) उस जगह का थोड़ा-सा वर्णन, और (3) वहीं क्यों — कम से कम दो कारण।

नमूना उत्तर:

यदि मेरे पास चिड़िया जैसी सुविधा होती तो मैं अपना घर किसी नदी के किनारे खड़े बरगद के पेड़ पर बनाता। सुबह सबसे पहले सूरज की किरण मेरे घर पर पड़ती, नीचे नदी बहती रहती और आस-पास सैकड़ों पक्षी मेरे पड़ोसी होते। मैं वहीं इसलिए बनाता क्योंकि — पहला, वहाँ न शोर है न धुआँ, और खुली हवा दिन भर मिलती रहती; दूसरा, पानी और भोजन दोनों पास ही होते, इसलिए दूर भटकना नहीं पड़ता; और तीसरा, ऊँचाई से मैं दूर-दूर तक खेत, पहाड़ और आकाश देख पाता — जैसे कविता की चिड़िया “सीमा-हीन गगन” देखती है। हर मौसम में जगह बदलने की छूट भी मुझे बहुत भाती, क्योंकि तब मैं गरमी में पहाड़ पर और जाड़े में मैदान में रह सकता।

अपना उत्तर बनाइए: जगह कोई भी चुनिए — समुद्र-तट, पहाड़ की चोटी, दादी के गाँव का आम का बग़ीचा, या अपने विद्यालय का पीपल। बस कारण अपने अनुभव से दीजिए, किताबी नहीं।
प्र4.
4. यदि आप चिड़िया की भाषा समझ सकते तो आप चिड़िया से क्या बातें करते?
उत्तर

इस उत्तर में प्रश्नों की एक सूची बनाइए, जो आप चिड़िया से पूछना चाहेंगे, और साथ में यह भी लिखिए कि आप उसे क्या बताना चाहेंगे। संवाद के रूप में लिखने पर उत्तर और सुंदर बन जाता है।

नमूना उत्तर (संवाद):

मैंचिड़िया
तुम रोज़ सुबह इतना मीठा क्यों गाती हो?क्योंकि नया दिन मिलना ही मेरे लिए सबसे बड़ी ख़ुशी है।
रात में तेज़ आँधी आती है, तब तुम्हें डर नहीं लगता?डर लगता है, पर मैं डाल पकड़कर बैठ जाती हूँ और सुबह का इंतज़ार करती हूँ।
तुम कल के लिए दाना जमा क्यों नहीं करतीं?जो आज मिल गया, वही बहुत है। जमा करूँगी तो उड़ना भारी हो जाएगा।
हम मनुष्य तुम्हारे किस काम आ सकते हैं?छत पर पानी का एक सकोरा रख दो और पेड़ मत काटो — इतना ही बहुत है।

इसके अलावा मैं उससे यह भी पूछता — तुम्हें रास्ता कैसे याद रहता है, तुम हज़ारों किलोमीटर उड़कर हर साल एक ही जगह कैसे लौट आती हो, और आसमान से हमारा गाँव कैसा दिखता है? और अंत में मैं उससे क्षमा माँगता — उन सब पेड़ों के लिए जो हम मनुष्यों ने काट दिए और जिनमें कभी उसके घोंसले रहे होंगे।

क्यों यह प्रश्न पूछा गया है: कविता की पहली ही पंक्ति है — “तुम्हें ज्ञात क्या अपनी बोली में संदेश सुनाती है?” यानी चिड़िया बोल तो रही ही है, कमी हमारी ओर है — हम सुनना नहीं जानते। यह प्रश्न उसी सुनने का अभ्यास है।
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