कक्षा ७ हिंदी अध्याय 8 बिरजू महाराज से साक्षात्कार के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

पाठ की विधा साक्षात्कार है — वह भी व्यक्तिपरक साक्षात्कार , जिसका उद्देश्य साक्षात्कारदाता के निजी जीवन, कामकाज, उपलब्धियों और विचारों को पाठकों के सामने लाना है। यह नौकरी वाले साक्षात्कार से बिलकुल अलग है। बिरजू महाराज को कथक विरासत में मिला। उनके गुरु थे उनके पिता अच्छन महाराज तथा चाचा शंभू महाराज और लच्छू महाराज। घर में कथक का माहौल था, इसलिए औपचारिक तालीम शुरू होने से पहले ही वे देख-देखकर कथक सीख गए थे। पिता के देहांत के बाद घर में गहरी आर्थिक तंगी आई — कभी कर्ज, कभी पुरानी ज़री की साड़ियाँ जलाकर सोने-चाँदी के तार बेचना। इस दौर में सबसे बड़ी सहयोगी उनकी माँ थीं, जो कहती थीं — “खाने को भले ही चना मिले या कुछ भी न मिले पर अभ्यास जरूर करो।” गंडा (ताबीज़) बाँधने की रस्म गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है। बिरजू महाराज ने इस परंपरा को उल्टा कर दिया — वे पहले वर्षों तक सिखाते हैं और जब

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शब्दअर्थपाठ में संदर्भअपने वाक्य में प्रयोग
गंडाताबीज़; तालीम आरंभ करते समय गुरु द्वारा शिष्य के हाथ में बाँधा जाने वाला धागा“गुरु शिष्यों को गंडा (ताबीज़) बाँधते हैं”गुरुजी ने सच्ची लगन देखकर ही उसे गंडा बाँधा।
तालीमप्रशिक्षण, शिक्षा“कथक की तालीम शुरू करते समय…”संगीत की तालीम बचपन से ही शुरू कर देनी चाहिए।
घरानाकलाकारों का समुदाय या कुटुंब, जो शैली को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाता है“हमारे लखनऊ घराने के लोग…”किराना घराने की गायकी अपनी अलग पहचान रखती है।
लयगति का क्रमबद्ध और संतुलित प्रवाह“लय हर काम में, नृत्य में, जीवन में संतुलन बनाए रखती है।”चलते समय भी हमारे कदमों में एक लय होती है।
तालकई मात्रा-समूहों का संयुक्त रूप, जिससे संगीत में लय मापी जाती है“ताल कई मात्राओं का संयुक्त रूप है।”तबले पर तीन ताल बजते ही सब झूमने लगे।
मात्रासंगीत के समय को मापने की सबसे छोटी इकाई“संगीत के समय को मापने की सबसे छोटी इकाई मात्रा है”कहरवा ताल में आठ मात्राएँ होती हैं।
लहरानृत्य के साथ बार-बार दोहराई जाने वाली संगीत की धुन“वह जान पाएगा कि यह लहरा ठीक नहीं है”हारमोनियम पर लहरा बजते ही नर्तकी ने तत्कार शुरू किया।
कथिककथावाचक; कथा कहते हुए नाचने वाला कलाकार“वहाँ 989 कथिकों के घर हुआ करते थे।”कथिक अपनी कथा भाव-भंगिमाओं से सजाते थे।
चाँदनीबिछाने की बड़ी सफेद चादर“फर्श पर चाँदनी … बिछी होती थी”आँगन में चाँदनी बिछाकर संगीत-सभा सजाई गई।
सामर्थ्यशक्ति, क्षमता“यह तो अपने सामर्थ्य पर निर्भर करता है।”अपने सामर्थ्य से अधिक बोझ मत उठाओ।
ओजतेज, जोश, शक्ति“कथकली में ओज है।”उसके भाषण में ऐसा ओज था कि सब मंत्रमुग्ध रह गए।
भाव-भंगिमाचेहरे और शरीर से भाव प्रकट करने का ढंग“हमने उन भाव-भंगिमाओं को भी कथक में शामिल कर लिया।”नृत्य में भाव-भंगिमा शब्दों से भी अधिक बोलती है।
विरासतपूर्वजों से मिली संपत्ति या परंपरा“कथक की कला उन्हें विरासत में मिली थी”भाषा हमें विरासत में मिली सबसे बड़ी पूँजी है।
  1. मेरी समझ से
  2. मिलकर करें मिलान
  3. शीर्षक
  4. पंक्तियों पर चर्चा
  5. सोच-विचार के लिए
  6. शब्दों की बात
  7. शब्दों का प्रभाव
  8. कला का संसार
  9. साक्षात्कार की रचना
  10. सृजन
  11. आज की पहेली
  12. झरोखे से
  13. साझी समझ
  14. खोजबीन के लिए
  15. पढ़ने के लिए
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