प्र1.
मनुष्य बिना सोचे-समझे जंगलों की लगातार कटाई कर रहा है, जिससे पशु-पक्षियों का जीवन प्रभावित हो रहा है। मनुष्य द्वारा किए जा रहे ऐसे कार्यों की एक सूची बनाइए, जिनसे पर्यावरण व हमारे परिवेश के पशु-पक्षियों के लिए संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इस संकट की स्थिति से बचने के लिए क्या-क्या उपाय किए जा सकते हैं? लिखिए। आप इस कार्य में शिक्षक, इंटरनेट और पुस्तकालय की सहायता भी ले सकते हैं। (संकेत— जैसे– ऊँचे भवनों का निर्माण…….)
उत्तर
उत्तर दो हिस्सों में लिखिए — पहले संकट पैदा करने वाले कार्य, फिर उनके सामने उपाय। तालिका बना लेने से उत्तर स्पष्ट और पूरा दिखता है।
| मनुष्य का कार्य | पशु-पक्षियों और पर्यावरण पर संकट | उपाय |
|---|---|---|
| ऊँचे भवनों का निर्माण | पेड़ कटते हैं, घोंसले उजड़ते हैं; काँच की दीवारों से टकराकर पक्षी मर जाते हैं | भवन के साथ पेड़ लगाना अनिवार्य हो; काँच पर निशान लगाएँ ताकि पक्षी उसे देख सकें; छत पर घोंसला-घर रखें |
| जंगलों की अंधाधुंध कटाई | पशु-पक्षियों का घर और भोजन दोनों छिन जाते हैं; वे गाँवों में घुस आते हैं | एक पेड़ काटें तो पाँच लगाएँ; देशी प्रजातियाँ — पीपल, बरगद, नीम, जामुन — लगाएँ; वन-अधिकार क़ानूनों का पालन करें |
| तालाब-नदी पाटना और उनमें कचरा डालना | जलपक्षी और मछलियाँ मर जाते हैं; भूजल घटता है | तालाबों की सफ़ाई और मरम्मत; कारखानों का पानी शोधित करके ही छोड़ना |
| प्लास्टिक फेंकना | गाय, कछुए और पक्षी उसे निगल लेते हैं और मर जाते हैं | कपड़े/जूट का थैला; एक बार उपयोग वाले प्लास्टिक से पूरी तरह बचना; कचरे को अलग-अलग करना |
| खेती में अधिक कीटनाशक और रासायनिक खाद | कीड़े मरते हैं तो पक्षियों का भोजन घटता है; ज़हर खाद्य-शृंखला में ऊपर चढ़ता जाता है | जैविक खाद और गोबर खाद; फ़सल-चक्र; कीट खाने वाले पक्षियों के लिए खेत में बसेरे लगाना |
| शिकार, अवैध व्यापार और पिंजरे में पालना | तोता, मैना, कछुआ जैसी प्रजातियाँ घट रही हैं | वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का पालन; पक्षी न ख़रीदें; बेचने वालों की सूचना वन-विभाग को दें |
| काँच वाली माँझा और खुले बिजली के तार | पतंग की माँझा से पक्षियों के पंख और गला कट जाता है | सादी सूती डोर; माँझे पर प्रतिबंध का समर्थन; घायल पक्षी को तुरंत चिकित्सालय पहुँचाना |
| वाहनों और कारखानों का धुआँ | वायु प्रदूषण से पक्षियों के फेफड़े और अंडों के छिलके प्रभावित होते हैं | साइकिल और सार्वजनिक वाहन का प्रयोग; पेड़ों की हरी पट्टी लगाना |
| तेज़ रोशनी, पटाख़े और शोर | रात में उड़ने वाले प्रवासी पक्षी रास्ता भटक जाते हैं (गद्यांश में भी यही लिखा है) | रात में अनावश्यक रोशनी बंद रखना; पटाख़े कम चलाना; ध्वनि-सीमा का पालन |
| कचरे को जलाना | ज़हरीला धुआँ और आग से घोंसले नष्ट | गीले कचरे से खाद बनाना; सूखे कचरे को छाँटकर पुनर्चक्रण के लिए देना |
कविता से जोड़िए: कवि ने लिखा है — “नहीं कमाई से औरों की, अपना घर वे भरते हैं!” आज मनुष्य ठीक इसका उल्टा कर रहा है। जंगल पक्षियों की ‘कमाई’ है और हम उसी से अपना घर भर रहे हैं। संकट की जड़ यही है।
सूची बनाते समय: कम से कम तीन कार्य अपने ही गाँव या मुहल्ले के लिखिए — जैसे “हमारे तालाब में कूड़ा डाला जाता है” या “सड़क चौड़ी करने के लिए बरगद काटा गया”। इससे उत्तर सजीव हो जाएगा।