मल्हार अध्याय 9 परियोजना कार्य

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) पर्यावरण संरक्षण के लिए हम अपने स्तर पर कुछ प्रयास कर सकते हैं। आप अपने विद्यालय, आस-पास और घरों में देखिए कि किन-किन कार्यों में प्लास्टिक के थैले का प्रयोग किया जाता है? उन कार्यों की सूची बनाइए। अब इनमें प्रयोग किए जा रहे प्लास्टिक के थैलों के विकल्पों पर विचार कीजिए और लिखिए। (संकेत— जैसे– हम प्लास्टिक के थैले की जगह कागज या कपड़े के थैले का प्रयोग किन-किन कार्यों में कर सकते हैं।)
उत्तर

करने का तरीक़ा: तीन दिन तक एक छोटी कॉपी साथ रखिए और जहाँ-जहाँ प्लास्टिक का थैला दिखे, वहीं लिख लीजिए — घर, दुकान, विद्यालय, ठेला, दवाख़ाना। तीन दिन बाद सूची बनाकर सामने विकल्प लिखिए।

नमूना सूची और विकल्प:

कहाँ / किस काम मेंप्लास्टिक का उपयोगबेहतर विकल्प
सब्ज़ी-फल की ख़रीदहर सब्ज़ी के लिए अलग पतली थैलीकपड़े या जूट का बड़ा झोला; भीतर छोटे कपड़े के थैले
राशन — दाल, चावल, आटाप्लास्टिक की बड़ी थैलियाँघर से स्टील/प्लास्टिक का डिब्बा या कपड़े की थैली ले जाना
विद्यालय का टिफ़िनक्लिंग-फ़िल्म और पॉलिथीन में रोटी लपेटनास्टील का टिफ़िन, सूती कपड़े का नैपकिन, केले का पत्ता
पानीप्लास्टिक की बोतलेंस्टील या ताँबे की बोतल; कक्षा में मिट्टी का घड़ा
जन्मदिन और समारोहथर्मोकोल की प्लेट, प्लास्टिक के चम्मच-गिलासपत्तल-दोना, काग़ज़ की प्लेट, स्टील के गिलास
दुकान से मिठाई/नाश्तापॉलिथीन की थैलीकाग़ज़ के लिफ़ाफ़े, अख़बार की थैली, घर का डिब्बा
पुस्तक-कॉपी की जिल्दप्लास्टिक कवरभूरा काग़ज़ या पुराने कैलेंडर का काग़ज़
पौधों की नर्सरीकाली पॉलिथीन की थैलियाँमिट्टी के गमले, नारियल-जटा या काग़ज़ की क्यारी
कचरा फेंकनापॉलिथीन में भरकर फेंकनागीले कचरे से खाद बनाना; सूखा कचरा अलग डिब्बे में
प्रस्तुति का सुझाव: सूची के साथ एक छोटा-सा आँकड़ा भी जोड़िए — जैसे “हमारे घर में एक सप्ताह में 14 पॉलिथीन आईं; कपड़े का झोला लेने पर यह घटकर 2 रह गईं।” आँकड़ा उत्तर को बहुत मज़बूत बना देता है।
क्यों ज़रूरी है: प्लास्टिक सैकड़ों साल तक नहीं गलता। खुले में पड़ी थैली गाय के पेट में जाकर उसकी जान ले लेती है और नाली में जाकर बरसात में जल-भराव करती है। एक कपड़े का झोला सैकड़ों थैलियों की जगह ले लेता है।
प्र2.
(ख) सभी विद्यार्थी ‘पर्यावरण बचाओ’ विषय पर एक नुक्कड़ नाटक तैयार करें और उसकी प्रस्तुति विद्यालय प्रांगण में करें।
उत्तर

नुक्कड़ नाटक वह नाटक है जो मंच पर नहीं, खुली जगह में — चौराहे, प्रांगण या गली में — दर्शकों के बीच खड़े होकर किया जाता है। इसमें पर्दा, सजावट और माइक नहीं होते; ऊँची आवाज़, ताली की लय और सामूहिक नारे ही उसकी ताक़त हैं।

तैयारी के चरण:

  1. समूह बनाइए — 10 से 12 विद्यार्थी। दो-तीन साथी ‘कोरस’ में रहें जो बीच-बीच में नारा दोहराएँ।
  2. पात्र तय कीजिए — पेड़, चिड़िया, नदी, गाय, प्लास्टिक की थैली, ठेकेदार, बच्चा और सूत्रधार। पेड़ और चिड़िया को बोलने वाला पात्र बनाना नुक्कड़ नाटक की सबसे प्रभावशाली युक्ति है।
  3. कथानक — (1) एक हरा-भरा गाँव; (2) ठेकेदार पेड़ काटने आता है; (3) चिड़िया का घोंसला गिर जाता है; (4) गाय प्लास्टिक निगल लेती है; (5) बच्चे विरोध करते हैं और पौधे लगाते हैं; (6) अंत में सब मिलकर संकल्प लेते हैं।
  4. संवाद छोटे रखिए — दो-दो पंक्तियों के। नुक्कड़ नाटक में लंबे भाषण नहीं चलते।
  5. नारे तैयार कीजिए — “पेड़ बचाओ, जीवन बचाओ!”, “थैला लाओ, थैली भगाओ!”, “पिंजरा नहीं, आसमान दो!”
  6. कविता जोड़िए — बीच में या अंत में कक्षा मिलकर बोले — “सीमा-हीन गगन में उड़ते, निर्भय विचरण करते हैं!”
  7. अभ्यास — कम से कम तीन बार खुले में अभ्यास कीजिए, ताकि बिना माइक के आवाज़ पीछे तक पहुँचे।

नमूना अंश:

पात्रसंवाद
सूत्रधाररुको! ज़रा ठहरो! एक कहानी सुनते जाओ — यह कहानी तुम्हारी भी है।
चिड़ियामैं इसी पीपल पर रहती थी… कल यहाँ आरी चली और मेरा घर गिर गया।
पेड़मैंने पचास साल छाया दी, हवा दी, फल दिए। बदले में क्या माँगा? कुछ भी नहीं।
गायऔर मैंने? रोटी समझकर एक थैली निगल ली थी… अब कुछ खाया नहीं जाता।
बच्चाबस! आज से हमारे मुहल्ले में न पेड़ कटेगा, न थैली आएगी।
सब मिलकरपेड़ बचाओ, जीवन बचाओ! धरती अपनी, हम रखवाले!
ध्यान रखिए: प्रस्तुति के लिए विद्यालय से अनुमति लीजिए, दर्शकों के आने-जाने का रास्ता खुला रखिए और नाटक 8–10 मिनट से लंबा मत कीजिए।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ